वैज्ञानिकों ने हाल ही में दिल्ली और पश्चिमी घाट से एंट फ्लाई की दो नई तथा अत्यंत दुर्लभ प्रजातियों की पहचान की है। इनके नाम मेटाडॉन घोरपदेई और मेटाडॉन रीमेरी है।
क्या होती हैं एंट फ्लाई
- ये सिरफिडी (Syrphidae) कुल की माइक्रोडॉन्टिनाए (Microdontinae) उपकुल की विशिष्ट कीट प्रजातियाँ हैं।
- इनकी सबसे अनोखी विशेषता मायरमेकोफिली है जिसमें इनके लार्वा चींटियों के घोंसलों के भीतर रहकर उनके अंडों व लार्वा पर निर्भर रहते हैं।
- इस अत्यधिक विशिष्ट और संवेदनशील जीवन-चक्र के कारण ये कीट बहुत दुर्लभ होती हैं तथा सामान्य सर्वेक्षणों में आसानी से सामने नहीं आती हैं।
1. मेटाडॉन घोरपदेई (Metadon ghorpadei)
- वैज्ञानिक नाम: Metadon ghorpadei
- खोज स्थल: नॉर्दर्न रिज फॉरेस्ट, दिल्ली रिज (शहरी एवं मानव-प्रभावित क्षेत्र)
प्रमुख विशेषताएँ:
- माइक्रोडॉन्टिनाए समूह की एंट फ्लाई है जिसका लार्वा चरण पूरी तरह चींटी के घोंसलों पर आधारित होता है।
- वयस्क कीट अत्यंत अल्पदर्शी होते हैं और फूलों पर शायद ही दिखाई देते हैं तथा प्रायः चींटी कॉलोनियों के आसपास ही सक्रिय रहते हैं।
महत्त्व:
- यह खोज प्रमाणित करती है कि शहरी एवं खंडित हरित क्षेत्र भी जैव-विविधता संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत मूल्यवान हैं।
- साथ ही, यह चेतावनी देती है कि यदि शहरी विकास केवल हरित क्षेत्र की मात्रा पर केंद्रित रहा और उसकी गुणवत्ता की उपेक्षा की गई तो विशिष्ट आवासों पर निर्भर प्रजातियाँ तेजी से विलुप्त हो सकती हैं।
2. मेटाडॉन रीमेरी (Metadon reemeri)
- वैज्ञानिक नाम: Metadon reemeri
- खोज स्थल: सिरुवानी पहाड़ियाँ, पश्चिमी घाट, तमिलनाडु
प्रमुख विशेषताएँ:
- माइक्रोडॉन्टिनाए उपकुल की पारंपरिक चींटी-सम्बद्ध जीवन-प्रणाली।
- पश्चिमी घाट जैसे उच्च संरक्षण वाले क्षेत्र में पाए जाने के बावजूद यह कीट समूह अब भी वैज्ञानिक दृष्टि से अपर्याप्त रूप से अध्ययन किया जाता है।
महत्त्व
- यह खोज पश्चिमी घाट की समृद्ध और स्थानिक (एंडेमिक) कीट जैव-विविधता को अधिक सुदृढ़ करती है।
- कम ज्ञात कीट वर्गों के लिए लक्षित क्षेत्रीय सर्वेक्षण व आणविक वंशावली अध्ययन की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से सामने लाती है।
समग्र दृष्टि
- वर्तमान में भारतीय उपमहाद्वीप से माइक्रोडॉन्टिनाए की केवल 27 प्रजातियाँ ही दर्ज की गई हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर इनकी संख्या लगभग 454 है।
- इन नई खोजों से यह स्पष्ट होता है कि शहरी वनों और जैव-विविधता हॉटस्पॉट्स में आवास मानचित्रण, आक्रामक प्रजातियों के नियंत्रण तथा देशी वनस्पति की पुनर्स्थापना जैसे प्रयासों को प्राथमिकता देना आवश्यक है, ताकि ऐसी छिपी हुई और दुर्लभ कीट जैव-विविधता का प्रभावी संरक्षण किया जा सके।