किसी भी राष्ट्र की प्रगति का वास्तविक आकलन केवल उसकी आर्थिक विकास दर से नहीं, बल्कि इस बात से किया जाता है कि विकास का लाभ समाज के सबसे कमजोर और वंचित वर्ग तक कितना पहुँचा है। भारत ने पिछले एक दशक में इसी सिद्धांत को केंद्र में रखकर विकास की नई यात्रा तय की है। "अंत्योदय से सर्वोदय" की अवधारणा के तहत सरकार ने ऐसी नीतियों और योजनाओं को प्राथमिकता दी, जिनका उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक बुनियादी सुविधाएं, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक अवसर पहुँचाना रहा है। जल, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, डिजिटल कनेक्टिविटी और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में हुए व्यापक सुधारों ने भारत के विकास मॉडल को अधिक समावेशी और जन-केंद्रित बनाया है।
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