डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम 3.0
संदर्भ
हाल ही में केंद्र सरकार ने डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) के तीसरे चरण यानी डीआईएलआरएमपी 3.0 के संचालन से संबंधित दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस चरण के लिए 565.5 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है।
डीआईएलआरएमपी 3.0 के बारे में
डीआईएलआरएमपी 3.0 का मुख्य उद्देश्य भूमि से जुड़े अभिलेखों, नक्शों, पंजीकरण तथा अन्य संबंधित आंकड़ों को एकीकृत करना है।
इसके लिए जीआईएस आधारित डिजिटल व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे भूमि संबंधी सूचनाओं को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और आसानी से उपलब्ध बनाया जा सके।
पृष्ठभूमि
वर्ष 2008 में केंद्र सरकार ने स्ट्रेंथनिंग ऑफ रेवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन एंड अपडेटिंग ऑफ लैंड रिकॉर्ड्स (एसआरए एंड यूएलआर) तथा कम्प्यूटरीकरण ऑफ लैंड रिकॉर्ड्स (सीएलआर) योजनाओं को एक साथ मिलाकर नेशनल लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (एनएलआरएमपी) शुरू किया।
वर्ष 2016 में इसे डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत शामिल किया गया और इसका नाम बदलकर डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) कर दिया गया।
कार्यक्रम की अवधि
डीआईएलआरएमपी 3.0 एक पाँच वर्षीय पहल है, जिसे 2026 से 2031 तक लागू किया जाना है।
वित्त पोषण
यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है और इसके लिए 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी।
क्रियान्वयन
इस कार्यक्रम को ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ लैंड रिसोर्सेज - डीओएलआर) द्वारा लागू किया जाएगा।
योजना की प्रगति पर वास्तविक समय में नजर रखने के लिए उन्नत डीआईएलआरएमपी-एमआईएस डैशबोर्ड का इस्तेमाल किया जाएगा।
डीआईएलआरएमपी 3.0 की प्रमुख विशेषताएँ
यूनिवर्सल भू-आधार (यूएलपीआईएन): देश के प्रत्येक भू-खंड को एक 14 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या देने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे हर भूमि संपत्ति की अलग और सुरक्षित पहचान सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
नक्शों का डिजिटलीकरण और जियो-रेफरेंसिंग: भूमि से संबंधित कैडस्ट्रल मैप्स को पूरी तरह डिजिटल रूप में परिवर्तित किया जाएगा। इन्हें सटीक भौगोलिक निर्देशांकों से जोड़ा जाएगा, जिससे भूमि की वास्तविक स्थिति और सीमाओं की बेहतर पहचान संभव होगी।
कागज रहित संपत्ति पंजीकरण: संपत्ति पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और पेपरलेस बनाने की दिशा में कदम उठाया जाएगा। इसके साथ एक नया रजिस्ट्रेशन रिपॉजिटरी भी तैयार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मंत्रालय की योजना 75 सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों (एसआरओ) को आधुनिक रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्रों में विकसित करने की है।
एकीकृत राजस्व न्यायालय:भूमि विवादों से जुड़े मामलों के प्रबंधन के लिए आधुनिक पेपरलेस केस मैनेजमेंट सिस्टम (आरसीसीएमएस) विकसित किया जाएगा। इसे सीधे भूमि अभिलेखों से जोड़ा जाएगा, ताकि मामलों की निगरानी आसान हो और विवादों के समाधान में लगने वाला समय एवं कानूनी खर्च कम किया जा सके।
शहरी क्षेत्रों के लिए नक्ष पायलट: शहरी भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण से संबंधित नक्ष पायलट परियोजना को पूरा किया जाएगा।
राज्य स्तरीय लैंड स्टैक की अवधारणा
डीआईएलआरएमपी 3.0 के तहत प्रत्येक राज्य को अपना लैंड स्टैक विकसित करने की सुविधा मिलेगी। इसके लिए भूमि से संबंधित विभिन्न डेटासेट और डिजिटल प्रणालियों को एपीआई के माध्यम से आपस में जोड़ा जा सकेगा।
बाद में विभिन्न राज्यों द्वारा विकसित ये राज्य स्तरीय लैंड स्टैक, एक व्यापक और परस्पर जुड़े हुए राष्ट्रीय लैंड स्टैक के निर्माण की आधारभूत इकाइयों के रूप में काम करेंगे।
इस प्रकार डीआईएलआरएमपी 3.0 का उद्देश्य केवल भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल बनाना नहीं, बल्कि भूमि से संबंधित विभिन्न सूचनाओं और सेवाओं को एकीकृत डिजिटल ढाँचे में लाकर भूमि प्रशासन को अधिक पारदर्शी, कुशल और तकनीक सक्षम बनाना है।