भारत में हो रहे तीव्र डिजिटल परिवर्तन ने शासन, व्यापार एवं नागरिक सेवाओं के स्वरूप को अभूतपूर्व रूप से बदल दिया है। डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सार्वजनिक सेवाओं के व्यापक प्रसार के साथ डिजिटल तकनीक अब दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। जैसे-जैसे डिजिटल निर्भरता बढ़ रही है, वैसे-वैसे साइबरस्पेस की सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में उभरकर सामने आई है।
ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, रैंसमवेयर हमले, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित घोटाले तथा महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना पर बढ़ते साइबर खतरे इस बात को रेखांकित करते हैं कि एक मजबूत, समन्वित एवं विश्वसनीय साइबर सुरक्षा ढांचे की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने सुरक्षित एवं भरोसेमंद डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करने हेतु नीतिगत, संस्थागत व परिचालन स्तर पर अनेक ठोस पहल की हैं।
भारत का विस्तारित डिजिटल परिदृश्य
विगत एक दशक में भारत ने डिजिटल विस्तार में उल्लेखनीय प्रगति की है। इंटरनेट उपयोग में वृद्धि, स्मार्टफोन का व्यापक प्रसार और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के तीव्र विकास ने इस परिवर्तन को गति दी है।
वर्ष 2025 तक भारत में इंटरनेट कनेक्शन की संख्या 100 करोड़ के पार पहुंच गई जो 2014 में केवल 25 करोड़ थी।
इसी अवधि में प्रति वायरलेस उपभोक्ता औसत मासिक डेटा खपत 61.66 एमबी से बढ़कर 24.01 जीबी हो गई, जो विश्व में सर्वाधिक स्तरों में से एक है।
इस मजबूत डिजिटल आधार ने डिजिटल भुगतान में क्रांतिकारी वृद्धि को संभव बनाया। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र का केंद्रीय स्तंभ बन चुका है। दिसंबर 2025 में ही यू.पी.आई. के माध्यम से 21 बिलियन से अधिक लेन-देन हुए, जिनका कुल मूल्य 27 लाख करोड़ रुपये से अधिक था।
हालांकि, इस डिजिटल विस्तार ने सुविधा और वित्तीय समावेशन को बढ़ाया है किंतु साइबर खतरों की आशंका को भी व्यापक बना दिया है।
इसे ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बजट 2025-26 में साइबर सुरक्षा के लिए 782 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया।
सीईआरटी-इन: भारत की साइबर सुरक्षा संरचना का केंद्र
भारत के साइबर सुरक्षा ढांचे के केंद्र में इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) स्थित है जो इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन कार्य करती है और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70-B के तहत स्थापित है।
यह संस्था साइबर घटनाओं की निगरानी, प्रतिक्रिया और रोकथाम के माध्यम से राष्ट्रीय साइबर रक्षा को संस्थागत मजबूती प्रदान करती है।
सीईआरटी-इन न केवल साइबर घटनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करता है बल्कि सरकार, उद्योग एवं समाज में सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को भी प्रोत्साहित करता है।
वित्तीय क्षेत्र के लिए CSIRT-Fin और ऊर्जा क्षेत्र के लिए CSIRT-Power जैसे क्षेत्र-विशेष तंत्रों के माध्यम से यह महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं की साइबर सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाता है।
सीईआरटी-इन के प्रमुख कार्य
सीईआरटी-इन भारत की नोडल साइबर घटना प्रतिक्रिया एजेंसी है। इसके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:
साइबर खतरों की वास्तविक समय में निगरानी और चेतावनी जारी करना
संगठनों और नागरिकों के बीच साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाना
अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों, उद्योग और अकादमिक संस्थानों के साथ सहयोग
साइबर सुरक्षा अभ्यास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन
साइबर फोरेंसिक सहायता और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को समर्थन
राष्ट्रीय साइबर संकट प्रबंधन योजना (CCMP) के क्रियान्वयन हेतु मार्गदर्शन
इन प्रयासों के माध्यम से सीईआरटी-इन साइबर घटनाओं के प्रभाव को कम करता है और डिजिटल प्रणालियों की शीघ्र बहाली सुनिश्चित करता है।
वर्ष 2025 में सीईआरटी-इन की प्रमुख उपलब्धियाँ
वर्ष 2025 में सीईआरटी-इन ने 29.44 लाख से अधिक साइबर घटनाओं को संभाला और 1,530 अलर्ट, 390 भेद्यता नोट्स तथा 65 परामर्शी जारी कीं।
इस दौरान 29 साझा कमजोरियों (CVE) की पहचान कर उन्हें प्रकाशित किया गया।
क्षमता विकास के क्षेत्र में, 20,000 से अधिक अधिकारियों और साइबर सुरक्षा पेशेवरों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। 1,570 संगठनों की भागीदारी के साथ 122 साइबर सुरक्षा ड्रिल आयोजित की गईं।
साथ ही, स्मार्ट सिटी अवसंरचना, रैंसमवेयर, बी.एफ.एस.आई. क्षेत्र, क्वांटम साइबर तैयारी और एम.एस.एम.ई. के लिए साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण रिपोर्ट व दिशानिर्देश जारी किए गए।
संस्थागत ढांचे और नागरिक-केंद्रित पहलें
सीईआरटी-इन द्वारा संचालित साइबर स्वच्छता केंद्र (CSK) नागरिकों को मैलवेयर और बॉटनेट से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दिसंबर 2025 तक यह केंद्र भारत की लगभग 98% डिजिटल आबादी को कवर कर चुका था।
इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र (NCCC), सुरक्षा आश्वासन ढांचा और विभिन्न क्षेत्रीय एवं राज्य CSIRT नेटवर्क साइबर सुरक्षा के लिए ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण समाज’ दृष्टिकोण को साकार करते हैं।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
सीईआरटी-इन के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है।
विश्व आर्थिक मंच की Global Cybersecurity Outlook 2025 और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के Cyber Resilience Compass जैसे प्रकाशनों में इसके योगदान को सराहा गया है। एआई-आधारित साइबर जोखिम प्रबंधन पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग में भी सीईआरटी-इन एक प्रमुख भागीदार के रूप में उभरा है।
निष्कर्ष
तेजी से विकसित हो रहे और जटिल होते साइबर खतरों के दौर में, सीईआरटी-इन भारत की साइबर सुरक्षा रणनीति का आधारस्तंभ बन चुका है।
संस्थागत ढांचों, तकनीकी नवाचारों, क्षमता विकास और नागरिक-केन्द्रित पहलों के माध्यम से यह न केवल साइबर जोखिमों का समाधान करता है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए राष्ट्रीय सुदृढ़ता का निर्माण भी करता है। कुल मिलाकर, सीईआरटी-इन के निरंतर प्रयास भारत को एक सुरक्षित, भरोसेमंद और समावेशी डिजिटल भविष्य की ओर अग्रसर कर रहे हैं।