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वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) उन्मूलन के लिए सरकार का समग्र दृष्टिकोण

संदर्भ 

  • भारत की वामपंथी उग्रवाद (LWE) के प्रति प्रतिक्रिया केवल पुलिस-आधारित कार्रवाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि समय के साथ यह संपूर्ण-सरकार (Whole-of-Government) दृष्टिकोण में विकसित हुई। इस दृष्टिकोण के अंतर्गत सुरक्षा, विकास और समुदाय के विश्वास को एक साथ जोड़कर वामपंथी उग्रवाद के स्थायी समाधान का प्रयास किया गया। 

ऐतिहासिक जड़ें और रणनीतिक बदलाव 

  • नक्सलबाड़ी के 1967 के विद्रोह से सशस्त्र माओवाद की शुरुआत हुई; 1969 में चारु मजूमदार, कानू सान्याल, जंगल संथाल के नेतृत्व में सीपीआई (एमएल) का गठन हुआ।
  • 1970 के दशक में पुलिस की प्रभावी कार्रवाई से माओवादी आंदोलन कमजोर पड़ा, लेकिन 1980 के दशक में पीपुल्स वार ग्रुप (PWG) के पुनरुत्थान के साथ इसका विस्तार आंध्र प्रदेश से अन्य राज्यों तक होने लगा। 
  • माओवादियों ने आदिवासी क्षेत्रों में जनताना सरकार, अवैध वसूली  और कंगारू अदालतों के माध्यम से लोगों पर दबाव बनाकर समानांतर शासन स्थापित करने का प्रयास किया। 
  • इनका विस्तार घने जंगलों, कमजोर शासन-व्यवस्था और खराब कनेक्टिविटी वाले इलाकों में हुआ, न कि सिर्फ गरीबी या पिछड़ेपन के कारण।
  • 2015 की कार्ययोजना में सुरक्षा, विकास, अधिकारों और धारणा प्रबंधन (perception management) के माध्यम से सरकार के सभी विभागों के बीच समन्वय की नीति अपनाई गई। 

सुरक्षा क्षमता और परिचालन परिणाम 

  • राज्य पुलिस ने माओवादी-विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया, जबकि गृह मंत्रालय (MHA) ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) की तैनाती, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान तथा विकासात्मक हस्तक्षेपों के माध्यम से राज्यों को सहयोग प्रदान किया। 
  • 2009 से 2025 के बीच सुरक्षा शिविरों (Security Camps) की संख्या 27 से बढ़कर 837 हो गई। इसी अवधि में 121 बटालियन, 400 कंपनियाँ तथा 1,143 बस्तरिया (Bastariya) भर्ती तैनात किए गए।  
  • सुरक्षा संबंधी अवसंरचना योजना (SIS) के तहत 706 पुलिस स्टेशनों को स्वीकृति दी गई, जिनमें से 660 का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं SRE-ACALWEM योजना के अंतर्गत 3,756.38 करोड़ तथा 1,249.38 करोड़ की वित्तीय सहायता जारी की गई। 
  • संयुक्त कार्य बल (जेटीएफ) ने अंतरराज्यीय कमियों को दूर किया; ब्लैक फॉरेस्ट में 10,000 कर्मियों का इस्तेमाल किया गया, जिसमें 31 माओवादियों को निष्क्रिय कर दिया गया। 
  • 2014-2025 के दौरान हिंसा की घटनाएं 870 से घटकर 234 रह गईं, मौतें 222/88 से घटकर 64/36 हो गईं, जबकि बरामदगी 548 से बढ़कर 1,190 और माओवादियों को मार गिराने की संख्या 63 से बढ़कर 364 हो गई।
  • 2010-2025 के दौरान LWE (वामपंथी उग्रवाद) की घटनाएं 1,936 से घटकर 234 और मौतें 1,005 से घटकर 100 रह गईं, जो 88%-90% की कमी को दर्शाता है। 

विकास, अधिकार और सामुदायिक ट्रस्ट 

  • पीएमजीएसवाई के तहत 11,958 किमी सड़कें और 691 पुल निर्मित किए; साथ ही 11,611 किमी राज्य-मानक सड़कों और बीआरओ परियोजनाओं को मंजूरी दी।
  • सड़कों का घनत्व 30% और राजमार्गों का घनत्व 80% बढ़ गया साथ ही दल्ली राजहरा–रावघाट, रावघाट–जगदलपुर और दंतेवाड़ा–मनुगुरु रेल परियोजनाओं में उल्लेखनीय प्रगति हुई। 
  • 9,000 से अधिक टावरों के माध्यम से 96% कनेक्टिविटी प्रदान की गई। इसके साथ ही 1,804 शाखाओं, 1,321 एटीएम, 74,720 संवाददाताओं और 5,731 डाकघरों ने वित्तीय और डाक सेवाओं तक पहुंच का विस्तार हुआ।
  • शिक्षा विभाग ने 259 एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल, 179 संचालित विद्यालय, 48 आईटीआई और 61 कौशल विकास केंद्र स्थापित किये हैं।
  • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के अस्पतालों ने 77,000 से अधिक स्थानीय नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान कीं। वहीं विशेष केंद्रीय सहायता (SCA) के अंतर्गत 2017 से अब तक 4,097.47 करोड़ जारी किए गए, जिनसे 15,000 से अधिक विकास परियोजनाएँ संचालित की गईं।
  • वन अधिकारों के माध्यम से 1.8 मिलियन स्वामित्व अधिकार प्रदान किये गए। साथ ही समुदाय-केंद्रित पुनर्वास कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 10,000 कार्यकर्ताओं को मुख्यधारा में शामिल किया। 

निष्कर्ष 

  • वामपंथी उग्रवाद को खत्म करने के प्रयासों से सुरक्षा के मामले में जो लाभ मिलते हैं, वे तब स्थायी होते हैं जब उन्हें विकास, अधिकारों के वितरण और समुदाय की भागीदारी के साथ जोड़ा जाता है।

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