संदर्भ
हाल ही में दक्षिण रेलवे नेटवर्क पर रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने और क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय रेल ने दक्षिण रेलवे के 10.65 किलोमीटर लंबे मारारिकुल्लम–आलप्पुष़ा रेल सेक्शन के दोहरीकरण को लगभग ₹220 करोड़ की लागत से मंजूरी प्रदान की है।
मारारिकुल्लम-आलप्पुष़ा दोहरीकरण परियोजना के बारे में
- यह परियोजना रेलवे नेटवर्क की क्षमता वृद्धि के उद्देश्य से स्वीकृत दोहरीकरण, तिहरीकरण, चौथी लाइन, फ्लाईओवर एवं बाईपास कार्यों के व्यापक कार्यक्रम के अंतर्गत अनुमोदित की गई है।
- मारारिकुल्लम-आलप्पुष़ा रेल सेक्शन वर्तमान में एरणाकुलम-तुरवूर-आलप्पुष़ा-अम्बलप्पुष़ा-कायमकुलम रेल कॉरिडोर का एकमात्र शेष एकल रेल लाइन सेक्शन है, जबकि इस मार्ग पर अन्य दोहरीकरण कार्य पहले ही चालू किए जा चुके हैं अथवा निर्माणाधीन हैं।
योजना की विशेषताएं:
- परियोजना के पूर्ण होने पर प्रतिदिन प्रत्येक दिशा में 9 अतिरिक्त यात्री ट्रेनों के संचालन की सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही इस परियोजना के माध्यम से प्रतिवर्ष 2.88 मिलियन टन माल ढुलाई संभव हो सकेगी।
- यात्री एवं माल परिवहन में वृद्धि के परिणामस्वरूप लगभग ₹3.08 करोड़ की अतिरिक्त वार्षिक शुद्ध आय प्राप्त होने का भी अनुमान है।
योजना का लाभ:
- यह दोहरीकरण कार्य यात्री एवं मालगाड़ियों के ठहराव और प्रतीक्षा समय को कम कर परिचालन दक्षता में सुधार लाएगा, जिससे इस महत्वपूर्ण मार्ग पर ट्रेनों का संचालन अधिक तेज और सुचारु हो सकेगा।
- इसके अतिरिक्त रेल लाइन की क्षमता बढ़ेगी, समयपालन में सुधार होगा तथा पूरे क्षेत्र में रेल संपर्क और अधिक मजबूत होगा।
- इस परियोजना की पहचान भारतीय रेल के मिशन 3000 एमटी (MT) तथा उच्च घनत्व यातायात नेटवर्क कॉरिडोर के अंतर्गत की गई है।
- परियोजना आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें वित्तीय आंतरिक प्रतिफल दर (FIRR) 3.99% तथा आर्थिक आंतरिक प्रतिफल दर (EIRR) 22.30% आंकी गई है।
- इसके पूरा होने से रेल परिचालन अधिक कुशल बनेगा, माल ढुलाई और यात्री सेवाओं में सुधार होगा तथा क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
वस्तुतः यह परियोजना केरल में बेहतर रेल सुविधाएं उपलब्ध कराने, रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने और विकास को नई गति देने की दिशा में भारतीय रेल का एक महत्वपूर्ण कदम है।