संदर्भ
असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड (APL) ने गुजरात के कांडला बंदरगाह पर 150 टन प्रतिदिन (TPD) की क्षमता वाला ई-मेथनॉल संयंत्र स्थापित करने के लिए दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPA) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जो भारत के स्वच्छ ऊर्जा व हरित परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
ई-मेथनॉल संयंत्र के बारे में
- इस परियोजना में पूंजी के रूप में 1,200 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप लगभग 3,500 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
- इस समझौते के तहत डी.पी.ए. बंदरगाह पर पाइपलाइन कनेक्टिविटी, भंडारण एवं ईंधन-हैंडलिंग से संबंधित बुनियादी ढांचा प्रदान करेगा। वहीं, ए.पी.एल. बंदरगाह क्षेत्र के भीतर हरित मेथनॉल उत्पादन सुविधा स्थापित करेगा, जिससे हरित समुद्री ईंधन के लिए एक एकीकृत मूल्य शृंखला का निर्माण होगा।
- ई-मेथनॉल या इलेक्ट्रो-मेथनॉल नवीकरणीय बिजली द्वारा संचालित हरित हाइड्रोजन और एकत्रित कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके उत्पादित किया जाता है। इसे शिपिंग, भारी उद्योग एवं रासायनिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों के लिए सबसे व्यवहार्य वैकल्पिक ईंधनों में से एक माना जाता है जहाँ प्रत्यक्ष विद्युतीकरण अभी भी चुनौतीपूर्ण है।
असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड
- असम स्थित ए.पी.एल. नामरूप देश की सबसे बड़ी मेथनॉल सुविधाओं में से एक का संचालन करती है और इसने हाल ही में अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार किया है।
- डी.पी.ए. और कांडला के साथ साझेदारी से कंपनी को पारंपरिक मेथनॉल से हरित और ई-मेथनॉल उत्पादन की ओर मूल्य शृंखला में आगे बढ़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कांडला बंदरगाह के बारे में
- भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद जब कराची बंदरगाह पाकिस्तान के पास गया, तब पश्चिमी भारत के प्रमुख बंदरगाह के रूप में कंडला का निर्माण 1950 के दशक में किया गया।
- कंडला बंदरगाह भारत के उत्तर-पश्चिमी तट पर कच्छ की खाड़ी पर स्थित है जो पाकिस्तान के कराची बंदरगाह से लगभग 256 समुद्री मील दक्षिण-पूर्व और मुंबई (बॉम्बे) बंदरगाह से 430 समुद्री मील उत्तर-उत्तर-पश्चिम में है। माल ढुलाई की मात्रा के हिसाब से यह भारत का सबसे बड़ा बंदरगाह है।
- कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों के तहत कांडला बंदरगाह को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर चलने वाले जहाजों को कम एवं शून्य कार्बन वाले ईंधन की आपूर्ति के लिए एक ग्रीन बंकरिंग हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।
- भारत के पश्चिमी तट पर स्थित गुजरात में कांडला बंदरगाह राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में विकसित किए जा रहे बंदरगाहों में से एक है।
- इस मिशन का लक्ष्य अगले 5 से 6 वर्षों में लगभग 5 मिलियन टन हरित हाइड्रोजन का उत्पादन एवं निर्यात करना है। यह पहल प्रधानमंत्री द्वारा उल्लिखित 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता में भी योगदान देती है।