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धातु-रहित पाईज़ोकैटलिस्ट

(प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य विज्ञान)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3 : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास व अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास) 

संदर्भ 

भारतीय वैज्ञानिकों ने हाइड्रोजन ईंधन उत्पादन के लिए धातु-रहित पाईज़ोकैटलिस्ट (Metal Free Piezocatalyst) विकसित किया है। 

क्या है पाईज़ोकैटलिस्ट 

  • पाईज़ोकैटलिस्ट वह सामग्री है जो यांत्रिक दबाव या कंपन्न द्वारा उत्पन्न ऊर्जा से रासायनिक प्रतिक्रियाओं को प्रेरित करती है। 
  • अब तक पानी से हाइड्रोजन अलग करने के लिए भारी धातुओं पर आधारित उत्प्रेरक का इस्तेमाल किया जाता था किंतु यह नई तकनीक धातु-मुक्त एवं पर्यावरण के लिए सुरक्षित है।

धातु-मुक्त पाईज़ोकैटलिस्ट के बारे में 

  • सामग्री : धातु-मुक्त पाईज़ोकैटलिस्ट को विशेष रूप से कार्बनिक पदार्थों या कोवेलेंट ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (COF) से बनाया जाता है। इन सामग्री में धातु का कोई उपयोग नहीं होता है जो इसे पारंपरिक धातु-आधारित उत्प्रेरकों से अलग करता है। 
    • इस प्रकार की संरचनाओं में विशेष आणविक लिंक या फेरीइलेक्ट्रिक (FiE) क्रम होता है जो उत्प्रेरक को यांत्रिक दबाव के प्रति संवेदनशील बनाता है और इसे उच्च दक्षता से हाइड्रोजन उत्पादन में सक्षम बनाता है।
  • कार्यप्रणाली : जब धातु-मुक्त पाईज़ोकैटलिस्ट पर यांत्रिक दबाव डाला जाता है तो यह इलेक्ट्रॉन-होल युग्म (Electron-hole Pairs) उत्पन्न करता है। इन युग्म का उपयोग पानी से हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन को अलग करने के लिए किया जाता है। यह प्रक्रिया जल विखंडन (Water splitting) के रूप में जानी जाती है।
  • सुरक्षित एवं टिकाऊ : धातु-मुक्त पाईज़ोकैटलिस्ट में कोई भारी धातु या दुर्लभ तत्व नहीं होते हैं जिससे यह पर्यावरण के लिए सुरक्षित व टिकाऊ होता है। यह हरित हाइड्रोजन तकनीक में उपयोगी होता है क्योंकि इसमें रासायनिक प्रतिक्रियाओं को उत्प्रेरित करने के लिए महंगे व प्रदूषणकारी धातुओं का उपयोग नहीं किया जाता है।

महत्व

इस नई तकनीक के विकास से भारत को न केवल ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा तथा भारत को वैश्विक स्तर पर हाइड्रोजन ईंधन प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने में अग्रणी बनाएगा। 

भारत द्वारा हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा देने की विभिन्न पहलें

  • राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन : इस मिशन को वर्ष 2021 में शुरू किया गया था जिसका उद्देश्य हाइड्रोजन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना और उसे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना है। 
  • एनर्जी ट्रांज़िशन एवं हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था : भारत की ऊर्जा नीति में अब हाइड्रोजन को एक महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। हाइड्रोजन आधारित ऊर्जा अर्थव्यवस्था का विकास सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार ने हाइड्रोजन उत्पादन के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दिया है ताकि हाइड्रोजन को प्रदूषण रहित तरीके से उत्पन्न किया जा सके।
  • हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाहनों का विकास : भारत में हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाहनों का परीक्षण व विकास किया जा रहा है। इस तरह के वाहनों का उपयोग वायू प्रदूषण को कम करने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में कमी लाने के लिए किया जा सकता है। 
    • उदाहरण के लिए, दिल्ली परिवहन निगम द्वारा हाइड्रोजन से चलने वाली बसों का संचालन किया जा रहा है।
  • भारत एवं जापान के बीच हाइड्रोजन सहयोग : भारत एवं जापान ने हाइड्रोजन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए कई पहल की हैं। दोनों देशों ने हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण व वितरण के लिए संयुक्त योजनाएं बनाई हैं। जापान की हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के मॉडल से प्रेरित होकर भारत ने भी अपने हाइड्रोजन प्रक्षेत्र को प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के मामले में आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।
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