प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): कला एवं संस्कृति | काकतीय स्थापत्य | ASI | AMASR अधिनियम, 1958 मुख्य परीक्षा (Mains): GS-I – भारतीय विरासत एवं संस्कृति | मंदिर स्थापत्य | सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण Keywords: गोल्लाला गुड़ी, पालमपेट, मुलुगु, तेलंगाना, काकतीय राजवंश, त्रिकुटालय, रामप्पा मंदिर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, AMASR अधिनियम 1958, राष्ट्रीय महत्व का स्मारक |
चर्चा में क्यों?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India-ASI) ने तेलंगाना के मुलुगु जिले के पालमपेट गाँव में स्थित ऐतिहासिक गोल्लाला गुड़ी मंदिर (Gollala Gudi Temple) को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक (Monument of National Importance) घोषित किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु
- सरकार ने इससे पहले मार्च 2026 में इस संबंध में प्रारंभिक अधिसूचना जारी की थी और प्रस्ताव के विरुद्ध कोई आपत्ति प्राप्त नहीं हुई।
- यह घटनाक्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि गोल्लाला गुड़ी, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल काकतीय रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर के निकट स्थित है।
गोल्लाला गुड़ी मंदिर के बारे में
- गोल्लाला गुड़ी काकतीय स्थापत्य परंपरा से संबंधित एक ऐतिहासिक मंदिर है। यह तेलंगाना के मुलुगु जिले के पालमपेट गाँव में प्रसिद्ध रामप्पा मंदिर के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।
- यह मंदिर दक्कन क्षेत्र में काकतीय शासकों के शासनकाल में विकसित हुई उन्नत मंदिर निर्माण परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है।
त्रिकुटालय मंदिर क्या है?
- गोल्लाला गुड़ी की सबसे महत्वपूर्ण स्थापत्य विशेषताओं में से एक इसकी त्रिकुटालय (Trikutalaya) योजना है।
- त्रिकुटालय का सामान्य अर्थ तीन गर्भगृहों वाला मंदिर विन्यास है।
- गोल्लाला गुड़ी में पूर्वाभिमुख मंडप मंदिर परिसर का हिस्सा है, जबकि तीन गर्भगृह (Garbhagrihas) उत्तर, दक्षिण और पश्चिम दिशा में स्थित हैं।
- मंदिर का मुख्य प्रवेश-मंडप एक केंद्रीय कक्ष की ओर जाता है, जो अंतराल कक्षों के माध्यम से तीनों गर्भगृहों से जुड़ा हुआ है।
गोल्लाला गुड़ी की स्थापत्य विशेषताएँ
गोल्लाला गुड़ी केवल अपनी प्राचीनता के कारण ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसकी विस्तृत मूर्तिकला और स्थापत्य सजावट भी इसे विशेष बनाती है।
- नक्काशीदार हंस: मंदिर के एंटैब्लेचर (Entablature) और द्वारों पर बारीकी से तराशे गए हंसों (Hamsas) की पंक्तियाँ दिखाई देती हैं। ये सजावटी आकृतियाँ मंदिर की विशिष्ट विशेषताओं में शामिल हैं।
- जाली का कार्य: मंदिर के स्थापत्य तत्वों में सुंदर जाली या छिद्रयुक्त पत्थर की नक्काशी देखने को मिलती है। ये पत्थर की जालियाँ उस काल के शिल्पकारों की उच्च स्तर की कारीगरी को प्रदर्शित करती हैं।
- मूर्तियों से सुसज्जित पैरापेट: मंदिर का पैरापेट (Parapet) विस्तृत मूर्तियों से सजाया गया है, जो इसकी अलंकरण शैली को और समृद्ध बनाता है।
- द्वारपाल मूर्तियाँ: मुख्य मंदिर के सामने दो अलग छोटे मंदिर स्थित हैं। इन्हें सुंदर ढंग से तराशी गई द्वारपालों (Dvarapalas) की आकृतियों से सजाया गया है।
- ऊँचा अलंकृत चबूतरा: मंदिर एक ऊँचे और सजावटी चबूतरे (Plinth) पर निर्मित है, जिस पर पशुओं और पुष्प आकृतियों का चित्रण किया गया है।
मूर्तियाँ और देवी-देवता
गोल्लाला गुड़ी की दीवारों पर कई आले (Niches) बने हैं, जिनमें हिंदू धार्मिक परंपरा से संबंधित देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ स्थित हैं।
मंदिर में दर्शाई गई प्रमुख आकृतियों में शामिल हैं:
- भगवान विष्णु
- देवी लक्ष्मी
- भगवान गणेश
- महिषासुरमर्दिनी
विभिन्न देवी-देवताओं की उपस्थिति मंदिर परिसर की समृद्ध प्रतिमा-विज्ञान संबंधी परंपरा (Iconographic Programme) को भी प्रदर्शित करती है।
काकतीय राजवंश से संबंध
- यह मंदिर उस व्यापक स्थापत्य विरासत का हिस्सा है, जिसका संबंध काकतीय राजवंश से है। मध्यकाल में काकतीय राजवंश दक्कन क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरा था।
- काकतीय शासकों ने मंदिर निर्माण, सिंचाई अवसंरचना, किलेबंदी, मूर्तिकला और क्षेत्रीय सांस्कृतिक परंपराओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
रामप्पा मंदिर से संबंध
- गोल्लाला गुड़ी, पालमपेट में स्थित काकतीय रुद्रेश्वर मंदिर, जिसे सामान्यतः रामप्पा मंदिर के नाम से जाना जाता है, के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।
- रामप्पा मंदिर को वर्ष 2021 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। यह काकतीय स्थापत्य कला के सबसे उत्कृष्ट संरक्षित उदाहरणों में से एक है।
- रामप्पा मंदिर के निकट गोल्लाला गुड़ी की उपस्थिति यह दर्शाती है कि पालमपेट को केवल एक प्रसिद्ध मंदिर के संदर्भ में नहीं, बल्कि एक व्यापक काकतीय सांस्कृतिक एवं स्थापत्य परिदृश्य के रूप में समझा जाना चाहिए।
राष्ट्रीय महत्व का स्मारक क्या है?
- राष्ट्रीय महत्व का स्मारक (Monument of National Importance) ऐसा प्राचीन स्मारक, पुरातात्त्विक स्थल या अवशेष होता है, जिसे प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्त्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 (AMASR Act, 1958) के तहत कानूनी रूप से राष्ट्रीय महत्व का घोषित किया गया हो।
- ऐसे स्मारकों की सुरक्षा, संरक्षण और रखरखाव के लिए अधिक मजबूत वैधानिक व्यवस्था लागू होती है।
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) केंद्र द्वारा संरक्षित स्मारकों और पुरातात्त्विक स्थलों के संरक्षण एवं रखरखाव के लिए जिम्मेदार है।
- संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, अगस्त 2026 तक भारत में 3,688 प्राचीन स्मारक, पुरातात्त्विक स्थल और अवशेष राष्ट्रीय महत्व के घोषित थे।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India-ASI), भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
- यह भारत में पुरातात्त्विक अनुसंधान तथा केंद्र द्वारा संरक्षित स्मारकों और पुरातात्त्विक स्थलों के संरक्षण एवं सुरक्षा से संबंधित प्रमुख संस्था है।
- इसके प्रमुख कार्यों में संरक्षण, रखरखाव, पुरातात्त्विक अन्वेषण एवं उत्खनन तथा AMASR कानून के अंतर्गत स्मारकों की सुरक्षा शामिल है।
- ASI समय-समय पर संरक्षित स्मारकों का निरीक्षण करता है तथा उनकी आवश्यकता और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर संरक्षण, मरम्मत और पुनर्स्थापन संबंधी कार्य करता है।
घोषणा का महत्व
1. काकतीय विरासत का संरक्षण
राष्ट्रीय महत्व के स्मारक का दर्जा मिलने से गोल्लाला गुड़ी को अधिक मजबूत कानूनी सुरक्षा प्राप्त होगी तथा इसके दीर्घकालिक संरक्षण के लिए संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी बढ़ेगी।
2. पालमपेट के विरासत महत्व का विस्तार
पालमपेट पहले से ही यूनेस्को-सूचीबद्ध रामप्पा मंदिर के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है। गोल्लाला गुड़ी का संरक्षण रामप्पा मंदिर के आसपास मौजूद व्यापक विरासत परिदृश्य की पहचान को और मजबूत करता है।
3. मंदिर स्थापत्य का संरक्षण
त्रिकुटालय योजना, हंसों की नक्काशी, जाली कार्य, द्वारपाल और अलंकृत ऊँचा चबूतरा जैसी विशेषताएँ मध्यकालीन दक्कन की मंदिर स्थापत्य कला के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रदान करती हैं।
4. सांस्कृतिक पर्यटन की संभावना
रामप्पा मंदिर के आसपास स्थित अन्य ऐतिहासिक स्मारकों का संरक्षण पालमपेट को केवल एक मंदिर-केंद्रित पर्यटन स्थल के बजाय एक व्यापक विरासत पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने में सहायता कर सकता है।
विरासत संरक्षण की चुनौतियाँ
- भारत में बड़ी संख्या में संरक्षित स्मारक होने के कारण अतिक्रमण, पर्यावरणीय क्षरण, प्राकृतिक अपक्षय, शहरीकरण और पर्यटन का दबाव जैसी कई संरक्षण चुनौतियाँ सामने आती हैं।
- अगस्त 2026 तक सरकार ने राष्ट्रीय महत्व के 414 स्मारकों और पुरातात्त्विक स्थलों पर अतिक्रमण की सूचना दी थी।
- इसलिए किसी स्मारक को केवल राष्ट्रीय महत्व का घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है। उसके लिए नियमित संरक्षण, वैज्ञानिक पद्धति से परिरक्षण, दस्तावेजीकरण और स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी आवश्यक है।
आगे की राह
- इस घोषणा के बाद मंदिर और इसकी मूर्तियों का वैज्ञानिक संरक्षण तथा व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए।
- गोल्लाला गुड़ी के विरासत प्रबंधन को व्यापक रामप्पा-पालमपेट सांस्कृतिक परिदृश्य के संरक्षण के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए।
- बेहतर पर्यटक सुविधाएँ, डिजिटल दस्तावेजीकरण, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
- यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि बढ़ती लोकप्रियता और पर्यटकों की संख्या मंदिर की स्थापत्य अखंडता को नुकसान न पहुँचाए।
प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न (Prelims MCQ)
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प्रश्न: गोल्लाला गुड़ी मंदिर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह तेलंगाना के मुलुगु जिले में स्थित है।
- इसका निर्माण त्रिकुटालय स्थापत्य योजना के अनुसार किया गया है।
- यह यूनेस्को-सूचीबद्ध रामप्पा मंदिर के निकट स्थित है।
- इसे हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1, 2 और 3
(c) केवल 2, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4
मुख्य परीक्षा प्रश्न (Mains Question)
“व्यक्तिगत स्मारकों के संरक्षण के साथ-साथ उस व्यापक सांस्कृतिक परिदृश्य का संरक्षण भी आवश्यक है, जिसका वे हिस्सा हैं।” तेलंगाना की काकतीय विरासत के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
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FAQs
गोल्लाला गुड़ी कहाँ स्थित है?
गोल्लाला गुड़ी तेलंगाना के मुलुगु जिले के पालमपेट गाँव में स्थित है।
गोल्लाला गुड़ी किस राजवंश से संबंधित है?
यह काकतीय स्थापत्य परंपरा से संबंधित है।
इसकी स्थापत्य कला की क्या विशेषता है?
यह एक त्रिकुटालय, अर्थात तीन गर्भगृहों वाला मंदिर है। यह हंसों की नक्काशी, जाली कार्य, मूर्तिकला, द्वारपालों और अलंकृत ऊँचे चबूतरे के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
इसके पास कौन-सा प्रसिद्ध मंदिर स्थित है?
इसके निकट काकतीय रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर स्थित है, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों को किस कानून के तहत संरक्षण मिलता है?
ऐसे स्मारकों को प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्त्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 (AMASR Act, 1958) के तहत संरक्षण प्रदान किया जाता है।
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