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श्रम शक्ति नीति 2025

(प्रारंभिक परीक्षा: आर्थिक और सामाजिक विकास- सतत् विकास, गरीबी, समावेशन, जनसांख्यिकी, सामाजिक क्षेत्र में की गई पहल आदि)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2 व 3: सरकारी नीतियों एवं विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय; जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ; समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय)

संदर्भ 

  • भारत सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय श्रम एवं रोजगार नीति (मसौदा) सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है जिसे ‘श्रम शक्ति नीति 2025’ नाम दिया गया है। यह नीति भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दृष्टि से तैयार की गई है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य एक निष्पक्ष, समावेशी एवं भविष्य उन्मुख श्रम तंत्र का निर्माण करना है जिसमें हर श्रमिक की सुरक्षा, गरिमा व उत्पादकता सुनिश्चित हो। 

सामाजिक सुरक्षा का एकीकरण: ‘एक राष्ट्र, एक श्रमिक खाता’

  • इस मसौदा नीति का सबसे प्रमुख घटक सार्वभौमिक और पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा प्रणाली का निर्माण है। इसके तहत सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि देश की प्रमुख योजनाओं/निगमों को एकीकृत करते हुए प्रत्येक श्रमिक के लिए एक सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा खाता तैयार किया जाएगा। 
    • इन में शामिल हैं- कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC), प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY), ई-श्रम पोर्टल और राज्य कल्याण बोर्ड। 
  • यह खाता श्रमिकों को देश के किसी भी हिस्से में स्थानांतरण के बावजूद सामाजिक सुरक्षा लाभों की पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित करेगा।

नीति की दृष्टि एवं दर्शन 

  • केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया के अनुसार, यह नीति भारत के सभ्यतागत लोकाचार और श्रम धर्म से प्रेरित है जो ‘कार्य की गरिमा’ और ‘नैतिक मूल्य’ पर आधारित है।
  • इस नीति का उद्देश्य एक संतुलित श्रम ढाँचा निर्मित करना है जो श्रमिकों के कल्याण को बढ़ावा देते हुए उद्यमिता, उत्पादकता एवं स्थायी आजीविका को भी प्रोत्साहित करे।

मुख्य प्रावधान और विशेष पहलें

  1. सामाजिक सुरक्षा सुवाह्यता: यह नीति सार्वभौमिक श्रमिक पंजीकरण और सामाजिक सुरक्षा लाभों की सहज पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित करती है।
  2. जोखिम-आधारित निरीक्षण: पारंपरिक निरीक्षण प्रणाली की जगह जोखिम-आधारित और डिजिटल निगरानी तंत्र अपनाया जाएगा।
  3. लिंग-संवेदनशील मानक: महिलाओं के लिए सुरक्षित और समान अवसर वाला कार्य वातावरण सृजित करने पर बल दिया गया है।
  4. कौशल योजनाओं का अभिसरण: विभिन्न कौशल विकास योजनाओं को आपस में जोड़कर एक समन्वित कौशल पारिस्थितिकी तंत्र बनाया जाएगा।
  5. व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संहिता: यह नीति इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करती है ताकि कार्यस्थलों पर शून्य मृत्यु दर का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

अपेक्षित परिणाम

  • मसौदा नीति कई दूरगामी परिणामों की परिकल्पना करती है, जैसे –
    • सार्वभौमिक श्रमिक पंजीकरण और सामाजिक सुरक्षा पोर्टेबिलिटी
    • महिला श्रम बल की भागीदारी को 2030 तक 35% तक बढ़ाने का लक्ष्य
    • डिजिटल अनुपालन के कारण अनौपचारिक नौकरियों में कमी की संभावना 
    • हरित एवं सभ्य नौकरियों का सृजन
    • एआई-सक्षम श्रम शासन प्रणाली और ‘एक राष्ट्र, एकीकृत कार्यबल’ की स्थापना

हरित रोजगार और डिजिटल शासन 

  • नीति में हरित रोजगार (Green Jobs) को प्रोत्साहन देने की बात कही गई है ताकि सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप रोजगार का सृजन हो सके।
  • साथ ही, एआई-सक्षम सुरक्षा प्रणालियाँ, एकीकृत राष्ट्रीय श्रम डेटा आर्किटेक्चर और डिजिटल अनुपालन के लिए एकल-खिड़की प्रणाली को शामिल किया गया है। 
  • एम.एस.एम.ई. के लिए स्व-प्रमाणन और सरलीकृत रिटर्न प्रक्रिया भी इस नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

तीन चरणों में क्रियान्वयन

  1. पहला चरण (2025–27): संस्थागत ढाँचे का निर्माण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का एकीकरण
  2. दूसरा चरण (2027–30): सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा खातों की राष्ट्रव्यापी शुरुआत और जिला-स्तरीय रोजगार सुविधा केंद्रों की स्थापना
  3. तीसरा चरण (2030 के बाद): पूर्ण डिजिटल शासन, पूर्वानुमानात्मक नीति विश्लेषण और निरंतर सुधार प्रक्रिया का क्रियान्वयन

जवाबदेही और पारदर्शिता

  • इस नीति की प्रगति पर नज़र रखने के लिए एक रीयल-टाइम डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा। 
  • राज्यों के प्रदर्शन के आकलन हेतु श्रम एवं रोजगार नीति मूल्यांकन सूचकांक (LPEI) बनाया जाएगा, जबकि वार्षिक राष्ट्रीय श्रम रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत की जाएगी।
  • स्वतंत्र तृतीय-पक्ष समीक्षा के माध्यम से जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।

निष्कर्ष 

  • श्रम शक्ति नीति 2025 भारत के श्रमिक वर्ग के लिए एक परिवर्तनकारी पहल है। यह न केवल सामाजिक सुरक्षा को सार्वभौमिक बनाने की दिशा में एक कदम है, बल्कि डिजिटल, हरित व समावेशी कार्यबल की परिकल्पना को साकार करने का प्रयास भी है।
  • वस्तुतः यह नीति भारत को ‘कार्य की गरिमा’ और ‘श्रमिक कल्याण’ पर आधारित एक न्यायसंगत व उत्पादक अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर करती है। 
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