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ई-फास्ट इंडिया (e-FAST India)

संदर्भ 

हाल ही में नीति आयोग (NITI Aayog) की ई-फास्ट इंडिया (e-FAST India) पहल ने 5वें ई-फास्ट इंडिया समिट 2026 (5th e-FAST India Summit 2026) के दौरान प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट (Platform for Aggregating Clean Transport - PACT) और जेडईटी मार्केटप्लेस (ZET Marketplace) की शुरुआत की। 

ई-फास्ट इंडिया के बारे में

  • ई-फास्ट इंडिया (Electric Freight Accelerator for Sustainable Transport-India) भारत का पहला राष्ट्रीय सहयोगात्मक मंच है, जिसका उद्देश्य माल ढुलाई के क्षेत्र में विद्युतीकरण (Freight Electrification) को तेज करना है। इसका विशेष ध्यान मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहनों (Medium- and Heavy-Duty Vehicles - MHDVs) पर है। 

नोडल संगठन

  • इस पहल का नेतृत्व नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा किया जा रहा है।  

उद्देश्य 

  • ई-फास्ट इंडिया का मुख्य उद्देश्य भारत के सड़क माल परिवहन (Road Freight Transport) को कार्बन-मुक्त करने की दिशा में आगे बढ़ाना है। यह शून्य-उत्सर्जन ट्रकों (Zero-Emission Trucks - ZETs) के सामने मौजूद बाजार संबंधी बाधाओं को दूर करने और माल परिवहन व्यवस्था को अलग-अलग छोटे पायलट प्रोजेक्ट्स (Pilot Projects) से निकालकर व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य और बड़े पैमाने पर लागू करने योग्य मॉडल में बदलने पर जोर देता है। 
  • यह पहल भारत के 2070 तक नेट-जीरो (Net-Zero 2070) लक्ष्य को हासिल करने में भी योगदान दे सकती है। 

प्रमुख विशेषताएँ 

1. पैक्ट के माध्यम से मांग का एकत्रीकरण

  • प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट (PACT) बड़े माल भेजने वाले उद्यमों, ई-कॉमर्स कंपनियों (E-commerce Companies) और लॉजिस्टिक्स सर्विस प्रोवाइडर्स (Logistics Service Providers - LSPs) की माल परिवहन संबंधी मांग को एकत्र करता है।
  • इससे विभिन्न माल परिवहन मार्गों पर शून्य-उत्सर्जन वाहनों की वास्तविक मांग स्पष्ट होती है और वाहन बेड़े में निवेश करने वाली कंपनियों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलती है। 

2. बी2बी जेडईटी मार्केटप्लेस 

  • बी2बी जेडईटी मार्केटप्लेस (B2B ZET Marketplace) एक कारोबारी मंच है, जो ट्रक निर्माता (Original Equipment Manufacturers - OEMs), फ्लीट ऑपरेटर (Fleet Operators), चार्ज पॉइंट ऑपरेटर (Charge Point Operators - CPOs) और क्लीन-टेक स्टार्टअप्स (Clean-tech Startups) को एक-दूसरे से जोड़ता है। इसका उद्देश्य व्यावसायिक रुचि को वास्तविक कारोबारी समझौतों और अनुबंधों में बदलना है।

3. कॉरिडोर आधारित चार्जिंग बुनियादी ढाँचा 

  • ई-फास्ट इंडिया उच्च यातायात वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख माल परिवहन मार्गों पर हाई-कैपेसिटी हेवी-ड्यूटी फास्ट-चार्जिंग हब (High-capacity Heavy-duty Fast-charging Hubs) की रणनीतिक स्थापना और निवेश को बढ़ावा देता है।
  • इससे लंबी दूरी तक चलने वाले इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों के लिए पर्याप्त चार्जिंग सुविधा विकसित करने में मदद मिलेगी। 

4. नवीन वित्तपोषण और जोखिम में कमी 

  • इलेक्ट्रिक ट्रकों की शुरुआती खरीद लागत अधिक होने के कारण कंपनियों के सामने वित्तीय बाधाएँ आती हैं। इन्हें दूर करने के लिए ग्रीन क्रेडिट लाइन (Green Credit Lines), रिस्क-शेयरिंग फैसिलिटी (Risk-sharing Facilities), लीजिंग व्यवस्था (Leasing Arrangements) और बैटरी हेल्थ मॉनिटरिंग (Battery Health Monitoring) जैसी वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्थाओं पर विचार किया जा रहा है।

5. नीति और नियामक समन्वय 

  • यह पहल विभिन्न सरकारी मंत्रालयों के साथ समन्वय करके तकनीकी मानकों (Technical Standards), बैटरी गवर्नेंस फ्रेमवर्क (Battery Governance Frameworks) और वित्तीय प्रोत्साहन संरचनाओं (Fiscal Incentive Structures) को विकसित करने में मदद करती है।
  • इसका उद्देश्य घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण (EV Manufacturing) को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल नीतिगत वातावरण तैयार करना है।

महत्व 

  • परिवहन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन में कमी: ई-फास्ट इंडिया का विशेष ध्यान भारी मालवाहक ट्रकों पर है। ये वाहन ग्रीनहाउस गैस (Greenhouse Gas - GHG) उत्सर्जन और पार्टिकुलेट प्रदूषण (Particulate Pollution) में अपेक्षाकृत बड़ा योगदान देते हैं। इनका विद्युतीकरण परिवहन क्षेत्र के उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
  • लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार: इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से लंबे समय में कुल स्वामित्व लागत (Total Cost of Ownership - TCO) कम हो सकती है। इससे आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स लागत (Logistics Costs) को कम करने में मदद मिल सकती है। 

इस प्रकार, ई-फास्ट इंडिया का लक्ष्य केवल इलेक्ट्रिक ट्रकों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि मांग, वाहन, चार्जिंग बुनियादी ढाँचे, वित्तपोषण और नीतिगत समर्थन को एक साथ जोड़कर भारत के माल परिवहन क्षेत्र में व्यावसायिक रूप से टिकाऊ और बड़े पैमाने पर शून्य-उत्सर्जन परिवहन व्यवस्था विकसित करना है। 

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