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मैक्सिको का टैरिफ विस्तार:भारत के ऑटो निर्यात पर दबाव

(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2 व 3: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार, भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों का प्रभाव; भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना)

संदर्भ 

  • हाल ही में, मैक्सिको की सीनेट ने भारत सहित उन एशियाई देशों से आयात पर 50% तक के टैरिफ को मंजूरी दी है जिनके साथ मैक्सिको का कोई मुक्त व्यापार समझौता (FTA) नहीं है। 
  • यह कदम अप्रैल 2024 में लगाए गए शुल्कों का ही विस्तार है और नए टैरिफ के 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने की उम्मीद है। हालाँकि, व्यापार डाटा के विश्लेषण के अनुसार इन शुल्कों का भारत के समग्र निर्यात पर कोई गंभीर खतरा नहीं होगा किंतु ऑटोमोबाइल जैसे कुछ विशेष क्षेत्रों पर इसका प्रभाव लगातार बना रहेगा।

अमेरिकी दबाव का मुकाबला 

  • मैक्सिको सरकार की वेबसाइट पर उपलब्ध दस्तावेज़ों से पता चलता है कि यह शुल्क नया नहीं है, बल्कि अप्रैल 2024 में गैर-एफटीए साझेदारों से आयातित विभिन्न वस्तुओं पर दो वर्ष की अवधि के लिए लगाए गए 5-50% तक के शुल्क को दिसंबर 2025 में सीनेट ने अनुमोदित कर विस्तार दिया है।
  • एशियाई आयात पर मैक्सिको द्वारा लगाए गए इन टैरिफ का प्राथमिक उद्देश्य अमेरिकी व्यापार दबावों का मुकाबला करना और उत्तरी अमेरिका में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। 

समग्र निर्यात पर सीमित प्रभाव

  • वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत ने मैक्सिको को $5.7 बिलियन मूल्य का सामान निर्यात किया, जो उस वर्ष के कुल निर्यात का 1.3% है।
  • यह आंकड़ा इस बात की पुष्टि करता है कि कुल मिलाकर उच्च टैरिफ भारत के व्यापक निर्यात परिदृश्य के लिए कोई महत्वपूर्ण खतरा पैदा नहीं करेंगे। 

क्षेत्र-विशिष्ट चिंता: ऑटोमोबाइल

  • कुल निर्यात कुछ ही क्षेत्रों द्वारा नियंत्रित होता है और मैक्सिको इन क्षेत्रों के निर्यात का एक प्रमुख प्राप्तकर्ता भी है। यही कारण है कि टैरिफ इन विशिष्ट क्षेत्रों के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं:
    • मोटर कार एवं पुर्जे: यह भारत के मैक्सिको को होने वाले कुल निर्यात का $1.4 बिलियन या 25% हिस्सा हैं।
    • मोटरसाइकिल निर्यात: यह कुल निर्यात का अतिरिक्त 7% हिस्सा है।
  • इन क्षेत्रों के लिए जोखिम अधिक है क्योंकि मैक्सिको भारत के कुल ऑटो एवं ऑटो पार्ट्स निर्यात में लगभग 10% और मोटरसाइकिल निर्यात में लगभग 12% का भागीदार है। 

उद्योग जगत की अपील: FTA वार्ता शुरूआत करना

  • टैरिफ के प्रभाव को देखते हुए इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद (EEPC) ने मैक्सिको के साथ संभावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत शुरू करने का अनुरोध किया है।
  • ई.ई.पी.सी. ने चिंता व्यक्त की है कि मैक्सिको, भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए एक प्रमुख गंतव्य है और ये शुल्क मैक्सिकन बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को कम कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त कम-से-कम एक तरजीही व्यापार समझौता (PTA) की आवश्यकता महसूस होती है।
  • ई.ई.पी.सी. के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-अक्तूबर 2025 के दौरान भारत के मैक्सिको को होने वाले कुल इंजीनियरिंग निर्यात में 12% की गिरावट दर्ज की गई। इस अवधि के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में कमी देखी गई, जिनमें शामिल हैं: 
    • स्टील: 7% की कमी
    • लौह एवं इस्पात उत्पाद: 26% की गिरावट
    • एल्युमीनियम एवं उसके उत्पाद: 56% की गिरावट
    • ऑटो घटक: 20% की गिरावट
    • दो व तिपहिया वाहन: 32% की कमी 
  • यह डेटा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि उच्च टैरिफ ने विशिष्ट इंजीनियरिंग क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव डालना शुरू कर दिया है जिससे भारत के लिए मैक्सिको के साथ व्यापार संबंध मजबूत करने और टैरिफ बाधाओं को दूर करने के लिए FTA पर शीघ्र बातचीत शुरू करना आवश्यक हो जाता है।
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