New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 5th July 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 20th July 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 5th July 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 20th July 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM

मन्नथु पद्मनाभन

चर्चा में क्यों ? 

  • हाल ही में भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी मन्नथु पद्मनाभन की प्रतिमा का अनावरण किया।

मन्नथु पद्मनाभन के बारे में 

  • केरल के आधुनिक इतिहास में मन्नाथु पद्मनाभन का नाम एक ऐसे दूरदर्शी समाज सुधारक और स्वाधीनता सेनानी के रूप में दर्ज है, जिन्होंने मानवीय गरिमा, सामाजिक समता और राष्ट्रीय उन्नति के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। 
  • बीसवीं शताब्दी के आरंभिक दौर में जब समाज रूढ़िवादिता और जातीय संकीर्णता से जूझ रहा था, तब उन्होंने सामाजिक बहिष्कार और कुप्रथाओं के खिलाफ वैचारिक क्रांति का बिगुल फूंका। महात्मा गांधी के दर्शन से प्रभावित होकर उन्होंने सत्याग्रह को अपनी वैचारिक क्रांति और नैतिक प्रतिरोध का मुख्य अस्त्र बनाया। 

जीवन परिचय: आरंभिक संघर्ष से नेतृत्व तक 

  • मन्नाथु पद्मनाभन का जन्म 2 जनवरी 1878 को तत्कालीन त्रावणकोर रियासत के कोट्टायम क्षेत्र में स्थित चंगनास्सेरी के पेरुन्ना गाँव में हुआ था। इनके माता-पिता मन्नाथु पार्वती अम्मा और ईस्वरन नंबूथिरी थे। 
  • इन्होने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1893 में एक शिक्षक के रूप में की, लेकिन न्याय की चाह उन्हें कानून की ओर ले गई और 1905 से उन्होंने मजिस्ट्रेट अदालतों में वकालत करना शुरू कर दिया। 
  • केरल की आबादी में लगभग 12.10% (2011 के आंकड़ों के अनुसार) की हिस्सेदारी रखने वाले नायर समुदाय की आंतरिक रूढ़ियों को दूर करने और उन्हें संगठित करने के लिए इन्होने 31 अक्टूबर 1914 को नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) की नींव रखी।
  • इन्होने इस ऐतिहासिक संगठन के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करते हुए 31 वर्षों तक सचिव और बाद में इसके अध्यक्ष के रूप में कमान संभाली। 
  • 25 फरवरी 1970 को 92 वर्ष की दीर्घायु में इस महान विभूति का निधन हो गया।   

युगांतकारी योगदान: सामाजिक, विधिक और राजनीतिक बदलाव 

मन्नाथु पद्मनाभन ने केवल उपदेश नहीं दिए, बल्कि संस्थागत सुधारों और जन-आंदोलनों के जरिए बदलाव को धरातल पर उतारा : 

संस्थागत एवं विधिक सुधार 

  • नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) : समुदाय में आधुनिक शिक्षा, कड़े अनुशासन और प्रगतिशील विचारों का प्रसार करने के लिए उन्होंने नायर सर्विस सोसाइटी को माध्यम बनाया। उन्होंने स्थानीय स्तर पर करायगमों (जमीनी इकाइयों) को दोबारा जीवित कर सामाजिक विकास को एक स्थायी ढांचा प्रदान किया।   
  • पारिवारिक कानूनों का आधुनिकीकरण : वर्ष 1924-25 में उनके प्रयासों से त्रावणकोर सरकार ने नायर रेगुलेशन पारित किया। इस कानून ने सदियों पुरानी मातृवंशीय मरुमक्कथायम व्यवस्था को बदलते हुए बच्चों के बीच पैतृक संपत्ति के न्यायसंगत और समान बंटवारे का मार्ग प्रशस्त किया। 

नागरिक अधिकार और धार्मिक सुधार 

  • कुप्रथाओं का विरोध : इन्होने अछूत प्रथा के उन्मूलन के लिए वायकोम सत्याग्रह (1924-25) का पुरजोर समर्थन किया, जिससे मंदिरों के संपर्क वाले सार्वजनिक मार्गों पर सभी को चलने का अधिकार मिला। इसके बाद गुरुवायूर सत्याग्रह (1931-32) में भी उनकी सक्रियता ने जातिगत ऊंच-नीच की दीवारों को हिला दिया। 
  • मंदिर प्रवेश आंदोलन : समाज के वंचित और शोषित तबकों को देवालयों में प्रवेश का अधिकार दिलाने के लिए उन्होंने सवर्णजाथ सत्याग्रह की अगुवाई की। इस जन-आंदोलन ने ऐसा वैचारिक माहौल बनाया कि त्रावणकोर में ऐतिहासिक मंदिर प्रवेश सुधार लागू करने पड़े।    

राष्ट्रीय मुक्ति और राजनीतिक चेतना 

  • स्वतंत्रता संग्राम : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़कर उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन सहित विभिन्न स्वाधीनता संग्रामों में अग्रणी भूमिका निभाई। त्रावणकोर में राजनीतिक चेतना जगाने और विरोध प्रदर्शन करने के कारण 14 जून 1947 को उन्हें कारावास भी भुगतना पड़ा।
  • प्रशासनिक कुशलता : त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के प्रथम अध्यक्ष मनोनीत होने पर उन्होंने शिथिल पड़ चुके मंदिर प्रशासनों को दुरुस्त किया और धार्मिक स्थलों के प्रबंधन में पारदर्शिता व व्यवस्था कायम की।
  • संसदीय एवं क्षेत्रीय राजनीति : वे 1949 में त्रावणकोर विधानसभा के सदस्य चुने गए। इसके बाद 1959 के ऐतिहासिक विमोचना समरम (मुक्ति संघर्ष) का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप केंद्र सरकार को अनुच्छेद 356 का प्रयोग कर तत्कालीन कम्युनिस्ट सरकार को हटाना पड़ा। वर्ष 1964 में उन्होंने केरल कांग्रेस की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाई, जिसे देश का पहला क्षेत्रीय राजनीतिक दल माना जाता है।

बौद्धिक और साहित्यिक संपदा:

एक ओजस्वी वक्ता और लेखक के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कृतियों की रचना की, जिनमें उनकी बौद्धिक गहराई साफ झलकती है :

  • एंटे जीवितस्मरणकल (1989) : उनकी प्रामाणिक आत्मकथा।
  • मन्नाट्टिंते संपूर्णकृथिकाल (1978) : उनकी समस्त रचनाओं का प्रामाणिक संकलन।
  • मन्नाथु पद्मनाभन्ते प्रसंगंगल (1982) : उनके ऐतिहासिक और प्रेरक भाषणों का संग्रह।

पुरस्कार और सम्मान: 

  • पद्म भूषण (1966) : लोक कल्याण और समाज सुधार के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करते हुए भारत सरकार ने इन्हें 1966 में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से अलंकृत किया। 
  • भारत केसरी : सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ उनके साहस और समाज को सूत्रबद्ध करने के प्रयासों के लिए भारत के राष्ट्रपति ने उन्हें भारत केसरी (सिंह-ए-हिंद) की मानद उपाधि दी। 
  • प्रेरणा स्थल : चंगनास्सेरी स्थित नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) के मुख्यालय में बनी उनकी समाधि आज भी एक पवित्र स्मारक के रूप में मौजूद है, जो आने वाली पीढ़ियों को सामाजिक समरसता, त्याग और नैतिक साहस की प्रेरणा देती है।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR