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समुद्री हीट वेव्स

(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र-3: जैव-विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)
(सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-1 भूगोल :  भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान- अति महत्त्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जल-स्रोत और हिमावरण सहित) और वनस्पति एवं प्राणिजगत में परिवर्तन और इस प्रकार के परिवर्तनों के प्रभाव)

संदर्भ

क्लाइमेट सेंट्रल के एक नए अध्ययन के अनुसार, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के तटीय इलाकों में जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न समुद्रीहीट वेव से मछलियों की मृत्यु की संभावना 100 गुना अधिक हो गई थी।

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष 

  • विश्लेषण के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्री हीट वेव की बारंबारता एवं तीव्रता में निरंतर वृद्धि दर्ज़ की गई है।
  • अध्ययन के अनुसार कुछ क्षेत्रों में समुद्री सतह का तापमान (Sea Surface Temperature : SST) औसत से 2℃ से अधिक पहुंच गया है जिससे समुद्री तूफानों की गंभीरता भी लगातार बढ़ रही है। 
  • वर्ष 2018 में जर्नल नेचर में प्रकाशित अध्ययन, 'ग्लोबल वार्मिंग के तहत समुद्री हीटवेव' के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में समुद्री हीटवेव की बारंबारता एवं तीव्रता के साथ ही अवधि में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
  • इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में समुद्री हीटवेव में 50% की वृद्धि हुई है।

समुद्री हीट वेव 

  • क्या है : समुद्री हीटवेव एक चरम मौसमी घटना है। यह तब उत्पन्न होती जब समुद्र के किसी विशेष क्षेत्र का सतही तापमान कम से कम पाँच दिनों के लिए औसत तापमान से 3 या 4℃ अधिक हो जाता है। 
  • समयावधि : नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के अनुसार, समुद्री हीटवेव कई सप्ताह से लेकर महीनों या सालों तक रह सकती है।
  • प्रभाव क्षेत्र : समुद्री हीट वेव तटरेखा के छोटे क्षेत्रों से लेकर सभी अक्षांशों और सभी प्रकार के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों को प्रभावित कर सकती है।
    • अनुमानों के अनुसार 2100 ई. तक पूर्व-औद्योगिक समय की तुलना में समुद्री हीट वेव की आवृत्ति में 20-50 गुना और तीव्रता में 10 गुना वृद्धि होगी। 
  • तीव्रता के कारण : इसका मुख्य कारण तापमान मे वृद्धि के कारण जलवायु संकट है। चूंकि वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.3℃ अधिक हो गया है, इसलिए 90% अतिरिक्त  ऊष्मा महासागर द्वारा अवशोषित कर ली गई है। 
    • अध्ययनों के अनुसार लगभग 90% समुद्री हीट वेव  के लिए मानव-जनित वैश्विक तापमान उत्तरदायी है तथा जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन में वृद्धि जारी रहने के कारण इनकी आवृत्ति, तीव्रता और अवधि में वृद्धि होने की संभावना है।
    • यही कारण है कि तटीय पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में समुद्री हीट वेव में वृद्धि देखी जा रही है और उनकी तीव्रता लगातार बढ़ रही है।

प्रभाव 

  • चरम मौसमी घटनाओं में वृद्धि  : समुद्री हीट वेव उष्णकटिबंधीय तूफान जैसी चरम मौसम की घटनाओं का कारण बन सकती है। 
    • यह जल चक्र को बाधित कर सकता है जिससे भूमि पर बाढ़, सूखा और जंगल की आग लगने की तीव्रता मे वृद्धि होती है।
  • तटीय समुदायों के लिए सामाजिक-आर्थिक प्रभाव: हीट वेव से जलीय कृषि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्योंकि खेती की जाने वाली प्रजातियाँ गर्म तापमान के प्रति संवेदनशील हो सकती हैं। 
    • ऐसे मे मछलियों की मृत्यु तथा आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण प्रजातियों की उत्पादकता में कमी समुदायों की आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित करती है। 
  • समुद्री खाद्य जाल पर नकारात्मक प्रभाव : हीट वेव के कारण बदलती परिस्थितियाँ आक्रामक विदेशी प्रजातियों के प्रसार में भी मदद कर सकती हैं, जो समुद्री खाद्य जाल को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। 
  • प्रवाल विरंजन मे वृद्धि : समुद्री हीट वेव प्रवाल विरंजन में योगदान देती हैं , जिससे कोरल की प्रजनन क्षमता कम हो जाती है। 
    • अधिकांश समुद्री जानवर जीवित रहने के लिए कोरल रीफ़ पर निर्भर होते  हैं। ऐसे में कोरल को नुकसान पहुँचने से उनका अस्तित्व ख़तरे में पड़ सकता है।
  • दीर्घकालिक तापीय तनाव : समुद्रीहीट वेव द्वारा समुद्री जीवन में “दीर्घकालिक तापीय तनाव” उत्पन्न होता है 
    • विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया मे बड़े पैमाने पर मछलियों की मृत्यु का कारण संभवतः दीर्घ कालीन तापीय तनाव ही होगा। 

आगे की राह 

  • ग्रीन हाउस उत्सर्जन में कमी : समुद्री ऊष्णता को नियंत्रित करने और समुद्री तूफानों जैसी मौजूदा चरम घटनाओं का मुकाबला करने के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में अत्यधिक कमी लाना महत्वपूर्ण है। 
    • इसके अलावा क्षेत्रीय या राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को संबोधित करने के लिए स्थानीय समाधानों को लागू किया जाना चाहिए।
  • अनुसंधान क्षमता का निर्माण : समुद्री तूफानों के प्रभावों को समझने के लिए अनुसंधान क्षमता और पर्याप्त निगरानी प्रणाली का निर्माण करना चाहिए। 
    • प्रतिक्रियाओं एवं शमन गतिविधियों की योजना बनाने के लिए पूर्वानुमान प्रणाली का निर्माण करना महत्वपूर्ण होगा। 
  • अनुकूलन रणनीति : समुद्री तूफानों के लिए शमन एवं अनुकूलन रणनीतियों की पहचान करने और उन्हें लागू करने के लिए वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, स्थानीय शासी निकायों, निजी क्षेत्र (मत्स्य पालन, जलीय कृषि, पारिस्थितिकी पर्यटन), संरक्षणवादियों और नागरिक समाज सहित सभी हितधारकों को एक साथ आना चाहिए। 
    • क्षेत्रीय स्तर, उप-राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावों को संबोधित करने और समुद्री लचीलापन बनाने के लिए प्रबंधन एवंअनुकूलन रणनीतियों को डिज़ाइन और कार्यान्वित किया जाना चाहिए।
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