संदर्भ
भारत सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल से 23,731 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाली राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना – गोबरधन (GOBARdhan) को मंजूरी दी है।
गोबरधन योजना की आवश्यकता
- भारत में प्राकृतिक गैस की मांग लगातार बढ़ रही है। परिवहन, घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन की आवश्यकता भविष्य में और अधिक बढ़ने वाली है। ऐसे समय में संपीड़ित बायोगैस एक प्रभावी विकल्प के रूप में सामने आती है, क्योंकि इसकी रासायनिक संरचना प्राकृतिक गैस के समान होती है और इसे मौजूदा गैस वितरण नेटवर्क में आसानी से शामिल किया जा सकता है।
- इसके साथ ही भारत में प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में कृषि अवशेष, गोबर और जैविक कचरा उपलब्ध होता है, जिसका पर्याप्त उपयोग नहीं हो पाता। गोबरधन योजना इन्हीं संसाधनों को ऊर्जा, जैविक खाद और आय के नए स्रोत में बदलने का प्रयास है।
गोबरधन (GOBARdhan) योजना के बारे में
- यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू की जाएगी।
- यह योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने तथा अपशिष्ट प्रबंधन को वैज्ञानिक और टिकाऊ बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
उद्देश्य:
- इसका प्रमुख उद्देश्य घरेलू स्तर पर संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना, बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित करना तथा देश में एक मजबूत चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है।
लक्ष्य:
- यह योजना देश में उपलब्ध कृषि अवशेषों, पशुओं के गोबर, गन्ना उद्योग से निकलने वाले प्रेस मड (मैली), नगरपालिकाओं के जैविक कचरे तथा अन्य जैव-द्रव्यमान संसाधनों को संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी), जैविक खाद और आर्थिक मूल्य में परिवर्तित करने की दिशा में एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान है।
गोबरधन योजना के छह प्रमुख विकास इंजन:
1. सुनिश्चित संपीड़ित बायोगैस की खरीद
- योजना के अंतर्गत सीबीजी उत्पादकों के लिए एक स्थायी और भरोसेमंद बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। सिटी गैस वितरण (CGD) कंपनियों द्वारा सीबीजी की अनिवार्य खरीद सुनिश्चित की जाएगी।
- सीबीजी मिश्रण (ब्लेंडिंग) का लक्ष्य इस प्रकार निर्धारित किया गया है-
- वित्त वर्ष 2026-27 में 3 प्रतिशत
- वित्त वर्ष 2027-28 में 4 प्रतिशत
- वित्त वर्ष 2028-29 से आगे 5 प्रतिशत
- इस व्यवस्था से उत्पादकों को दीर्घकालिक मांग का भरोसा मिलेगा, परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता बढ़ेगी तथा निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
2. स्थिर एवं लाभकारी मूल्य निर्धारण
- सरकार ने सीबीजी के लिए 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू का स्थिर प्रशासित मूल्य निर्धारित किया है। यह मूल्य निर्धारण प्रणाली सरकारी सहायता तथा बाजार आधारित लागत-साझाकरण व्यवस्था पर आधारित होगी।
- कम से कम दस वर्षों तक लागू रहने वाली यह व्यवस्था निवेशकों को स्थिर आय, वित्तीय सुरक्षा तथा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक भरोसा प्रदान करेगी।
3. पूंजी सहायता
- नई (ग्रीनफील्ड) सीबीजी परियोजनाओं को स्थापित क्षमता के आधार पर प्रति टन प्रतिदिन (TPD) तक 2 करोड़ रुपये की पूंजी सहायता प्रदान की जाएगी।
- यह सहायता केवल संयंत्र निर्माण तक सीमित नहीं होगी, बल्कि-
- कच्चे माल के संग्रहण,
- जैविक खाद के प्रसंस्करण,
- मूल्य संवर्धन तथा
- क्षमता विस्तार करने वाली ब्राउनफील्ड परियोजनाओं को भी उपलब्ध होगी।
- इससे प्रारंभिक निवेश का बोझ कम होगा तथा निजी कंपनियों, एमएसएमई, सहकारी समितियों और ग्रामीण उद्यमियों की भागीदारी बढ़ेगी।
4. पाइपलाइन अवसंरचना का विस्तार
- योजना के अंतर्गत सीबीजी संयंत्रों को राष्ट्रीय गैस पाइपलाइन तथा शहरी गैस वितरण नेटवर्क से जोड़ने के लिए आवश्यक पाइपलाइन अवसंरचना विकसित की जाएगी। बेहतर कनेक्टिविटी से -
- परिवहन लागत कम होगी,
- गैस की आपूर्ति अधिक विश्वसनीय बनेगी,
- बाजार तक पहुंच बढ़ेगी तथा
- घरेलू सीबीजी का अधिकतम उपयोग संभव होगा।
5. ऋण गारंटी सहायता
- सीबीजी परियोजनाओं के लिए एक विशेष ऋण गारंटी तंत्र विकसित किया जाएगा जिससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों का विश्वास बढ़ेगा।
- यह व्यवस्था विशेष रूप से एमएसएमई, महिला उद्यमियों तथा पहली बार उद्योग स्थापित करने वाले निवेशकों को सस्ती वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में सहायक होगी। साथ ही संपार्श्विक (Collateral) की आवश्यकता भी कम होगी।
6. सीबीजी इकोसिस्टम चैलेंज फंड
- जिला स्तर पर सीबीजी परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष इकोसिस्टम चैलेंज फंड बनाया गया है। इसके माध्यम से;
- जैविक संसाधनों का सर्वेक्षण,
- कच्चे माल का संग्रहण,
- जिला स्तरीय योजना निर्माण,
- नई तकनीकों को अपनाना,
- जैविक खाद का मूल्य संवर्धन,
- क्षमता निर्माण तथा
- जन-जागरूकता अभियान को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
योजना के संभावित लाभ
गोबरधन योजना के माध्यम से देश को अनेक आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय लाभ प्राप्त होंगे।
- सबसे महत्वपूर्ण लाभ घरेलू स्तर पर स्वच्छ गैस उत्पादन में लगभग दस गुना वृद्धि होगी, जिससे भारत की स्वच्छ गैस अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
- ऊर्जा क्षेत्र में यह योजना आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम कर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाएगी। वहीं निजी निवेशकों के लिए स्थिर मूल्य निर्धारण, सुनिश्चित बाजार और वित्तीय सहायता उपलब्ध होने से बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा।
- ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों, गोबर संग्राहकों, सहकारी समितियों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए आय के नए अवसर विकसित होंगे। कृषि अवशेषों और जैविक कचरे का वैज्ञानिक उपयोग होने से अपशिष्ट प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा तथा खुले में पराली जलाने जैसी समस्याओं में भी कमी आने की संभावना है।
- इसके अतिरिक्त, जैविक खाद के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा मिलेगा जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
- पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी यह योजना महत्वपूर्ण है, क्योंकि जीवाश्म ईंधनों के स्थान पर सीबीजी के उपयोग से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी।
भारत के लिए रणनीतिक अवसर
- भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती ऊर्जा अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। आने वाले वर्षों में प्राकृतिक गैस की मांग में निरंतर वृद्धि होगी। संपीड़ित बायोगैस इस बढ़ती मांग को घरेलू स्तर पर पूरा करने का सशक्त माध्यम बन सकती है।
- चूंकि सीबीजी की गुणवत्ता प्राकृतिक गैस के समान होती है, इसलिए इसे बिना अतिरिक्त बड़े निवेश के मौजूदा गैस पाइपलाइन और वितरण प्रणाली में शामिल किया जा सकता है। इससे देश की गैस अवसंरचना का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा।
- इसके अलावा प्रत्येक सीबीजी संयंत्र अपने आसपास एक स्थानीय चक्रीय अर्थव्यवस्था का निर्माण करता है, जिससे कृषि अवशेषों का संग्रहण, परिवहन, संयंत्र संचालन, जैविक खाद निर्माण तथा स्थानीय रोजगार के अनेक अवसर उत्पन्न होते हैं।
निष्कर्ष
- राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना–गोबरधन केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सुनिश्चित मांग, स्थिर मूल्य निर्धारण, पूंजी सहायता, पाइपलाइन अवसंरचना और ऋण सहायता जैसे प्रावधान इसे देश के सीबीजी क्षेत्र के विकास का मजबूत आधार बनाते हैं।
- इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा, किसानों की आय और ग्रामीण रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, साथ ही ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। गोबरधन योजना वास्तव में "अपशिष्ट से संपदा" और "स्वच्छ ऊर्जा से समृद्ध भारत" की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है।