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राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर

(प्रारंभिक परीक्षा- राष्ट्रीय घटनाक्रम, भारत का इतिहास)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अधययन प्रश्नपत्र- 1 : भारतीय संस्कृति : प्राचीन से आधुनिक काल तक के कला, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू)

संदर्भ

हाल ही में, भारत एवं नीदरलैंड ने गुजरात के लोथल में प्रस्तावित राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) के विकास हेतु एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह सहयोग भारत की प्राचीन समुद्री परंपराओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। 

राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) के बारे में 

  • क्या है : बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) की एक प्रमुख सांस्कृतिक-विरासत परियोजना 
  • उद्देश्य : एक विश्व-स्तरीय संग्रहालय एवं सांस्कृतिक केंद्र के माध्यम से भारत की लगभग 4,500 से 5,000 वर्ष पुरानी समुद्री विरासत को संरक्षित व प्रदर्शित करना 
  • स्थान : गुजरात में अहमदाबाद के समीप लोथल
  • नोडल मंत्रालय : बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय 

नोट : वस्तुतः यह परियोजना भारत का पहला ऐसा समग्र राष्ट्रीय संस्थान है जो पूर्णतया समुद्री विरासत को समर्पित है।

प्रमुख विशेषताएँ 

  • इस अत्याधुनिक समुद्री संग्रहालय में प्राचीन नौवहन, जहाज निर्माण, ऐतिहासिक व्यापार मार्गों, नौसेना परंपराओं और तटीय संस्कृतियों से जुड़ी दीर्घाएँ होंगी। 
  • डिज़ाइन, क्यूरेशन एवं संरक्षण के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, विशेष रूप से एम्स्टर्डम स्थित राष्ट्रीय समुद्री संग्रहालय के साथ साझेदारी
  • शोधकर्ताओं और पेशेवरों के लिए समुद्री अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र
  • वैश्विक स्तर के समुद्री मेले, प्रदर्शनियाँ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन का केंद्र
  • छात्रों, स्थानीय समुदायों व वंचित वर्गों के लिए सुलभ एवं समावेशी जन-जागरूकता पहल
  • आधुनिक तकनीकों और इंटरैक्टिव अनुभवों के माध्यम से आगंतुकों के लिए आकर्षक प्रस्तुति

लोथल के बारे में 

  • भौगोलिक स्थिति : यह अहमदाबाद के निकट स्थित है और सिंधु घाटी (हड़प्पा) सभ्यता के व्यापक सांस्कृतिक परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण भाग रहा है।
  • उत्खनन एवं कालखंड
    • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा वर्ष 1957 में उत्खनन।
    • इसका इतिहास लगभग 2400 ईसा पूर्व तक जाता है।
    • यह स्थल विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञात मानव-निर्मित गोदी (Dockyard) के लिए प्रसिद्ध है।

महत्व और विशेषताएँ

  • लोथल का बंदरगाह प्राचीन समुद्री व्यापार नेटवर्क से जुड़ा था, जिसने सिंध, सौराष्ट्र, मेसोपोटामिया, मिस्र और अन्य दूरस्थ क्षेत्रों को जोड़ा।
  • यहाँ उन्नत नगर नियोजन, ज्वार-भाटा नियंत्रण और समुद्री अभियांत्रिकी के स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं। 
  • यह एक ऐसा प्रमुख बंदरगाह नगर था जिसने न केवल वस्तुओं के व्यापार को बढ़ावा दिया, बल्कि संस्कृतियों, विचारों एवं तकनीकों के आदान-प्रदान में भी अहम भूमिका निभाई। 
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