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Hamburg Sustainability Conference 2026: खंडित होती दुनिया के बीच विकास और स्वच्छ ऊर्जा पर वैश्विक जोर

चर्चा में क्यों ?

जर्मनी के हैम्बर्ग में 29-30 जून 2026 को आयोजित हैम्बर्ग सस्टेनेबिलिटी कॉन्फ्रेंस (Hamburg Sustainability Conference-HSC) 2026 में विश्व नेताओं, संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों, नीति-निर्माताओं और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने बढ़ते भू-राजनीतिक संघर्षों, ऊर्जा संकट, विकास वित्त की कमी तथा कमजोर पड़ते बहुपक्षवाद (Multilateralism) पर गंभीर चिंता व्यक्त की। सम्मेलन का प्रमुख संदेश यह रहा कि विकास आज की सबसे बड़ी रणनीतिक शक्ति (Hard Power) है तथा स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की वास्तविक सुरक्षा का आधार बन चुकी है।

हैम्बर्ग सस्टेनेबिलिटी कॉन्फ्रेंस 2026 क्या है ?

  • हैम्बर्ग सस्टेनेबिलिटी कॉन्फ्रेंस 2026 का आयोजन 29–30 जून 2026 को जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में किया गया। इस वर्ष सम्मेलन की थीम "The Power of Cooperation: Advancing Progress Together" (सहयोग की शक्ति: मिलकर प्रगति को आगे बढ़ाना) रखी गई।
  • इस सम्मेलन में दुनिया के 115 देशों के लगभग 1,600 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें 22 देशों के मंत्री, 13 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के शीर्ष अधिकारी तथा 280 से अधिक निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल थे।
  • इस सम्मेलन का आयोजन संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP), जर्मनी के संघीय आर्थिक सहयोग एवं विकास मंत्रालय (BMZ), माइकल ओटो फाउंडेशन तथा हैम्बर्ग शहर प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

सम्मेलन का मुख्य संदेश क्या रहा ?

  • सम्मेलन में सभी वक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि आज दुनिया जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उनका समाधान वैश्विक सहयोग को कमजोर करने में नहीं बल्कि उसे और अधिक प्रभावी बनाने में है।
  • वक्ताओं ने कहा कि संघर्ष, ऊर्जा संकट और विकास वित्त की कमी जैसी समस्याओं से निपटने के लिए बहुपक्षवाद को नए समय के अनुरूप पुनर्परिभाषित करना आवश्यक है।

विकास को नई "हार्ड पावर" क्यों बताया गया ?

  • संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के प्रशासक अलेक्जेंडर डी क्रू ने कहा कि विकास केवल आर्थिक वृद्धि का माध्यम नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शांति और स्थिरता का सबसे प्रभावी साधन भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो देश समावेशी और संतुलित विकास करते हैं, उनमें संघर्ष, गृहयुद्ध और राजनीतिक अस्थिरता की संभावना अपेक्षाकृत कम होती है।
  • उन्होंने कहा कि "Development is Hard Power", अर्थात आज के समय में विकास स्वयं एक रणनीतिक शक्ति बन चुका है।

स्वच्छ ऊर्जा को राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार क्यों माना गया ?

  • अलेक्जेंडर डी क्रू ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा अब केवल जलवायु परिवर्तन से जुड़ा विषय नहीं रह गई है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में यह राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।
  • उन्होंने बताया कि सौर एवं पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोत जीवाश्म ईंधनों की तुलना में अधिक सस्ते, कम अस्थिर तथा भू-राजनीतिक संकटों से अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) और ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) एक-दूसरे से अलग नहीं किए जा सकते।

जीवाश्म ईंधन सब्सिडी को लेकर क्या चिंता जताई गई ?

  • सम्मेलन में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के कारण वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर जीवाश्म ईंधनों पर दी जाने वाली सब्सिडी 1.1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकती है, जो वर्ष 2025 की तुलना में लगभग 410 अरब अमेरिकी डॉलर अधिक होगी।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने की गति धीमी पड़ सकती है, विकासशील देशों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है तथा वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और अधिक गहरी हो सकती है।

जर्मन राष्ट्रपति ने किस बात की चेतावनी दी ?

  • जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमायर ने कहा कि दशकों से चली आ रही नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था (Rules-Based International Order) गंभीर संकट का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि कुछ शक्तिशाली देश अपने हितों की पूर्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं।
  • उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बाधित होते हैं तो उसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ता है। इसलिए सुरक्षित समुद्री मार्ग वैश्विक आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव अमीना जे. मोहम्मद ने क्या कहा ?

  • संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव अमीना जे. मोहम्मद ने कहा कि पिछले कई दशकों में विकास के क्षेत्र में प्राप्त उपलब्धियां अब गंभीर खतरे का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण समुद्री व्यापार बाधित हुआ है, ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, वैश्विक महंगाई बढ़ी है तथा महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाएं कमजोर हुई हैं।

दुनिया अभूतपूर्व विरोधाभासों के दौर से गुजर रही है

  • अलेक्जेंडर डी क्रू ने कहा कि आज दुनिया एक ओर अभूतपूर्व आर्थिक समृद्धि और तकनीकी नवाचार का अनुभव कर रही है, वहीं दूसरी ओर बढ़ते संघर्ष, आर्थिक अनिश्चितता और वैश्विक अस्थिरता का भी सामना कर रही है।
  • उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार दुनिया एक साथ इतने अधिक संकटों का सामना कर रही है।

सम्मेलन में किन नए वैश्विक गठबंधनों की घोषणा होगी ?

  • सम्मेलन के दौरान 15 से अधिक नए वैश्विक गठबंधनों की घोषणा अथवा उनमें महत्वपूर्ण प्रगति होने की संभावना व्यक्त की गई।
  • इन गठबंधनों का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा, उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Responsible AI), बाल कुपोषण, कौशल विकास, सतत विकास तथा हरित निवेश जैसे क्षेत्रों में वैश्विक सहयोग को मजबूत करना है।

बाल कुपोषण समाप्त करने की नई पहल

  • सम्मेलन के दौरान जर्मनी के संघीय आर्थिक सहयोग एवं विकास मंत्रालय (BMZ), यूनिसेफ (UNICEF) तथा संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) द्वारा 2030 तक बाल कुपोषण समाप्त करने के उद्देश्य से एक संयुक्त वैश्विक पहल की घोषणा किए जाने की संभावना जताई गई।

उत्तर-दक्षिण विकास आयोग (North-South Development Commission)

  • 30 जून 2026 को सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम के रूप में उत्तर-दक्षिण विकास आयोग का शुभारंभ किया गया।
  • इस आयोग की सह-अध्यक्षता जर्मनी के पूर्व चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ तथा कोस्टा रिका की पूर्व राष्ट्रपति लौरा चिंचिला करेंगी।
  • आयोग में लगभग 20 सदस्य होंगे, जिनमें अधिकांश सदस्य वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों से होंगे।
  • इस आयोग का उद्देश्य बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के अनुरूप नए सहयोग मॉडल विकसित करना, वैश्विक दक्षिण की भागीदारी बढ़ाना तथा विकास वित्त, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्रों में नई साझेदारियों को बढ़ावा देना है।

निष्कर्ष

हैम्बर्ग सस्टेनेबिलिटी कॉन्फ्रेंस 2026 ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों-जैसे युद्ध, ऊर्जा संकट, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक अस्थिरता और कमजोर पड़ते बहुपक्षवाद-का समाधान अलगाव या संरक्षणवाद में नहीं, बल्कि मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग, समावेशी विकास, स्वच्छ ऊर्जा आधारित अर्थव्यवस्था और प्रभावी वैश्विक शासन में निहित है। सम्मेलन ने यह भी रेखांकित किया कि भविष्य की वास्तविक शक्ति केवल सैन्य क्षमता में नहीं, बल्कि समावेशी विकास, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, जलवायु-अनुकूल नीतियों और सुदृढ़ बहुपक्षीय सहयोग में निहित होगी।

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