असम के भूगोल शिक्षक राजेश बोरदोलोई को उनकी अभिनव ‘Each One Teach One’ पहल के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। इस पहल की खासियत यह है कि इसमें विद्यार्थी स्वयं शिक्षक की भूमिका निभाकर अपनी माताओं को साक्षर बनाने और डिजिटल तकनीक का उपयोग करना सिखाते हैं।
ईच वन टीच वन पहल के बारे में
यह सामुदायिक शिक्षा मॉडल असम के जोरहाट जिले के कलबारी स्थित आदर्श ट्राइबल हायर सेकेंडरी स्कूल में शुरू किया गया।
इसके अंतर्गत कक्षा 10 के विद्यार्थी अपने घर पर माताओं को पढ़ना-लिखना सीखने के साथ-साथ डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल में भी सहायता करते हैं।
कार्यक्रम का संचालन
इस पहल में विद्यार्थी अपनी माताओं को रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े डिजिटल और बुनियादी कौशल सिखाते हैं।
इनमें स्मार्टफोन का संचालन, यूपीआई के जरिए भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग तथा विभिन्न आवश्यक डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल शामिल है।
स्कूल की अभिभावक-शिक्षक बैठकों में भी स्मार्ट बोर्ड का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे माताओं को डिजिटल उपकरणों के प्रति सहज बनाया जा सके।
पहल की प्रमुख विशेषताएँ
शिक्षण की नई अवधारणा:इसमें विद्यार्थी केवल सीखने वाले नहीं रहते, बल्कि शिक्षक बनकर अपने परिवार और समुदाय में सकारात्मक बदलाव की भूमिका निभाते हैं।
महिला डिजिटल साक्षरता:माताओं को पढ़ने-लिखने के साथ स्मार्टफोन, डिजिटल भुगतान, बैंकिंग और ऑनलाइन सेवाओं के उपयोग का व्यावहारिक ज्ञान मिलता है।
स्कूल से समुदाय तक शिक्षा: यह मॉडल शिक्षा को कक्षा तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों, अभिभावकों, स्कूल और स्थानीय समुदाय को एक-दूसरे से जोड़ता है।
जनजातीय समुदाय पर विशेष ध्यान: विद्यालय के करीब 99 प्रतिशत विद्यार्थी मिसिंग समुदाय से संबंधित हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे बच्चों की है जो अपने परिवार में शिक्षा प्राप्त करने वाली पहली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
सामाजिक जागरूकता का प्रयास: कार्यक्रम का उद्देश्य केवल साक्षरता बढ़ाना नहीं है। इसके माध्यम से बच्चों को स्कूल में बनाए रखने तथा बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता पैदा करने पर भी जोर दिया जाता है।
अन्य क्षेत्रों में अपनाने की संभावना: कलबारी से शुरू हुई यह पहल आसपास के कई गाँवों तक पहुँच चुकी है। इससे संकेत मिलता है कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप इस मॉडल को दूसरे क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है।
पहल का महत्व
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद: माताओं को पढ़ना-लिखना और डिजिटल माध्यमों का उपयोग सिखाने से उनकी वित्तीय समझ और स्वतंत्रता बढ़ती है। साथ ही वे आवश्यक सेवाओं का स्वयं लाभ उठा सकती हैं और परिवार से जुड़े निर्णयों में अधिक सक्रिय भागीदारी कर सकती हैं।
डिजिटल खाई को कम करने की दिशा में कदम: ग्रामीण एवं जनजातीय परिवारों में डिजिटल सुविधाओं की पहुँच बढ़ाने में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यूपीआई, ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल आवेदन और इंटरनेट आधारित सेवाओं के उपयोग से महिलाएँ तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनती हैं।
शिक्षा के माध्यम से सामाजिक बदलाव:ईच वन टीच वनपहलकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह शिक्षा को पीढ़ियों के बीच साझा करने की प्रक्रिया में बदल देती है। विद्यार्थी अपने ज्ञान को माताओं तक पहुँचाते हैं और इस तरह विद्यालय में सीखी गई बातें परिवार तथा पूरे समुदाय के सशक्तीकरण का माध्यम बनती हैं।