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मिनी-क्लाउडबर्स्ट की बढ़ती घटनाएँ: IMD रिपोर्ट

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 1: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ)

संदर्भ

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, देश में सामान्य ‘क्लाउडबर्स्ट’ की घटनाओं में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है किंतु ‘मिनी-क्लाउडबर्स्ट’ की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है।

मिनी-क्लाउडबर्स्ट के बारे में

  • आई.एम.डी. के अनुसार, किसी क्लाउडबर्स्ट को परिभाषित करने के लिए 20-30 वर्ग किमी. क्षेत्र में एक घंटे में 10 सेमी. या उससे अधिक बारिश होना जरूरी है। 
  • मिनी-क्लाउडबर्स्ट को एक घंटे में 5 सेमी. बारिश के रूप में परिभाषित किया गया है। 
  • ये घटनाएँ सामान्य क्लाउडबर्स्ट की तुलना में कम तीव्र होती हैं किंतु इनकी आवृत्ति में वृद्धि चिंता का विषय है।

कारण

  • आई.एम.डी. के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ (मेडिटेरेनियन से आने वाले तूफान) और बंगाल की खाड़ी से उत्तर की ओर बढ़ने वाले तूफानों का संगम इसकी प्रमुख वजह है।
  • ये मौसमी गतिविधियाँ उत्तरी भारत में तीव्र बारिश की घटनाओं में वृद्धि कर रही हैं। 
  • इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के कारण वायुमंडलीय नमी में वृद्धि एवं मौसम की चरम घटनाएँ भी मिनी-क्लाउडबर्स्ट को बढ़ावा दे रही हैं।

आई.एम.डी. की हालिया रिपोर्ट

  • आई.एम.डी. की रिपोर्ट के अनुसार, जून से अगस्त 2025 तक मानसून की बारिश सामान्य से 6% अधिक रही, जो सामान्य 70 सेमी. की तुलना में अधिक है। 
  • उत्तर-पश्चिम भारत (उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू एवं कश्मीर, राजस्थान व दिल्ली) में 26% अधिक बारिश दर्ज की गई।
  • मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप में क्रमशः 8.6% एवं 9.3% अधिक बारिश हुई। हालाँकि, पूर्व व उत्तर-पूर्व भारत में 17% कम बारिश दर्ज की गई। 
  • अगस्त 2025 में उत्तर भारत में 26.5 सेमी बारिश हुई, जो 2001 के बाद सर्वाधिक है। 
  • इसके अलावा अगस्त में 700 से अधिक भारी बारिश (20 सेमी या अधिक) की घटनाएँ दर्ज की गईं, जो 2024 की 800+ घटनाओं के बाद दूसरी सर्वाधिक है।

मिनी-क्लाउडबर्स्ट में वृद्धि 

  • पुणे के भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के 2018 के एक शोध के अनुसार मिनी-क्लाउडबर्स्ट की घटनाएँ बढ़ रही हैं। 
  • 1969-2015 के बीच केवल 28 क्लाउडबर्स्ट दर्ज किए गए थे किंतु मिनी-क्लाउडबर्स्ट की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। 
  • जलवायु परिवर्तन, बढ़ती आर्द्रता एवं मौसमी गतिविधियों का असामान्य मेल इसकी वजह है। इसके अलावा सितंबर में बारिश की बढ़ती प्रवृत्ति 1980 के दशक से देखी जा रही है।

भारत में प्रभाव

  • मिनी-क्लाउडबर्स्ट व तीव्र बारिश की घटनाओं ने हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं उत्तराखंड जैसे राज्यों में भारी तबाही मचाई है। 
  • इन घटनाओं के कारण भूस्खलन, बाढ़ एवं संपत्ति का नुकसान हुआ है। उदाहरण के लिए, 2-5 सेमी. बारिश भी भूस्खलन का कारण बन सकती है। 
  • अगस्त 2025 में चेन्नई में एक क्लाउडबर्स्ट की घटना दर्ज की गई, जिसने स्थानीय स्तर पर काफी प्रभाव डाला।

चुनौतियाँ

  • पूर्वानुमान की कठिनाई: क्लाउडबर्स्ट एवं मिनी-क्लाउडबर्स्ट का सटीक पूर्वानुमान लगाना असंभव है क्योंकि मौसम स्टेशनों की कमी व उपग्रह चित्रों की सीमाएँ हैं।
  • मौसम स्टेशनों की कमी: कई क्षेत्रों में पर्याप्त मौसम स्टेशन नहीं हैं जिसके कारण डाटा संग्रह व विश्लेषण में कठिनाई होती है।
  • जलवायु परिवर्तन: बढ़ती आर्द्रता एवं चरम मौसमी घटनाएँ मिनी-क्लाउडबर्स्ट को अधिक बढ़ा रही हैं।

आगे की राह

  • मौसम स्टेशनों का विस्तार: अधिक मौसम स्टेशनों की स्थापना से डाटा संग्रह व विश्लेषण में सुधार हो सकता है।
  • जलवायु अनुकूलन: बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और भूस्खलन जैसी आपदाओं के लिए बेहतर तैयारी जरूरी है।
  • जागरूकता और अनुसंधान: मिनी-क्लाउडबर्स्ट और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर अधिक शोध एवं जन जागरूकता की आवश्यकता है।
  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली: उपग्रह व रडार तकनीकों का उपयोग करके भारी बारिश की चेतावनी को अधिक प्रभावी करना होगा।
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