संदर्भ
- भारत एवं यूरोपीय संघ (EU) ने नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा किया। इस समझौते को ‘सभी समझौतों की जननी’ (Mother of all deals) कहा जा रहा है। यह लगभग दो दशकों से चल रही रुक-रुक कर होने वाली वार्ताओं का अंतिम परिणाम है और एक रणनीतिक आर्थिक गलियारे की स्थापना करता है।
- भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते का एक बड़ा व हालिया कारण अमेरिका की बदलती व्यापार नीति को माना जा रहा है। अमेरिका अब घरेलू विनिर्माण को प्राथमिकता दे रहा है और दूसरे देशों को अमेरिकी बाजार तक आसानी से पहुंच नहीं दे रहा है।
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के बारे में
- भारत-ई.यू. मुक्त व्यापार समझौता एक व्यापक एवं आधुनिक व्यापार समझौता है जिसे वस्तुओं पर शुल्क को समाप्त करने या काफी कम करने, सेवाओं में व्यापार को उदार बनाने और निवेश प्रवाह को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- ये दोनों क्षेत्र मिलकर वैश्विक जी.डी.पी. का 25% और विश्व व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बनाते हैं। इस समझौते का उद्देश्य वर्ष 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है जिससे एक स्थिर, नियम-आधारित ढांचा तैयार हो सके और अस्थिर आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता कम हो सके।
- इस समझौते को 2027 में लागू किए जाने की संभावना है।

समझौते की मुख्य विशेषताएँ
- व्यापक शुल्क उन्मूलन : व्यापार मूल्य के हिसाब से यूरोपीय संघ भारत के 99% से अधिक निर्यात पर शुल्क-मुक्त पहुँच प्रदान करेगा। भारत चरणबद्ध तरीके से यूरोपीय संघ के लगभग 92-97% सामानों पर शुल्क समाप्त करेगा
- श्रम प्रधान क्षेत्र को बढ़ावा : वस्त्र, परिधान, चमड़ा, रत्न, आभूषण और समुद्री उत्पादों सहित 33 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात पर शून्य शुल्क
- कैलिब्रेटेड ऑटो लिबरलाइजेशन : कोटा-आधारित प्रणाली यूरोपीय संघ के लग्जरी कार निर्माताओं (जैसे- मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू) को कम शुल्क (110% से घटकर 10% तक) पर भारतीय बाजार में प्रवेश करने की अनुमति देती है, साथ ही घरेलू विनिर्माण की रक्षा भी करती है।
- सेवाएँ एवं गतिशीलता : भारत को यूरोपीय संघ के 144 उप-क्षेत्रों (आईटी, वित्त, शिक्षा) तक पहुँच प्राप्त हुई है। एक नया गतिशीलता ढांचा कुशल पेशेवरों, अंतर-निगम स्थानांतरणकर्ताओं और यहाँ तक कि भारतीय पारंपरिक चिकित्सा (आयुष)के चिकित्सकों के लिए वीजा की सुविधा प्रदान करता है
- स्थिरता एवं कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) : यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) पर दूरदर्शी प्रावधान भारतीय एम.एस.एम.ई. को हरित मानकों का अनुपालन करने में मदद करने के लिए तकनीकी सहायता व संवाद सुनिश्चित करते हैं।
- कृषि संबंधी अपवाद : भारत ने डेयरी, अनाज एवं मुर्गी पालन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सफलतापूर्वक सुरक्षित कर लिया है जिन्हें स्थानीय किसानों की सुरक्षा के लिए समझौते से बाहर रखा गया है।
कार्यान्वयन में चुनौतियाँ
- गैर-टैरिफ बाधाएँ (NTB): यूरोपीय संघ के कठोर स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (SPS) मानक भारतीय कृषि निर्यात के लिए एक बाधा बने हुए हैं।
- नियामकीय सामंजस्य: डिजिटल व्यापार, डेटा गोपनीयता और एआई पर भारतीय और यूरोपीय संघ के नियमों के बीच की खाई को पाटना।
- बौद्धिक संपदा (IP): डेटा की विशिष्टता जैसे मजबूत आईपीआर सुरक्षा उपायों के लिए यूरोपीय संघ की मांग भारत के जेनेरिक दवा उद्योग के लिए चुनौती बन सकती है।
- सी.बी.ए.एम. अनुपालन: भारतीय भारी उद्योगों (इस्पात, सीमेंट) को यूरोपीय संघ की उच्च कार्बन-तटस्थता लागतों को पूरा करने की चुनौती का सामना करना पड़ता है।
- घरेलू संवेदनशीलताएँ: छोटे भारतीय MSME को विस्थापित किए बिना उच्च-तकनीकी यूरोपीय संघ की सेवाओं और उत्पादों के प्रवाह को संतुलित करना

|
FTA को यूरोपीय संसद की आवश्यक मंजूरी
- यूरोपियन यूनियन एवं भारत के बीच FTA तुरंत लागू नहीं होगा। यह समझौता 2027 तक चरणबद्ध तरीके से लागू हो सकता है। इसकी वजह EU की अनिवार्य और लंबी मंजूरी प्रक्रिया है।
- EU में किसी भी बड़े व्यापार समझौते को लागू करने से पहले यूरोपीय संसद और सदस्य देशों की औपचारिक मंजूरी जरूरी होती है। केवल यूरोपीय आयोग का राजनीतिक समझौता पर्याप्त नहीं होता है।
- FTA को लागू करने के लिए यूरोपीय संसद में इस पर बहस एवं मतदान होगा। संसद को यह अधिकार है कि वह समझौते को मंजूरी दे, रोक दे या इसमें बदलाव की मांग करे।
मंजूरी की प्रक्रिया
- सबसे पहले यूरोपीय आयोग और भारत के बीच तय शर्तों को कानूनी रूप दिया जाएगा। इसमें टैरिफ कटौती, सेक्टरवार छूट और लागू होने की समयसीमा शामिल होगी।
- इसके बाद यह समझौता EU काउंसिल के पास जाएगा, जहां सभी सदस्य देशों की सरकारें इसे मंजूरी देंगी। यहां से सहमति मिलने के बाद यह यूरोपीय संसद में पेश किया जाएगा।
- यूरोपीय संसद में बहस के बाद वोटिंग होगी। अगर संसद ने इसे मंजूरी दे दी, तभी समझौते को आगे बढ़ाया जा सकेगा। कुछ मामलों में इसे मिक्स्ड एग्रीमेंट माना जाता है तब कुछ सदस्य देशों की राष्ट्रीय संसदों से भी रैटिफिकेशन जरूरी हो सकता है।
|
मुख्य लाभ
भारत के लिए
- निर्यात में अत्यधिक उछाल: 450 मिलियन उपभोक्ताओं के बाजार तक तरजीही पहुंच मेक इन इंडिया को बढ़ावा दे रही है।
- ग्लोबल टैलेंट हब: आवागमन नियमों में ढील दी गई है जिससे भारतीय पेशेवर और छात्र (9 महीने के अध्ययन-पश्चात कार्य अधिकार के साथ) यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्था में एकीकृत हो सकते हैं। भारतीय पेशेवर एवं कर्मियों को यूरोपीय देशों में काम करने के अधिक मौके मिल सकते हैं।
- विविधीकरण: वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बीच अमेरिका एवं चीन पर व्यापारिक निर्भरता को कम करता है। इस समझौते से भारतीय कंपनियों को यूरोप में व्यापार बढ़ाने का बड़ा मौका मिलेगा।
- ग्रामीण समृद्धि: चाय, कॉफी और मसालों के लिए बेहतर बाजार पहुंच से किसानों व ग्रामीण कारीगरों को सीधा लाभ होगा।
यूरोपीय संघ के लिए
- बाजार में पैठ: दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले राष्ट्र और उसके तेजी से बढ़ते मध्यम वर्ग तक अभूतपूर्व पहुंच।
- आपूर्ति श्रृंखला जोखिम-मुक्ति: चीन-प्लस-वन रणनीति के रूप में यह महत्वपूर्ण खनिजों, इलेक्ट्रॉनिक्स व फार्मास्यूटिकल्स के लिए स्थिर साझेदारों को सुरक्षित करती है।
- निवेश सुरक्षा: वोक्सवैगन और बीएएसएफ जैसी यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत में परिचालन का विस्तार करने हेतु एक पूर्वानुमानित कानूनी वातावरण।
- लागत बचत: यूरोपीय व्यवसायों को भारत को निर्यात पर लगने वाले शुल्क में सालाना लगभग 4 अरब यूरो की बचत होने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का संपन्न होना एक मजबूत, बहुध्रुवीय वैश्विक व्यापार व्यवस्था की ओर निर्णायक कदम है। दो विविध किंतु पूरक शक्तियों को जोड़कर यह समझौता मात्र वाणिज्य से परे जाकर प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन एवं सुरक्षा के क्षेत्र में गहन सहयोग को बढ़ावा देता है। यह भारत के 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के लक्ष्य के लिए एक ठोस आधार तैयार करता है।