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पारस्परिक कानूनी सहायता संधि

हाल ही में, केंद्र सरकार ने असम के गायक जुबिन गर्ग की मृत्यु के बाद सिंगापुर के साथ पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (Mutual Legal Assistance Treaty) का प्रयोग किया।

पारस्परिक कानूनी सहायता संधि के बारे में

  • यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत देश अपराध की रोकथाम, दमन, जाँच एवं अभियोजन में औपचारिक सहायता प्रदान करने और प्राप्त करने के लिए एक-दूसरे के साथ सहयोग करते हैं।
  • इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अपराधी विभिन्न देशों में उपलब्ध साक्ष्यों के अभाव में कानून की उचित प्रक्रिया से बच न सकें या उसे बाधित न कर सकें।
  • भारत द्विपक्षीय संधियों/समझौतों, बहुपक्षीय संधियों/समझौतों या अंतर्राष्ट्रीय अभिसमयों के माध्यम से या पारस्परिकता के आश्वासन के आधार पर आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता प्रदान करता है।
  • आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता संधियाँ (MLATs) अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सहायता प्रदान करने के लिए देशों के बीच की गई द्विपक्षीय संधियाँ हैं।
    • भारत ने 45 से अधिक देशों के साथ पारस्परिक कानूनी सहायता संधियाँ की हैं। गृह मंत्रालय इसका नोडल मंत्रालय है।

भारत द्वारा या भारत को प्रदान की जाने वाली सामान्य सहायता

  • व्यक्तियों एवं वस्तुओं की पहचान करना और पता लगाना
  • साक्ष्य लेना और बयान प्राप्त करना; हिरासत में लिए गए व्यक्ति या अन्य लोगों को साक्ष्य देने, जाँच में सहायता करने या गवाह के रूप में उपस्थित होने के लिए सहायता करना
  • न्यायिक दस्तावेजों की तामील कराना
  • तलाशी और जब्ती करना
  • सूचना, दस्तावेज, अभिलेख और अन्य साक्ष्य सामग्री उपलब्ध कराना
  • अपराध की आय और साधनों की पहचान करना तथा पता लगाना, कुर्की, रोक, निरोध, जब्ती या ज़ब्त करने के उपाय करना
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