हाल ही में, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री द्वारा 25 जलज (JALAJ) आजीविका केंद्रों का लोकार्पण किया गया।
जलज आजीविका केंद्रों के बारे में
- यह नमामि गंगे मिशन तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) की संयुक्त पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य गंगा नदी बेसिन में नदी संरक्षण को सतत आजीविका से जोड़ना है। जलज पहल चक्रीय अर्थव्यवस्था मॉडल पर आधारित है।
- इसके अंतर्गत स्थानीय समुदायों को टिकाऊ आजीविका से जुड़ी गतिविधियों में प्रशिक्षण दिया जाएगा और उन्हें जैव विविधता संरक्षण एवं स्वच्छ नदी पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाया जाएगा।
जलज आजीविका केंद्रों की प्रमुख विशेषताएँ
- यह पहल संरक्षण से जुड़े प्रयासों में सामुदायिक सहभागिता और स्वामित्व को सुदृढ़ करती है तथा सम्मानजनक आजीविका के अवसर उपलब्ध कराती है जिसमें महिलाओं की भागीदारी को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया गया है।
- जलज की अवधारणा नदी और मानव समुदायों के बीच सहजीवी संबंध स्थापित करने पर केंद्रित है।
- गंगा बेसिन के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित जलज केंद्र वहाँ की स्थानीय संस्कृति और स्वदेशी समुदायों की पहचान को प्रतिबिंबित करते हैं।
- इन केंद्रों को सामुदायिक कल्याण, संरक्षण संबंधी जागरूकता तथा आजीविका कौशल विकास के लिए समग्र केंद्रों के रूप में विकसित किया गया है।
- जलज केंद्रों में जलीय जैव-विविधता संरक्षण से संबंधित सूचना प्रसार, आजीविका प्रशिक्षण तथा प्रशिक्षणार्थियों द्वारा विकसित उत्पादों की बिक्री के लिए आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।