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कृत्रिम ममीकरण पर नया शोध कार्य

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)

संदर्भ

एशियाई वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण अध्ययन प्रकाशित किया है जिसमें पता चला है कि दक्षिण-पूर्व एशिया की कुछ प्राचीन समुदायों ने मृतकों को सुरक्षित रखने के लिए हल्की आग एवं धुएँ का उपयोग किया। यह खोज मानव सभ्यता और प्राचीन संस्कृतियों के धार्मिक व तकनीकी ज्ञान को समझने में मदद करती है।

कृत्रिम ममीकरण (Artificial Mummification) के बारे में

  • ममीकरण का मतलब है मृत शरीर को खराब होने से बचाना और कृत्रिम ममीकरण में प्राकृतिक प्रक्रियाओं के बजाय मानव-निर्मित तकनीक, जैसे- हीटिंग (Heating), स्मोकिंग (Smoking), बाइंडिंग (Binding) आदि का उपयोग किया जाता है।
  • इसका उद्देश्य केवल शव संरक्षित करना नहीं, बल्कि उसे समुदाय एवं धार्मिक रीति-रिवाजों (Rituals) से जोड़ना होता है।

ममीकरण पर हालिया शोध के बारे में

  • वैज्ञानिकों ने 11 साइट्स (उत्खनन स्थल) से प्री-नियोलिथिक (Pre-Neolithic) कब्रों का अध्ययन किया।
  • अस्थियों का परीक्षण X-ray Diffraction और Fourier-transform Infrared Spectroscopy (FTIR) से किया गया।
  • रेडियोकार्बन डेटिंग से समय का निर्धारण किया गया।
  • अध्ययन ने यह भी दिखाया कि मृतकों को केवल दफनाने से पहले बांधकर धुएँ एवं हल्की आग के ऊपर लंबा समय रखा जाता था।

इसे भी जानिए!

एक्स-रे विवर्तन (XRD) क्रिस्टल जालक में परमाणुओं द्वारा एक्स-रे के प्रकीर्णन का विश्लेषण करके क्रिस्टलीय संरचना एवं प्रावस्था की पहचान करता है जबकि फूरियर-रूपांतरित अवरक्त स्पेक्ट्रोस्कोपी (FTIR) विश्लेषण कर कार्यात्मक समूहों और आणविक संरचना की पहचान करता है कि कोई नमूना अवरक्त प्रकाश को कैसे अवशोषित करता है तथा विशिष्ट आवृत्तियों पर कंपन कैसे करता है। XRD का उपयोग क्रिस्टल संरचना और संघटन के लिए किया जाता है जबकि FTIR का उपयोग रासायनिक बंधन एवं कार्यात्मक समूह लक्षण वर्णन के लिए किया जाता है।

शोध के मुख्य बिंदु

  • लगभग 84% अस्थियों में उच्च क्रिस्टलिनिटी (Crystallinity) पाई गई।
  • एक-तिहाई अस्थियों में 525°C या उससे अधिक तापमान के निशान थे।
  • आग के निशान अधिकतर माथे, घुटनों एवं कोहनियों पर थे।
  • अलग-अलग अस्थियों में अलग-अलग हीटिंग स्तर, जिससे मिट्टी के प्रभाव की संभावना कम रहीं।
  • शवों को तंग मुद्रा (Extreme Crouching) में रखा गया, जिससे मांसपेशियों की जगह न बचे।
  • यह प्रथा कम-से-कम 14,000 साल पहले शुरू हुई जो कि पहले ज्ञात ममीकरण (Chinchorro ~7,000 साल) से 5,000 साल पुरानी है।

महत्व

  • यह शोध दिखाता है कि प्राचीन समुदायों में मृतकों के प्रति गहरी चिंता एवं आध्यात्मिक विश्वास थे।
  • यह संकेत देता है कि पहले के लोग प्रतीकात्मक सोच, मजबूत सामाजिक संबंध व रीति-रिवाज विकसित कर चुके थे।
  • मृतकों को संरक्षित करना न केवल तकनीकी कौशल था, बल्कि यह सामाजिक एवं धार्मिक जीवन का हिस्सा था।
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