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मीथेन उत्सर्जन और भारत: वैश्विक पहल और स्थानीय चुनौतियाँ

  • हाल ही में, COP29 प्रेसीडेंसी ने "ऑर्गेनिक अपशिष्ट से मीथेन न्यूनीकरण घोषणा-पत्र" लॉन्च किया। 
  • यह पहल 2021 में COP26 में शुरू की गई ग्लोबल मीथेन प्लेज (GMP) को लागू करने का समर्थन करती है। 
  • इस पहल का उद्देश्य ऑर्गेनिक अपशिष्ट से मीथेन उत्सर्जन को कम करना और भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) के तहत लक्ष्यों को हासिल करना है।
  • भारत ने इस घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किया है।

ग्लोबल मीथेन प्लेज (GMP)

  • COP26 में यूरोपीय संघ और अमेरिका द्वारा लॉन्च की गई इस पहल का लक्ष्य है 2030 तक वैश्विक मीथेन उत्सर्जन में कम से कम 30% की कमी
  • यह एक स्वैच्छिक कार्यक्रम है, जो सभी पक्षकारों को मीथेन न्यूनीकरण के लिए प्रेरित करता है।

मीथेन उत्सर्जन को कम करना क्यों महत्वपूर्ण है ? 

  1. ग्लोबल वार्मिंग में बड़ा योगदान: मीथेन (CH₄) की ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल (GWP) CO₂ से लगभग 28 गुना अधिक है। औद्योगिक क्रांति के बाद यह वैश्विक तापवृद्धि में लगभग 30% योगदान दे चुका है। (स्रोत: IEA, Global Methane Tracker, 2025)
  2. वायुमंडलीय मीथेन में तेज़ी से वृद्धि: हाल ही में तीन-वर्षीय उच्चतम वृद्धि दर्ज की गई है। (स्रोत: WMO, Greenhouse Gas Bulletin)

मीथेन उत्सर्जन कम करने के उपाय

वैश्विक स्तर पर:

  • EMIT (Earth Surface Mineral Dust Source Investigation)
  • AVIRIS-NG (Airborne Visible Infrared Imaging Spectrometer – Next Generation)
  • Global Methane Initiative (2004)
  • Methane Alert and Response System (MARS)

भारत में:

  • राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA)
  • डायरेक्ट सीडेड राइस तकनीक
  • फसल विविधीकरण कार्यक्रम
  • गैल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन (गोबर-धन) योजना
  • राष्ट्रीय पशुधन मिशन

भारत की चुनौतियाँ

  • धान उत्पादन: मीथेन उत्सर्जन में कटौती लघु और सीमांत किसानों की आजीविका पर असर डाल सकती है। भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक और निर्यातक है।
  • मवेशियों की बड़ी आबादी: पशु आहार और प्रबंधन सुधार के बावजूद, गौमूत्र और पाचन प्रक्रिया से मीथेन उत्सर्जन एक बड़ा स्रोत है।

इस कारण भारत ने अभी तक GMP में शामिल होने से इनकार किया है।

निष्कर्ष

मीथेन उत्सर्जन को प्रभावी रूप से कम करने के लिए वैश्विक और राष्ट्रीय उपायों का संयोजन आवश्यक है।

  • अंतरराष्ट्रीय पहलों को बढ़ावा देना
  • पशु आहार और प्रबंधन में सुधार
  • सर्कुलर अपशिष्ट प्रबंधन अपनाना
  • नवाचार आधारित तकनीकी उपाय: कम ऊर्जा खपत वाले दहन इंजन, लैंडफिल बायोकवर आदि

मीथेन न्यूनीकरण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक संतुलन के साथ लागू होने वाली रणनीति होना चाहिए।

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