यूरोपीय संघ-मर्कोसुर समझौता

संदर्भ 

  • वर्ष 1999 से चली आ रही लंबी वार्ताओं के बाद यूरोपीय संघ (EU) और दक्षिण अमेरिकी देशों के समूह मर्कोसुर (Mercosur) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर 17 जनवरी को पराग्वे की राजधानी व सबसे बड़े शहर असुनसियन (Asunción) में हस्ताक्षर किए गए।
  • असुनसियन पराग्वे नदी के पूर्वी तट पर स्थित है।
  • यह समझौता 90% से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ कम करेगा। हालांकि, अब भी इसे यूरोपीय संसद की मंजूरी और सदस्य देशों की विधानसभाओं द्वारा अनुसमर्थन (Ratification) की आवश्यकता है जिसका फ्रांस विरोध कर रहा है।
  • हालांकि, यह समझौता निर्विवाद नहीं है। विशेष रूप से फ्रांस जैसे देश अपनी कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर इसके मुखर विरोधी रहे हैं।

मर्कोसुर (Mercosur): दक्षिण अमेरिका का आर्थिक इंजन

  • मर्कोसुर का गठन 1991 में असुनसियन संधि के माध्यम से हुआ था। इसके मूल सदस्य देशों में अर्जेंटीना, ब्राज़ील, पैराग्वे, उरुग्वे शामिल हैं। बाद में बोलीविया को पूर्ण सदस्यता प्रदान की गई। वेनेज़ुएला भी मर्कोसुर का पूर्ण सदस्य है किंतु वर्तमान में उसकी सदस्यता निलंबित है। इसके अतिरिक्त, कई अन्य दक्षिण अमेरिकी देश मर्कोसुर से सहयोगी सदस्य के रूप में जुड़े हुए हैं।
  • मर्कोसुर को दक्षिणी साझा बाज़ार के नाम से भी जाना जाता है जो दक्षिण अमेरिका का एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय व्यापार समूह है। मर्कोसुर की आधिकारिक कार्य भाषाएँ स्पेनिश एवं पुर्तगाली हैं।
  • इसकी स्थापना सदस्य देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और श्रम की मुक्त आवाजाही के माध्यम से आर्थिक एकीकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई थी।

मर्कोसुर के प्रमुख उद्देश्य

  • एक साझा क्षेत्रीय बाज़ार की स्थापना
  • सदस्य देशों के बीच व्यापारिक अवरोधों का उन्मूलन
  • आर्थिक नीतियों में सामंजस्य एवं समन्वय
  • वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी एवं लोगों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना
  • क्षेत्रीय व्यापार एवं आपसी सहयोग को सुदृढ़ करना 

यूरोपीय संघ–मर्कोसुर व्यापार समझौते की प्रमुख विशेषताएँ

  • यूरोपीय आयोग के अनुसार, यह समझौता शुल्क कटौती के संदर्भ में यूरोपीय संघ का अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता है।
  • इसके अंतर्गत EU के निर्यात पर लगने वाले €4 अरब से अधिक के शुल्क समाप्त किए जाएंगे। वर्तमान में मर्कोसुर देशों द्वारा कारों, डेयरी उत्पादों और वाइन पर अपेक्षाकृत ऊँचे आयात शुल्क लगाए जाते हैं। 

वर्तमान व्यापार परिदृश्य

  • यूरोपीय संघ और मर्कोसुर के बीच वार्षिक वस्तु व्यापार का मूल्य लगभग €111 अरब है।
  • EU का निर्यात मुख्यतः मशीनरी, रसायन और परिवहन उपकरणों तक सीमित है। वहीं EU का आयात कृषि उत्पादों, काग़ज़ व खनिजों पर केंद्रित है।

बाज़ार पहुँच से संबंधित प्रावधान

  • मर्कोसुर आगामी 15 वर्षों में यूरोपीय संघ के 91% निर्यातों पर आयात शुल्क समाप्त करेगा, जो वर्तमान में औसतन लगभग 35% हैं।
  • इसके विपरीत यूरोपीय संघ 10 वर्षों के भीतर मर्कोसुर के 92% निर्यातों को शुल्क-मुक्त करने का प्रावधान करता है।

संवेदनशील उत्पाद और कोटा व्यवस्था

  • यूरोपीय संघ द्वारा निम्नलिखित उत्पादों पर आयात कोटा बनाए रखा जाएगा-
    • पोल्ट्री, पोर्क, चीनी, एथेनॉल, चावल, शहद, मक्का और स्वीट कॉर्न
    • वहीं मर्कोसुर द्वारा दूध पाउडर और शिशु आहार (इन्फ़ेंट फ़ॉर्मूला) पर कोटा लागू किया जाएगा।

विस्तारित कोटा प्रावधान

  • यूरोपीय संघ में गोमांस (बीफ़) का आयात अधिकतम 99,000 टन तक किया जा सकेगा।
  • EU के लिए 30,000 टन पनीर के निर्यात पर शुल्क-मुक्त कोटा निर्धारित किया गया है। 

भौगोलिक संकेतक (Geographical Indications: GI)

इस समझौते के तहत लगभग 350 यूरोपीय खाद्य एवं पेय उत्पादों को मर्कोसुर देशों में भौगोलिक संकेतक संरक्षण प्राप्त होगा जिससे उनकी नकल व गलत ब्रांडिंग पर रोक लगेगी।

सुरक्षा प्रावधान और प्रवर्तन तंत्र

  • यदि समझौते की शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है तो यूरोपीय संघ-
    • संवेदनशील कृषि उत्पादों पर दी गई तरजीही बाज़ार पहुँच को निलंबित कर सकता है।
    • आयातित उत्पादों में कीटनाशक अवशेषों की कड़ी निगरानी और नियंत्रण लागू कर सकता है। 

घरेलू चिंताओं को दूर करने हेतु EU की पहलें

  • एक विशेष कृषि संकट कोष की स्थापना
  • उर्वरकों के आयात पर शुल्क में कटौती
  • €45 अरब की किसान सहायता योजनाओं को शीघ्र लागू करना
  • आयात जाँच और निरीक्षण प्रक्रियाओं को कठोर बनाना

EU-मर्कोसुर समझौते के विरोध का कारण 

विरोध करने वाले देश

फ्रांस, पोलैंड, ऑस्ट्रिया, हंगरी व आयरलैंड ने इस समझौते के विरुद्ध मतदान किया। बेल्जियम ने मतदान में भाग नहीं लिया, जबकि इटली ने अपना पूर्व वीटो हटाकर समझौते के मार्ग को प्रशस्त किया।

कृषि प्रतिस्पर्धा से जुड़ी आशंकाएँ

विरोधी देशों को चिंता है कि मर्कोसुर से आने वाले कम लागत वाले कृषि उत्पाद यूरोपीय किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ा देंगे। विशेष रूप से आयरलैंड के किसान 99,000 टन अतिरिक्त बीफ़ आयात को लेकर गंभीर आशंका व्यक्त कर रहे हैं।

पर्यावरण एवं जलवायु संरक्षण संबंधी मुद्दे

आलोचकों का मत है कि मर्कोसुर देशों से आयातित कृषि उत्पाद यूरोपीय संघ के कठोर पर्यावरणीय एवं पशु कल्याण मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए वे जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता संरक्षण के लिए कठोर, बाध्यकारी व प्रवर्तनीय प्रावधानों की माँग कर रहे हैं। 

वनों की कटाई और स्थिरता पर चिंता

  • पर्यावरण समूहों और कुछ सरकारों का कहना है कि इन समझौते में वनों की कटाई रोकने हेतु प्रभावी प्रवर्तन तंत्र का अभाव है, विशेषकर अमेज़न जैसे संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में।
  • उनके अनुसार, यह समझौता प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन व जंगलों के क्षरण को बढ़ावा दे सकता है।

मानक, समानता एवं निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा

किसान संगठनों का तर्क है कि जब तक पर्यावरणीय और उत्पादन मानकों में समानता सुनिश्चित नहीं की जाती है तब तक यूरोपीय उत्पादकों को ढीले नियमों के अंतर्गत बने सस्ते आयातों से अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।

वर्तमान में समझौते की प्रासंगिकता 

रणनीतिक व्यापार विविधीकरण

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ते संरक्षणवाद के दौर में यह समझौता यूरोपीय संघ की व्यापारिक साझेदारियों को पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़ाने की रणनीति को दर्शाता है। 

चीन के बढ़ते प्रभाव का प्रतिकार

समर्थकों का मानना है कि यह समझौता लैटिन अमेरिका में चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव के संतुलन के रूप में कार्य करेगा और वैश्विक दक्षिण के साथ EU के संबंधों को सुदृढ़ करेगा। 

मर्कोसुर की अंतर्राष्ट्रीय विश्वसनीयता

इस समझौते से मर्कोसुर की एक गंभीर और भरोसेमंद वैश्विक व्यापारिक समूह के रूप में पहचान मज़बूत होगी, भले ही इसके भीतर राजनीतिक व आर्थिक मतभेद मौजूद हों। 

दोनों पक्षों के लिए आर्थिक लाभ

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के अनुसार, इस समझौते से मर्कोसुर की GDP में लगभग 0.7% और यूरोप की GDP में 0.1% की वृद्धि संभव है जो सीमित होने के बावजूद आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।  

व्यापारिक अस्थिरता से सुरक्षा

डोनाल्ड ट्रंप के पुनः व्हाइट हाउस पहुँचने के बाद संभावित नए टैरिफ आघातों के संदर्भ में यूरोपीय देश इस समझौते को अमेरिकी संरक्षणवादी नीतियों से उत्पन्न व्यापारिक क्षति की भरपाई का एक उपाय मानते हैं।

चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम

  • यह समझौता यूरोप को महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भरता घटाने में सहायक हो सकता है।
  • ब्राज़ील के पास ग्रेफाइट, निकेल, मैंगनीज़, रेयर अर्थ और नायोबियम के व्यापक भंडार हैं।
  • अर्जेंटीना विश्व के प्रमुख लिथियम उत्पादक देशों में शामिल है।
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