हाल ही में ई-जाग्रति (e-Jagriti) प्लेटफॉर्म को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार (NAeG) 2026 में रजत पुरस्कार (Silver Award) प्रदान किया गया। वस्तुतः यह सम्मान डिजिटल शासन और उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने में इसके योगदान को मान्यता देता है।
ई-जाग्रति प्लेटफॉर्म के बारे में
ई-जाग्रति, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के उपभोक्ता मामले विभाग की एक प्रमुख डिजिटल पहल है, जिसे 1 जनवरी 2025 को शुरू किया गया था।
इसका उद्देश्य देशभर में उपभोक्ता विवाद निवारण तंत्र को आधुनिक, पारदर्शी और अधिक सुलभ बनाना है।
प्रमुख विशेषताएँ:
वैश्विक स्तर पर सुलभता:यह मंच भारत के नागरिकों के साथ-साथ प्रवासी भारतीयों (NRIs) को भी दुनिया के किसी भी हिस्से से उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने और मामलों की निगरानी करने की सुविधा प्रदान करता है। सुरक्षित एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन तथा भूमिका-आधारित एक्सेस प्रणाली इसकी सुरक्षा को मजबूत बनाती है।
समावेशी और उपयोगकर्ता-अनुकूल व्यवस्था:बहुभाषी इंटरफेस और विशेष सुलभता सुविधाओं के कारण यह विभिन्न आयु, भाषा और सामाजिक पृष्ठभूमि के उपयोगकर्ताओं के लिए सहज अनुभव प्रदान करता है।
एकीकृत डिजिटल मंच: ई-जाग्रति ने चार अलग-अलग पुरानी प्रणालियों जैसे- ओसीएमएस, ई-दाखिल, एनसीडीआरसीसीएमएस और कॉन्फ़ोनेट को एकीकृत कर एक ही एआई-सक्षम और पूर्णतः पेपरलेस प्लेटफॉर्म में परिवर्तित कर दिया है। इससे प्रक्रियाओं में दोहराव कम हुआ है और कार्यकुशलता बढ़ी है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्मार्ट सुविधाएँ:प्लेटफॉर्म में एआई एवं एमएल तकनीकों का उपयोग कर उन्नत सर्च सुविधा विकसित की गई है, जिससे पुराने मामलों, दावों और निर्णयों को आसानी से खोजा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, वॉयस-टू-टेक्स्ट तकनीक के माध्यम से निर्णयों और केस रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण भी किया जाता है।
ऑनलाइन शिकायत और निगरानी:उपभोक्ता घर बैठे शिकायत दर्ज कर सकते हैं, निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं, मामले की प्रगति पर नज़र रख सकते हैं तथा आयोगों द्वारा दिए गए निर्णयों तक डिजिटल रूप से पहुँच सकते हैं।
महत्व
ई-जाग्रति ने उपभोक्ता आयोगों के डिजिटलीकरण को गति देने के साथ-साथ नागरिकों के लिए न्याय तक पहुँच को सरल बनाया है।
यह सभी स्तरों पर उपभोक्ता विवादों के निपटारे के लिए अधिक पारदर्शी, त्वरित और लागत-प्रभावी समाधान उपलब्ध कराता है। इसके माध्यम से उपभोक्ता संरक्षण व्यवस्था को तकनीक-संचालित और अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।