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भारत की जहाज निर्माण क्षमता को नई दिशा

भारत की घरेलू जहाज निर्माण क्षमता को सुदृढ़ करने और वैश्विक समुद्री बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दिलाने की दिशा में पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) ने दो प्रमुख पहलों ‘शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम (SBFAAS)’ और ‘शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (SBDS)’ के संचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं। ये योजनाएँ जहाज निर्माण उद्योग को प्रोत्साहन देंगी और भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती भी प्रदान करेंगी। 

शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम (SBFAS) के बारे में 

  • शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम (SBFAAS) के अंतर्गत कुल 24,736 करोड़ राशि का प्रावधान किया गया है।
  • केंद्र सरकार जहाज की श्रेणी के अनुसार प्रत्येक जहाज के निर्माण पर 15 से 25% तक की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। 
  • यह योजना छोटे एवं बड़े नॉर्मल जहाजों के साथ-साथ विशेषीकृत जहाजों के निर्माण हेतु आवश्यक नए कौशल व क्षमताओं के विकास को प्रोत्साहित करती है। 
  • इसके अतिरिक्त एक ही प्रकार के जहाजों के क्रमिक ऑर्डर (सीरीज़ ऑर्डर) पर विशेष प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया गया है।
  • इस योजना में जहाज निर्माण से जुड़ी विभिन्न पहलों की समेकित योजना और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नेशनल शिपबिल्डिंग मिशन की स्थापना का भी प्रस्ताव है। 
  • साथ ही, शिपब्रेकिंग क्रेडिट नोट की व्यवस्था के तहत भारतीय शिपयार्ड में जहाज स्क्रैप कराने वाले शिप मालिकों को स्क्रैप मूल्य के 40% के बराबर क्रेडिट उपलब्ध कराया जाएगा। 
  • अनुमान है कि आगामी दस वर्षों में SBFAAS के माध्यम से लगभग 96,000 करोड़ मूल्य की जहाज निर्माण परियोजनाओं को समर्थन मिलेगा, जिससे घरेलू विनिर्माण को गति मिलेगी और समुद्री मूल्य शृंखला में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। 

शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (SBDS) के बारे में 

  • इस योजना के लिए कुल 19,989 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य दीर्घकालिक आधार पर देश की जहाज निर्माण क्षमता और तकनीकी दक्षता को मजबूत करना है। 
  • यह योजना ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टरों के विकास, मौजूदा ब्राउनफील्ड शिपयार्ड के विस्तार एवं आधुनिकीकरण के साथ-साथ अनुसंधान, डिजाइन, नवाचार एवं कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी के अंतर्गत इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर की स्थापना का प्रावधान करती है।
  • SBDS के तहत ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टरों को साझा समुद्री और आंतरिक अवसंरचना के निर्माण हेतु 50:50 केंद्र–राज्य विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के माध्यम से पूर्ण (100%) पूंजीगत सहायता प्रदान की जाएगी।
  • इसके अलावा मौजूदा शिपयार्ड को ड्राई डॉक, शिपलिफ्ट, फैब्रिकेशन सुविधाओं तथा ऑटोमेशन सिस्टम जैसे अहम ढांचागत घटकों के ब्राउनफील्ड विस्तार के लिए 25% तक की पूंजी सहायता दी जाएगी। 
  • इस योजना में एक व्यापक क्रेडिट रिस्क कवरेज फ्रेमवर्क शामिल किया गया है जिसके अंतर्गत प्री-शिपमेंट, पोस्ट-शिपमेंट एवं वेंडर-डिफॉल्ट से जुड़े जोखिमों के लिए सरकार समर्थित बीमा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे परियोजनाओं की बैंक योग्यता में सुधार होगा और वित्तीय स्थिरता व लचीलापन सुनिश्चित किया जा सकेगा। 
  • एस.बी.एफ.ए.एस. एवं एस.बी.डी.एस. दोनों परियोजनाएँ 31 मार्च, 2036 तक वैध रहेंगी, जिसमें 2047 तक सैद्धांतिक विस्तार की परिकल्पना की गई है।
  • इन योजनाओं के माध्यम से रोजगार सृजित होने, स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा मिलने और भारत की समुद्री सुरक्षा एवं आर्थिक लचीलेपन के मजबूत होने की उम्मीद है।
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