रक्षा, तकनीक और हरित ऊर्जा: भारत–जर्मनी संबंधों का नया युग
मुख्य परीक्षा: सामान्य अध्ययन पेपर-2
चर्चा में क्यों ?
भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है। हाल ही में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा इस साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने और दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर से मेल खाती है।
यह दौरा भारत के गणतंत्र दिवस और आगामी भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन से पहले हो रहा है।
इस दौरे के दौरान दोनों देशों ने 19 द्विपक्षीय समझौतों/समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए, जो रणनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक सहयोग को और गहरा करने का संकेत देते हैं।
यात्रा के प्रमुख परिणाम:
रक्षा एवं औद्योगिक सहयोग
भारत–जर्मनी रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप पर संयुक्त आशय घोषणा (JDOI) पर हस्ताक्षर।
सह-विकास और सह-उत्पादन, उन्नत प्रौद्योगिकी साझेदारी तथा जर्मनी से रक्षा निर्यात अनुमतियों में तेजी पर सहमति।
पनडुब्बियों, हेलीकॉप्टरों की बाधा-निवारण प्रणालियों, C-UAS (काउंटर-ड्रोन सिस्टम) और वायु सेना व नौसेना के संयुक्त अभ्यास में सहयोग।
आत्मनिर्भर भारत को बल और रक्षा क्षेत्र में रूस पर निर्भरता में कमी।
उच्च शिक्षा एवं वैश्विक कौशल साझेदारी
जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसर स्थापित करने के लिए आमंत्रण।
स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता को सुगम बनाने पर सहमति।
स्कूलों, विश्वविद्यालयों और व्यावसायिक संस्थानों में जर्मन भाषा शिक्षण के विस्तार का प्रस्ताव।
नवीकरणीय ऊर्जा में कौशल विकास हेतु भारत–जर्मनी उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना।
आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग
वर्ष 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 50 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक।
आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण, स्टार्टअप्स, डिजिटलीकरण और नवाचार में सहयोग।
भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को गति देने पर समर्थन।
महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियां
सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, दूरसंचार, डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और स्वास्थ्य क्षेत्रों में सहयोग।
विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं और डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करने पर जोर।
जलवायु, ऊर्जा एवं स्थिरता
भारत–जर्मनी नवीकरणीय ऊर्जा उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना।
हरित हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में संयुक्त निवेश और अनुसंधान।
हिंद-प्रशांत एवं वैश्विक भू-राजनीति
स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति साझा प्रतिबद्धता।
इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) में जर्मनी की बढ़ती भागीदारी।
वैश्विक मुद्दों-यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष और बहुपक्षीय शासन सुधार—पर समन्वित दृष्टिकोण।
भारत-जर्मनी संबंधों की वर्तमान स्थिति
1. संस्थागत ढांचा
अंतर-सरकारी परामर्श (IGC) तंत्र, जो यूरोप में भारत के सबसे मजबूत संस्थागत संबंधों में से एक है।
2. व्यापार और निवेश
भारत में 2,000 से अधिक जर्मन कंपनियां, जो लगभग 4 लाख नौकरियों का समर्थन करती हैं।
जर्मनी में भारतीय निवेश 6.5 बिलियन यूरो से अधिक।
3. रणनीतिक परियोजनाएं
प्रोजेक्ट 75I पनडुब्बी कार्यक्रम, उन्नत रक्षा सहयोग का प्रमुख उदाहरण।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में दीर्घकालिक साझेदारी।
हरित वित्तपोषण के तहत भारत के लिए 10 बिलियन यूरो तक की प्रतिबद्धता।
4. मानव संसाधन एवं शिक्षा
जर्मनी में लगभग 28 लाख भारतीय प्रवासी।
42,000 से अधिक भारतीय छात्र, जो जर्मनी को भारतीय छात्रों के लिए प्रमुख गंतव्य बनाते हैं।
चुनौतियाँ और आगे का रास्ता
पनडुब्बी एवं रक्षा समझौतों का समयबद्ध और प्रभावी कार्यान्वयन।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक समन्वय को और गहरा करना।
सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिज सहयोग को संस्थागत रूप देना।
भारत–ईयू FTA में यूरोपीय नियमों और भारतीय बाजार आवश्यकताओं के बीच संतुलन।
शिक्षा और कौशल साझेदारी में क्रियान्वयन की गति बढ़ाना।
निष्कर्ष
मर्ज़–मोदी शिखर सम्मेलन ने भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम दिया है।
यह साझेदारी अब केवल व्यापार तक सीमित न होकर रक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और हरित ऊर्जा तक विस्तृत हो चुकी है।
बदलती वैश्विक भू-राजनीति में भारत और जर्मनी लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक पूरकता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के आधार पर स्वाभाविक साझेदार के रूप में उभर रहे हैं।
भारत की यूरोप और हिंद-प्रशांत रणनीति में यह साझेदारी एक प्रमुख स्तंभ बनती जा रही है।