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निर्यात प्रोत्साहन मिशन   

  • हाल ही में, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM) के तहत सात अतिरिक्त उपायों का शुभारंभ किया। ई.पी.एम. वाणिज्य विभाग की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को वैश्विक बाजारों के लिए सशक्त बनाना है। 
  • इन उपायों का उद्देश्य भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों का समाधान करना, व्यापक एवं समावेशी निर्यात वृद्धि को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी निर्यात शक्ति के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करना है। 

प्रमुख बिंदु

  • निर्यात संवर्धन मिशन ‘निर्यात प्रोत्साहन’ के तहत वित्तीय सहायता और ‘निर्यात दिशा’ के तहत व्यापार इकोसिस्‍टम सहायता को मिलाकर एक समग्र इकोसिस्‍टम दृष्टिकोण अपनाता है जिसे एक एकीकृत व डिजिटल रूप से निगरानी किए गए ढांचे के माध्यम से प्रदान किया जाता है।
  • इस मिशन का कार्यान्वयन वाणिज्य विभाग द्वारा लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, एक्जिम बैंक, सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE), राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC), विनियमित ऋण संस्थानों, विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों, ई.पी.सी. एवं उद्योग हितधारकों के समन्वय से किया जाता है। 
  • हाल ही में, आरंभ किए गए उपायों का उद्देश्य लघु एवं मध्यम उद्यमों द्वारा सामना की जाने वाली संरचनात्मक बाधाओं को दूर करना है जिनमें पूंजी की उच्च लागत, विविध व्यापार वित्त साधनों तक सीमित पहुंच, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनुपालन का बोझ, लॉजिस्टिक संबंधी कमियां और बाजार में प्रवेश की बाधाएँ शामिल हैं।

निर्यात प्रोत्साहन के तहत शुरू की गई युक्तियां 

1. वैकल्पिक व्यापार साधनों (निर्यात फैक्टरिंग) के लिए सहायता

  • यह उपाय लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए किफायती कार्यशील पूंजी समाधान के रूप में निर्यात फैक्टरिंग को बढ़ावा देता है। 
  • आर.बी.आई./आई.एफ.एस.सी.ए. द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से किए गए पात्र लेनदेन पर फैक्टरिंग लागत पर 2.75% की ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी। सहायता की अधिकतम सीमा प्रति एम.एस.एम.ई. 50 लाख रुपए वार्षिक है और पारदर्शिता तथा समय पर वितरण सुनिश्चित करने के लिए इसे डिजिटल दावा तंत्र के माध्यम से संसाधित किया जाएगा।

2. ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए ऋण सहायता 

  • डिजिटल चैनलों का उपयोग करने वाले निर्यातकों को सहयोग देने के लिए ब्याज सब्सिडी और आंशिक ऋण गारंटी के साथ संरचित ऋण सुविधाएँ आरंभ की जा रही हैं। 
  • डायरेक्ट ई-कॉमर्स क्रेडिट फैसिलिटी के तहत 90% गारंटी कवरेज के साथ 50 लाख रुपए तक की सहायता प्रदान की जाएगी। 
  • ओवरसीज इन्वेंटरी क्रेडिट फैसिलिटी के तहत 75% गारंटी कवरेज के साथ 5 करोड़ रुपए तक की सहायता प्रदान की जाएगी। प्रति आवेदक 15 लाख रुपए की वार्षिक सीमा के अधीन 2.75% की ब्याज सब्सिडी उपलब्ध होगी।

3. उभरते निर्यात अवसरों के लिए सहायता

  • यह उपाय निर्यातकों को विभिन्न साझा जोखिम और ऋण साधनों के माध्यम से नए या उच्च जोखिम वाले बाजारों तक पहुँच बनाने में सक्षम बनाता है। 
  • इन संरचित तंत्रों का उद्देश्य निर्यातकों के आत्मविश्वास एवं तरलता प्रवाह को सुदृढ़ करना है। 

निर्यात दिशा के अंतर्गत किए गए उपाय 

1. व्यापार विनियम, प्रत्यायन एवं अनुपालन सक्षमीकरण (TRACE)

  • टी.आर.ए.सी.ई. निर्यातकों को अंतर्राष्ट्रीय परीक्षण, निरीक्षण, प्रमाणन एवं अन्य अनुरूपता आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करता है। 
  • पात्र परीक्षण, निरीक्षण एवं प्रमाणन व्यय के लिए सकारात्मक सूची के अंतर्गत 60% और प्राथमिकता सकारात्मक सूची के अंतर्गत 75% की आंशिक प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी जो प्रति आई.ई.सी. 25 लाख रुपए की वार्षिक सीमा के अधीन है।

2. लॉजिस्टिक्स, ओवरसीज वेयरहाउसिंग एंड फुलफिलमेंट की सुविधा प्रदान करना 

  • एफ.एल.ओ.डब्‍ल्‍यू. निर्यातकों को ओवरसीज वेयरहाउसिंग व फुलफिलमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच बनाने में सहायता करता है जिसमें वैश्विक वितरण नेटवर्क से जुड़े ई-कॉमर्स निर्यात हब शामिल हैं। स्वीकृत परियोजना लागत के 30% तक की सहायता अधिकतम तीन वर्षों के लिए प्रदान की जाएगी जो निर्धारित सीमाओं व एम.एस.एम.ई. भागीदारी मानदंडों के अधीन है।

3. माल ढुलाई एवं परिवहन हेतु लॉजिस्टिक्स उपाय (LIFT) 

  • एल.आई.एफ.टी. निम्‍न निर्यात तीव्रता वाले जिलों में निर्यातकों द्वारा सामना की जाने वाली भौगोलिक कठिनाइयों को कम करता है। 
  • पात्र माल ढुलाई व्यय के 30% तक की आंशिक प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी जो प्रति वित्तीय वर्ष प्रति निर्यातक के लिए 20 लाख रुपए की सीमा के अधीन होगी।

4. व्यापार खुफिया एवं सुगमीकरण के लिए एकीकृत सहायता (इनसाइट)

  • इनसाइट, निर्यातकों की क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करता है, ‘जिलों को निर्यात केंद्र’ पहल के तहत जिलों और क्लस्टर स्तर पर सुविधा प्रदान करता है और व्यापार खुफिया प्रणालियों का विकास करता है। 
  • वित्तीय सहायता परियोजना लागत के 50% तक है जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के संस्थानों व विदेशों में भारतीय दूतावासों से प्राप्त प्रस्तावों के लिए अधिसूचित सीमाओं के अधीन 100% तक सहायता प्रदान की जाती है।

वस्तुतः इन समन्वित वित्तीय एवं इकोसिस्‍टम संबंधी उपायों के माध्यम से सरकार का लक्ष्य पूंजी की लागत को कम करना, व्यापार वित्त साधनों में विविधता लाना, अनुपालन तत्परता को बढ़ाना, लाजिस्टिक संबंधी बाधाओं को दूर करना और लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए विदेशी बाजार एकीकरण को सुदृढ़ करना है।

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