संदर्भ
- हाल ही में नासा (NASA) के मावेन (MAVEN) अंतरिक्ष यान ने मंगल ग्रह पर एक ऐसी अनूठी वैज्ञानिक घटना को रिकॉर्ड किया है, जिसे लाल ग्रह पर पहले कभी नहीं देखा गया था। इस परिघटना को ज्वान-वुल्फ प्रभाव (Zwan-Wolf effect) के नाम से जाना जाता है।
ज्वान-वुल्फ प्रभाव (Zwan-Wolf effect) क्या है ?
- यह एक विशेष ब्रह्मांडीय प्रक्रिया है जिसमें अंतरिक्ष में तैरते आवेशित कणों (charged particles) को चुंबकीय संरचनाओं यानी फ्लक्स ट्यूबों (flux tubes) के सहारे संकुचित (Squeeze) कर दिया जाता है।
- इस प्रभाव की खोज वर्ष 1976 में की गई थी। अब तक के वैज्ञानिक इतिहास में इसे केवल ग्रहों के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetospheres) में ही देखा गया था, लेकिन किसी ग्रह के वायुमंडल (Atmosphere) में इसकी मौजूदगी का यह पहला प्रमाण है।
यह प्रक्रिया कैसे काम करती है ?
- सौर पवन का प्रवाह : सूर्य से लगातार आवेशित कणों की एक तेज धारा बाहर की ओर बहती है, जिसे सौर पवन (Solar wind) कहा जाता है।
- चुंबकीय सीमा पर संकुचन : जब यह सौर पवन किसी ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र के निकट पहुंचती है, तो उसकी बाहरी सीमाओं पर जाकर सिकुड़ने या संकुचित होने लगती है।
- दबाव प्रवणता (Pressure Gradient) : इस संकुचन के कारण ग्रह की बाहरी सीमाओं पर दबाव में एक बड़ा अंतर पैदा होता है। यह दबाव प्रवणता आवेशित कणों को मुख्य धारा से दूर, चुंबकीय क्षेत्र की रेखाओं के साथ आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर देती है।
- कम घनत्व का क्षेत्र : इस विस्थापन के चलते सौर पवन की मुख्य धारा के ठीक पास एक ऐसा इलाका बन जाता है, जहाँ आवेशित कणों का घनत्व बेहद कम हो जाता है। इसी स्थिति को ज्वान-वुल्फ प्रभाव कहते हैं।
पृथ्वी के लिए महत्व
- पृथ्वी पर यही रक्षा-तंत्र सौर पवन के अधिकांश हिस्से को मोड़कर हमें सूर्य की हानिकारक और निरंतर होने वाली ब्रह्मांडीय बमबारी से सुरक्षित रखता है।
मंगल ग्रह के संदर्भ में यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है ?
पृथ्वी के विपरीत, मंगल ग्रह के पास अपना कोई वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र (global magnetic field) नहीं है। इस कमी के कारण सौर पवन और अंतरिक्ष के मौसम का मंगल पर सीधा और अलग प्रभाव पड़ता है। इस पृष्ठभूमि में नई खोज के मायने बेहद अहम हैं:
- आयनमंडल में मौजूदगी : मावेन ने इस प्रभाव को मंगल ग्रह के आयनमंडल (ionosphere) में दर्ज किया है, जो सतह से 200 किलोमीटर से भी कम ऊंचाई पर स्थित वायुमंडल की गहरी परत है। यह क्षेत्र विद्युत आवेशित कणों से भरा हुआ है।
- कणों का पुनर्वितरण : प्राप्त आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ये आवेशित कण संकुचित होकर मंगल के वायुमंडल के चारों ओर फैल रहे थे।
- वायुमंडलीय गतिशीलता की समझ : यह खोज प्रमाणित करती है कि खुद का वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र न होने के बाद भी मंगल ग्रह का वायुमंडल सौर पवन के साथ वैसी ही जटिल अंतःक्रियाएं (interactions) करता है जैसी पृथ्वी पर होती हैं। इससे लाल ग्रह के वायुमंडलीय व्यवहार को समझने में वैज्ञानिकों को नई अंतर्दृष्टि मिलेगी।
मावेन (MAVEN) अंतरिक्ष यान के बारे में
- मार्स एटमॉस्फियर एंड वोलेटाइल इवोल्यूशन (MAVEN) नासा के मार्स एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम का एक प्रमुख हिस्सा है। यह मंगल ग्रह के ऊपरी वायुमंडल का विशेष रूप से सर्वेक्षण करने के लिए डिज़ाइन किया गया दुनिया का पहला अंतरिक्ष मिशन है।
- इस मिशन का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि समय के साथ अंतरिक्ष में वायुमंडलीय गैसों के लगातार लीक (नष्ट) होने से मंगल ग्रह की जलवायु किस प्रकार परिवर्तित हुई।
- इसे नवंबर 2013 में पृथ्वी से रवाना किया गया था और यह सितंबर 2014 में मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुँच गया था।
वैज्ञानिक उपकरण (थ्री-पैकेज सिस्टम)
- प्रथम पैकेज सौर पवन और मंगल ग्रह के आयनमंडल पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करता है। (चूंकि मंगल ग्रह के पास सुरक्षात्मक चुंबकीय क्षेत्र नहीं है, इसलिए सौर पवन की अंतःक्रिया के कारण इसका वायुमंडल धीरे-धीरे अंतरिक्ष में विलीन हो रहा है।)
- द्वितीय पैकेज (अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्रोमीटर) ऊपरी वायुमंडल की परतों का सुदूर अध्ययन करता है।
- तृतीय पैकेज (मास स्पेक्ट्रोमीटर) ऊपरी वायुमंडल में मौजूद गैसों और तत्वों के रासायनिक संगठन (Composition) की जाँच करता है।