संदर्भ
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने हीमोफीलिया के मरीजों के लिए समान और सुलभ उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक नया प्रस्ताव पारित किया है। इस पहल में यह भी रेखांकित किया गया है कि भारत में लगभग 1.4 लाख मामलों के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बोझ मौजूद है।
हीमोफीलिया क्या है?
- हीमोफीलिया एक दुर्लभ आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें शरीर का खून सामान्य रूप से जम नहीं पाता।
- इसका मुख्य कारण क्लॉटिंग फैक्टर्स की कमी होती है। क्लॉटिंग फैक्टर्स विशेष प्रोटीन होते हैं जो प्लेटलेट्स के साथ मिलकर चोट लगने पर रक्तस्राव को रोकते हैं।
- हीमोफीलिया मुख्यतः दो प्रकार का होता है :
- हीमोफीलिया A : यह सबसे अधिक पाया जाने वाला प्रकार है और फैक्टर VIII प्रोटीन की कमी के कारण होता है।
- हीमोफीलिया B : इसे क्रिसमस डिज़ीज़ भी कहा जाता है, जो फैक्टर IX प्रोटीन की कमी से उत्पन्न होता है।
कारण और आनुवंशिक स्वरूप
- X-लिंक्ड रिसेसिव पैटर्न : यह रोग मुख्य रूप से पुरुषों में दिखाई देता है, क्योंकि इसके जीन X क्रोमोसोम पर स्थित होते हैं। महिलाएं प्रायः वाहक होती हैं, हालांकि उनमें कभी-कभी हल्के लक्षण भी देखे जा सकते हैं।
- अचानक उत्पन्न म्यूटेशन : लगभग एक-तिहाई मामलों में यह बिना किसी पारिवारिक इतिहास के, जीन में स्वतः हुए परिवर्तन के कारण विकसित होता है।
- क्लॉटिंग प्रोटीन की कमी : फैक्टर VIII या IX जैसे आवश्यक प्रोटीन की कमी या अनुपस्थिति ही इस रोग का मूल कारण है।
लक्षण और संकेत
इस रोग के लक्षणों की तीव्रता रक्त में उपलब्ध क्लॉटिंग फैक्टर की मात्रा पर निर्भर करती है :
- मामूली चोट या सर्जरी के बाद भी लंबे समय तक रक्तस्राव होना
- हल्की चोटों से भी बड़े और गहरे नीले निशान पड़ना
- जोड़ों (जैसे घुटने, कोहनी, टखने) में अंदरूनी रक्तस्राव, जिससे दर्द, सूजन और जकड़न होती है
- गंभीर मामलों में मस्तिष्क या अन्य महत्वपूर्ण अंगों में खून बहना, जो जानलेवा हो सकता है
- बार-बार जोड़ों में रक्तस्राव होने से स्थायी विकृति और विकलांगता
मुख्य विशेषताएँ
- निदान प्रक्रिया : शारीरिक परीक्षण के साथ-साथ रक्त जांच जैसे सीबीसी(CBC), एपीटीटी (थक्का जमने का समय) और फैक्टर एक्टिविटी टेस्ट के जरिए पहचान की जाती है।
- गंभीरता का वर्गीकरण : क्लॉटिंग फैक्टर के स्तर के आधार पर इसे हल्का, मध्यम और गंभीर श्रेणियों में बांटा जाता है।
- प्रोफिलैक्सिस (रोकथाम) : नियमित रूप से क्लॉटिंग फैक्टर देना, ताकि रक्तस्राव होने से पहले ही उसे रोका जा सके।
आधुनिक उपचार विकल्प
- नॉन-फैक्टर थेरेपी, जैसे Emicizumab (एमिसिज़ुमैब)
- जीन थेरेपी, जिसका उद्देश्य शरीर को स्वयं आवश्यक क्लॉटिंग फैक्टर बनाने में सक्षम बनाना है
महत्त्व
- भारत में हीमोफीलिया के मामलों की बड़ी संख्या एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या को दर्शाती है, खासकर तब जब बड़ी आबादी अभी भी निदान से बाहर है। यद्यपि यह रोग जीन थेरेपी अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और भविष्य में आनुवंशिक रोगों के स्थायी समाधान की दिशा में उम्मीद जगाता है।