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निरंतर (NIRANTAR) प्लेटफार्म

संदर्भ 

  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) द्वारा प्रस्तावित निरंतर (नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड एप्लीकेशन ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज टू ट्रांसफॉर्म, अडैप्ट एंड बिल्ड रेजिलिएंस) एक रणनीतिक संस्थागत मंच है। यह नवाचार भारत के पर्यावरणीय अनुसंधान और नीति कार्यान्वयन के मध्य एक सुदृढ़ सेतु के रूप में कार्य करेगा, जिसका प्राथमिक लक्ष्य संस्थागत दक्षता और प्रभावशीलता को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाना है। 

निरंतर प्लेटफॉर्म के रणनीतिक उद्देश्य 

इस मंच की स्थापना निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्यों की पूर्ति के लिए की गई है :

  • संस्थागत तालमेल : विभिन्न वानिकी और पर्यावरणीय अनुसंधान निकायों के मध्य बिखराव को समाप्त कर एक समन्वित पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना। 
  • संसाधनों का इष्टतम उपयोग : उपलब्ध वैज्ञानिक जनशक्ति, तकनीकी अवसंरचना और डेटा का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना। 
  • तथ्य-आधारित शासन : जैव विविधता संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में नीतियों को ठोस वैज्ञानिक प्रमाणों और डेटा पर आधारित करना।
  • जलवायु लचीलापन : नवीन पर्यावरणीय चुनौतियों और जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों के विरुद्ध भारत की प्रतिक्रियात्मक क्षमता को सशक्त बनाना। 
  • अनुप्रयुक्त अनुसंधान (Applied Research) : प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन हेतु अनुसंधान और नवाचार के व्यावहारिक अनुप्रयोग को बढ़ावा देना। 

प्लेटफॉर्म की प्रमुख विशेषताएं और कार्यप्रणाली 

  • एकीकृत नेटवर्क मॉडल : निरंतर मंत्रालय के अधीन संस्थानों को एक एकीकृत ग्रिड के रूप में जोड़ता है, जिससे वे पृथक इकाइयों के बजाय एक साझा मिशन के तहत कार्य कर सकें। 
  • मौजूदा ढांचे का सुदृढ़ीकरण : यह किसी नए समानांतर संगठन का निर्माण नहीं करता, बल्कि वर्तमान निगरानी और अनुसंधान निकायों के बीच लिंकेज को सुधारकर मौजूदा तंत्र को अधिक सक्रिय बनाता है।  
  • विशेषज्ञों का कुशल प्रबंधन : अतिरिक्त कार्यबल के बिना, यह मंच विशेषज्ञों और तकनीकी मानव संसाधन की सही स्थान पर सटीक तैनाती (Precision Deployment) सुनिश्चित करता है। 
  • साझा अवसंरचना (Infrastructure Sharing) : प्रयोगशालाओं, डेटाबेस और फील्ड स्टेशनों के साझा उपयोग को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे लागत में कमी और उत्पादकता में वृद्धि होती है। 
  • संरचित संवाद प्रणाली : संस्थानों के बीच संयुक्त योजना और सहयोगात्मक निष्पादन हेतु एक औपचारिक संचार तंत्र (Communication Channels) की स्थापना करना। 
  • गैप एनालिसिस (Gap Analysis) : चल रही परियोजनाओं की निरंतर समीक्षा कर अनुसंधान और कार्यान्वयन के बीच मौजूद विसंगतियों की पहचान करना और उन्हें तत्काल दूर करना।  
  • केंद्रीकृत डेटा इकोसिस्टम : संपूर्ण पर्यावरणीय डेटा का एक साझा डिजिटल मंच पर एकत्रीकरण करना, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति आए।
  • व्यावहारिक रणनीति पर ध्यान : वैज्ञानिक शोध को केवल शोध पत्रों तक सीमित न रखकर उन्हें धरातल पर संरक्षण और अनुकूलन की कार्ययोजनाओं में परिवर्तित करना। 
  • त्वरित अनुकूलन क्षमता : राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जैव विविधता की हानि या नए प्रदूषण संकटों जैसी आकस्मिक चुनौतियों के प्रति यह तंत्र अत्यधिक लचीला और तीव्र है।
  • सशक्त वैज्ञानिक बैकअप : नीति निर्माताओं को एक ऐसा आधार प्रदान करना जहाँ हर निर्णय विश्वसनीय शोध परिणामों और वास्तविक समय के डेटा द्वारा समर्थित हो। 

निष्कर्ष  

  • निरंतर प्लेटफॉर्म भारतीय पर्यावरणीय शासन (Environmental Governance) की दिशा में एक पैराडाइम शिफ्ट (Paradigm Shift) है। यह न केवल संसाधनों के अपव्यय को रोकता है, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान को सीधे राष्ट्रीय नीतिगत लाभ और जन-कल्याण से जोड़ने की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है। 
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