संदर्भ
वस्त्र मंत्रालय द्वारा असम सरकार के सहयोग से राष्ट्रीय वस्त्र मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 2026 का आरंभ 8 जनवरी से असम के गुवाहाटी में हुआ।
सम्मलेन से संबंधित प्रमुख बिंदु
- थीम : दो दिवसीय इस सम्मेलन की थीम ‘भारत का वस्त्र उद्योग: विकास, विरासत एवं नवाचार का संगम’ रही।
- उद्देश्य : इस सम्मलेन का उद्देश्य वस्त्र क्षेत्र में नीति, निवेश, स्थिरता, निर्यात, अवसंरचना विकास व प्रौद्योगिकीय उन्नति पर विचार-विमर्श के लिए एक मंच प्रदान करना है।
- यह सम्मेलन भारत को 2030 तक वैश्विक वस्त्र विनिर्माण हब के रूप में स्थापित करने के सरकार के विजन के साथ संयोजित है।
- इसमें निर्यात को बढ़ावा देने, रोजगार सृजन और समावेशी विकास पर विशेष बल दिया गया है जो ‘विकास भी, विरासत भी’ के आदर्शों के अनुरूप है।
सम्मलेन के सत्र
- अवसंरचना और निवेश
- भारत के वस्त्र निर्यात का विस्तार
- कच्चा माल और रेशे
- टेक्निकल टेक्सटाइल और न्यू-एज फाइबर तथा
- हथकरघा और हस्तशिल्प का संरक्षण व संवर्धन जैसे प्रमुख क्षेत्रों को कवर करने वाले सत्र
- इस सम्मलेन में प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन्स एंड अपैरल (पीएम मित्रा) पार्क, स्थिरता व पर्यावरण अनुपालन, टेक्निकल टेक्सटाइल, नवाचार एवं एकीकृत मूल्य-श्रृंखला विकास जैसी प्रमुख पहलों पर विशेष ध्यान दिया गया।
भारत का वस्त्र उद्योग
- वर्ष 2014 में शुरू की गई ‘मेक इन इंडिया’ पहल ने भारत को वैश्विक वस्त्र निर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- वस्त्र एवं परिधान उद्योग भारत की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान देता है, लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है और पर्याप्त विदेशी मुद्रा अर्जित करता है।
भारत के वस्त्र उद्योग का अवलोकन
- वस्त्र एवं परिधान उद्योग भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 2.3%, औद्योगिक उत्पादन में 13% और निर्यात में 12% का योगदान देता है।
- भारत ने वर्ष 2023-24 में 34.4 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के वस्त्रों का निर्यात किया, जिसमें परिधानों का निर्यात में 42% हिस्सा था। इसके बाद कच्चे माल/अर्ध-निर्मित माल का 34% और तैयार गैर-परिधान वस्तुओं का 30% हिस्सा था।
- यह कृषि के बाद रोजगार सृजन का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत भी है जिसमें 4 करोड़ से अधिक लोग प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत हैं, जिनमें कई महिलाएँ व ग्रामीण आबादी शामिल हैं।
- इस उद्योग की समावेशी प्रकृति के प्रमाण के रूप में इसकी लगभग 80% क्षमता देश भर में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम समूहों में फैली हुई है।
- यह उद्योग प्रतिवर्ष लगभग 22,000 मिलियन वस्त्रों का उत्पादन करता है और अनुमान है कि इसका बाजार आकार वर्तमान 174 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा।
- हाल ही में, वस्त्र मंत्रालय ने अप्रैल से दिसंबर 2024 तक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में हस्तशिल्प सहित वस्त्र एवं परिधान निर्यात में 7% की वृद्धि दर्ज की है।
- विकास योजना के अनुरूप भारतीय वस्त्र बाजार वर्तमान में वैश्विक स्तर पर पांचवें स्थान पर है और सरकार अगले पांच वर्षों में इस वृद्धि को 15-20% की दर तक पहुंचाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।
वस्त्र उद्योग पर 'मेक इन इंडिया' का प्रभाव
- मेक इन इंडिया पहल ने प्रमुख नीतिगत हस्तक्षेपों, उन्नत बुनियादी ढांचे और प्रोत्साहनों के माध्यम से वस्त्र निर्माण एवं निर्यात को गति प्रदान की है।
- केंद्रीय बजट 2024-25 में घरेलू वस्त्र उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा पूर्णतः छूट प्राप्त वस्त्र मशीनरी की सूची में दो अन्य प्रकार की शटल-रहित करघों को शामिल किया गया है।
वस्त्र उद्योग के क्षेत्र में सरकारी प्रयास
वस्त्रों के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना
- उद्देश्य : मानव निर्मित फाइबर और तकनीकी वस्त्रों के उत्पादन को बढ़ाना
- बजट : ₹10,683 करोड़
- प्रोत्साहन : बड़े पैमाने पर कपड़ा निर्माताओं के लिए वित्तीय प्रोत्साहन
पीएम मित्रा (मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल) पार्क
- उद्देश्य : वस्त्र निर्माण के लिए विश्व स्तरीय औद्योगिक अवसंरचना विकसित करना
- मुख्य उद्देश्य : वस्त्र उद्योग की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला के लिए एकीकृत, बड़े पैमाने पर और आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना सुविधा विकसित करना, जिसमें कताई, बुनाई, प्रसंस्करण, वस्त्र निर्माण, प्रसंस्करण और वस्त्र मशीनरी उद्योग शामिल हैं।
- बजट : 2021-22 से 2027-28 की अवधि के लिए ₹4,445 करोड़
- मुख्य लाभ : रसद लागत में कमी, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में वृद्धि और वैश्विक बाजारों में बेहतर प्रतिस्पर्धात्मकता
- वर्तमान स्थिति : गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में कुल 7 पार्क स्थापित किए गए हैं।
संशोधित प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि योजना (ATUFS)
- उद्देश्य : पूंजी निवेश को समर्थन देने के लिए इस लघु एवं मध्यम उद्यम संचालित वस्त्र उद्योग में मानक ऋण-आधारित प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए ऋण प्रवाह को प्रोत्साहित करना
- बजट : ₹17,822 करोड़
- प्रोत्साहन : प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए पूंजीगत सब्सिडी
समर्थ (वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना)
- उद्देश्य : कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सहयोग से वस्त्र उद्योग में कार्यरत श्रमिकों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना
- बजट आवंटन : वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान ₹115 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी, जिसमें से ₹114.99 करोड़ (99.9%) का वितरण किया गया।
- वर्तमान स्थिति : 27 मार्च, 2025 तक समर्थ पोर्टल पर 4.78 लाख से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं। 19 मार्च, 2025 तक कुल 3.82 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षित (सफल) किया जा चुका है और 2.97 लाख लाभार्थियों (77.74%) को रोजगार मिल चुका है।
वस्त्र क्लस्टर विकास योजना (TCDS)
- उद्देश्य : मौजूदा व संभावित कपड़ा इकाइयों/समूहों के लिए एक एकीकृत कार्यक्षेत्र और संपर्क-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना ताकि उन्हें परिचालन एवं वित्तीय रूप से व्यवहार्य बनाया जा सके।
- लाभ : टी.सी.डी.एस. का क्लस्टर विकास मॉडल हस्तक्षेपों के अनुकूलन के लिए महत्वपूर्ण आधार, परिचालन में पैमाने की अर्थव्यवस्थाएँ, विनिर्माण में प्रतिस्पर्धात्मकता, लागत दक्षता, प्रौद्योगिकी और सूचना तक बेहतर पहुँच आदि के लाभ लाएगा।
- बजट : ₹853 करोड़
- वर्तमान स्थिति : 18 मार्च, 2025 तक इस योजना के तहत लगभग 1.22 लाख रोजगार के अवसर सृजित किए गए हैं। वर्ष 2024-25 के दौरान ₹34.48 करोड़ राशि जारी की गई है।
राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM)
- उद्देश्य : देश में तकनीकी वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देना
- लक्ष्य वर्ष : 2020-21 से 2025-26
- बजट : ₹1480 करोड़
- उद्देश्य: यह मिशन तकनीकी वस्त्रों में देश को वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने के लिए (i) अनुसंधान, नवाचार एवं विकास, (ii) संवर्धन व बाजार विकास, (iii) शिक्षा और कौशल विकास तथा (iv) निर्यात संवर्धन पर ध्यान केंद्रित करता है।
- वर्तमान स्थिति: 1 जनवरी, 2025 तक विशेष फाइबर और तकनीकी वस्त्रों की श्रेणी में लगभग ₹509 करोड़ मूल्य की 168 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है।
प्रीलिम्स फैक्ट
- भारत विश्व में वस्त्र एवं परिधान का छठा सबसे बड़ा निर्यातक देश है। भारत के प्रमुख वस्त्र एवं परिधान निर्यात गंतव्य अमेरिका व यूरोपीय संघ हैं।
- जनवरी 2000 से मार्च 2024 तक वस्त्र क्षेत्र को एफ.डी.आई. के रूप में 4,472.79 मिलियन अमेरिकी डॉलर (28,304.10 करोड़ रुपए) प्राप्त हुए।
- भारत में विश्व स्तर पर कपास की खेती का सबसे बड़ा क्षेत्रफल है। प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में भारत 36वें स्थान पर है।
- भारत विश्व में कपास का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। भारत में कपास की सभी चार प्रजातियाँ ‘जी. आर्बोरियम’, ‘जी. हर्बेसियम (एशियाई कपास)’, ‘जी. बारबाडेंस (इजिप्टियन कॉटन)’ और ‘जी. हिरसुटम (अमेरिकी अपलैंड कपास)’ उगाई जाती हैं।
- भारत विश्व में रेशम का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक एवं सबसे बड़ा उपभोक्ता है। भारत ने 38,913 मीट्रिक टन रेशम का उत्पादन किया, जिससे यह चीन के बाद विश्व स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है।
- भारत रेशम की सभी चार व्यावसायिक किस्मों- शहतूत, उष्णकटिबंधीय एवं ओक टसर, मूँगा और एरी का उत्पादन करने में अद्वितीय है।
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