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फिशिंग हार्बर परियोजना

संदर्भ 

  • हाल ही में, भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य विभाग ने अंडमान-निकोबार प्रशासन के मायाबंदर में स्मार्ट व एकीकृत फिशिंग हार्बर के विकास के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। 
  • यह परियोजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत 100% केंद्रीय वित्तीय सहायता के साथ लगभग 199.24 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत पर क्रियान्वित की जाएगी।  

स्मार्ट एवं एकीकृत फिशिंग हार्बर परियोजना के बारे में 

  • यह स्मार्ट फिशिंग हार्बर ब्लू पोर्ट पहल के अनुरूप विकसित किया जाएगा, जिसमें नवीनतम तकनीकों और आईओटी-सक्षम प्रणालियों से युक्त सुरक्षित लैंडिंग और बर्थिंग सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। 
  • इस परियोजना का उद्देश्य सतत मत्स्य प्रबंधन को बढ़ावा देना, मछलियों की हैंडलिंग क्षमता में वृद्धि करना तथा परिचालन सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।
  • इसके अतिरिक्त, इसमें ऊर्जा-कुशल प्रणालियों, डिजिटल ट्रेसबिलिटी और पर्यावरण-अनुकूल प्रक्रियाओं का समावेश किया जाएगा। इससे न केवल मत्स्य क्षेत्र में कार्यकुशलता बढ़ेगी, बल्कि अवैध, अलिखित एवं अनियमित (IUU) मछली पकड़ने पर नियंत्रण में भी सहायता मिलेगी। 
  • यह पहल भारत को सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। 

रोजगार और मत्स्य मूल्य श्रृंखला को बढ़ावा 

  • स्मार्ट और एकीकृत फिशिंग हार्बर के विकास से लगभग 430 मछली पकड़ने वाले जहाजों के लिए सुरक्षित लैंडिंग व बर्थिंग सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। 
  • इसके माध्यम से प्रति वर्ष लगभग 9,900 टन मछली लैंडिंग की सुविधा सुनिश्चित की जा सकेगी। 
  • इस परियोजना से मत्स्य मूल्य श्रृंखला में रोजगार के नए अवसर सृजित होने और मछुआरा समुदाय की आय एवं आजीविका को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की मत्स्य क्षमता

  • अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के पास लगभग 6 लाख वर्ग किलोमीटर का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) है जिसमें विशाल समुद्री संसाधन उपलब्ध हैं। 
  • अनुमान के अनुसार, यहाँ 60,000 मीट्रिक टन टूना व टूना जैसी प्रजातियों का भंडार मौजूद है जिसमें लगभग 24,000 मीट्रिक टन येलोफिन टूना और 2,000 मीट्रिक टन स्किपजैक टूना शामिल हैं।

निवेश और मूल्य श्रृंखला विकास के प्रयास 

  • मत्स्य क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने और मूल्य श्रृंखला के विकास हेतु मत्स्य विभाग ने 14 नवंबर 2024 को स्वराज द्वीप में ‘अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में निवेश के अवसर’ विषय पर एक निवेशक सम्मेलन का आयोजन किया। 
  • इस सम्मेलन में टूना फिशिंग तकनीकों, समुद्री शैवाल उत्पादन तथा संबद्ध अवसंरचना में विशेषज्ञता रखने वाले निवेशकों ने भाग लिया। इसके साथ ही, PMMSY के अंतर्गत द्वीप समूह में एक टूना क्लस्टर को भी अधिसूचित किया गया है जिसका उद्देश्य अवसंरचना विकास, प्रशिक्षण, निवेशक साझेदारी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को सुदृढ़ करना है।

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में पी.एम.एम.एस.वाई. के अंतर्गत मत्स्य क्षेत्र का सशक्तीकरण 

  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में मत्स्य पालन अवसंरचना और आजीविका सहायता प्रणालियों को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया गया है। 
  • इस दिशा में अब तक लगभग 5,573.02 लाख रुपए का निवेश किया गया है जिसके माध्यम से उत्पादन से लेकर विपणन तक एक समग्र और एकीकृत मत्स्य पालन इको-सिस्टम का विकास संभव हुआ है। 
  • इन प्रयासों ने मत्स्य उत्पादन, पश्च-प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, परिवहन तथा मछुआरों के कल्याण को समान रूप से सशक्त किया है। 

अवसंरचना और उत्पादन क्षमता में विस्तार 

  • पी.एम.एम.एस.वाई. के तहत प्रदान की गई सहायता से मत्स्य पालन के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक प्रगति दर्ज की गई है। इनमें हैचरी विकास, खुले समुद्र में पिंजरा मछली पालन, सजावटी मत्स्य पालन, मूल्यवर्धित उद्यम, कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स, मछली परिवहन और सामुदायिक सहायता प्रणालियां शामिल हैं।
  • योजना की प्रमुख उपलब्धियों में मीठे पानी की पांच फिनफिश हैचरियों, छोटे पैमाने की सात सजावटी मछली पालन इकाइयों, 23.2 हेक्टेयर क्षेत्र में नए खारे पानी के तालाब तथा 17.9 हेक्टेयर क्षेत्र में मीठे पानी के तालाबों की स्थापना उल्लेखनीय है। 
  • इसके अतिरिक्त, मछली चारा उत्पादन इकाइयों, इन्सुलेटेड वाहनों, प्रशीतित परिवहन प्रणालियों, मछली कियोस्क तथा मशीनीकृत मछली पकड़ने वाले जहाजों के लिए जैव-शौचालयों की स्थापना भी की गई है। 

मछुआरा कल्याण और आजीविका समर्थन 

  • 1,000 पारंपरिक मछुआरा परिवारों को आजीविका और पोषण संबंधी सहायता प्रदान की गई है।
  • आईटी-सक्षम सेवा वितरण प्रणाली के तहत 280 सागर मित्रों की तैनाती की गई, जिससे मछुआरा समुदाय और प्रशासन के बीच संपर्क एवं सेवाओं की पहुंच में सुधार हुआ है।
  • 10–20 टन क्षमता की नई एवं उन्नत कोल्ड-चेन सुविधाओं के माध्यम से शीत शृंखला का आधुनिकीकरण और विस्तार किया गया है जिससे मछली उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने तथा अपव्यय को कम करने में मदद मिली है। 

मूल्य श्रृंखला, सुरक्षा एवं ट्रेसबिलिटी में सुधार 

  • पी.एम.एम.एस.वाई. पहलों ने बर्फ संयंत्रों, कोल्ड स्टोरेज, इन्सुलेटेड वाहनों, आइस बॉक्स से युक्त ई-रिक्शा और मछली मूल्यवर्धन इकाइयों के माध्यम से उत्पादन स्थल से बाजार तक की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया है। 
  • साथ ही, मछली पकड़ने वाले जहाजों पर 300 संचार एवं ट्रैकिंग उपकरणों की स्थापना से समुद्री सुरक्षा और गतिविधियों की निगरानी क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।  

भारत के मत्स्य क्षेत्र की प्रगति 

  • भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति का साक्षी रहा है। 39,000 करोड़ रुपए से अधिक के सार्वजनिक निवेश के माध्यम से उत्पादन, अवसंरचना, प्रौद्योगिकी, मछुआरा कल्याण और मूल्य संवर्धन में मजबूत आधार तैयार किया गया है। परिणामस्वरूप, मछली उत्पादन 2013–14 के 96 लाख टन से बढ़कर 2024–25 में लगभग 197.75 लाख टन तक पहुंच गया है।
  • इसी प्रकार, समुद्री खाद्य निर्यात भी मूल्य के लिहाज से दोगुना होकर 62,408 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है जिसमें 350 से अधिक उत्पादों का निर्यात लगभग 130 देशों में किया जा रहा है। 
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