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निसार : अंतरिक्ष से विज्ञान, धरती पर प्रभाव

(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, सामान्य विज्ञान)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास; सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष)

भूमिका

पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) के क्षेत्र में निसार (NISAR: NASA–ISRO Synthetic Aperture Radar) मिशन एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह मिशन भारत और अमेरिका के बीच वैज्ञानिक सहयोग का प्रतीक होने के साथ-साथ आपदा प्रबंधन, जलवायु अध्ययन एवं संसाधन नियोजन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होने वाला है। निसार यह दर्शाता है कि किस प्रकार अंतरिक्ष आधारित विज्ञान प्रत्यक्ष रूप से धरती पर मानव जीवन और नीति-निर्माण को प्रभावित कर सकता है।

निसार मिशन के बार में 

परिचय

  • निसार, इसरो (ISRO) एवं नासा (NASA) का संयुक्त उपग्रह मिशन है जिसे विशेष रूप से पृथ्वी की सतह में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों की निरंतर निगरानी के लिए डिज़ाइन किया गया है। 
  • यह दुनिया का पहला ऐसा मिशन है जिसमें L-बैंड और S-बैंड सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • सभी मौसम की और दिन-रात में पृथ्वी अवलोकन की क्षमता
  • मिलीमीटर स्तर तक सतह परिवर्तन का पता लगाने की क्षमता
  • पृथ्वी के लगभग पूरे भू-भाग की नियमित मैपिंग

वैज्ञानिक और तकनीकी महत्व

निसार मिशन पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में नई समझ विकसित करेगा। SAR तकनीक बादलों, वर्षा और अंधकार से अप्रभावित रहती है जिससे निरंतर व सटीक डेटा उपलब्ध होता है।

मुख्य वैज्ञानिक योगदान

  • भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियों की निगरानी
  • हिमनदों के पिघलाव और ध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फ की मोटाई का आकलन
  • भूमि धंसाव (Land Subsidence) और भूस्खलन का अध्ययन
  • समुद्र-स्तर वृद्धि और तटीय क्षरण की निगरानी

आपदा प्रबंधन में भूमिका

  • निसार का सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में देखने को मिलेगा। समय पर और सटीक डेटा उपलब्ध होने से पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ अधिक प्रभावी बन सकेंगी। 
  • यह भूकंप संभावित क्षेत्रों की पहचान करने, बाढ़ और चक्रवात प्रभावित इलाकों का आकलन करने, भूस्खलन संभावित ढलानों की निगरानी करने और आपदा के बाद क्षति का त्वरित मूल्यांकन करने में सक्षम होगा। 

कृषि, जल संसाधन एवं पर्यावरण पर प्रभाव

  • निसार से प्राप्त डेटा कृषि और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में भी अत्यंत उपयोगी होगा। फसल चक्र मृदा की नमी और सिंचाई पैटर्न की निगरानी से कृषि उत्पादकता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
  • यह जल संसाधनों की योजना एवं प्रबंधन, वनों की कटाई और भूमि उपयोग परिवर्तन का अध्ययन करने तथा जलवायु परिवर्तन से जुड़े दीर्घकालिक रुझानों का विश्लेषण करने में प्रभावी होगा।

रणनीतिक और कूटनीतिक महत्व

  • निसार मिशन भारत की अंतरिक्ष कूटनीति को नई मजबूती प्रदान करता है। यह मिशन वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए ओपन डेटा उपलब्ध कराएगा, जिससे भारत की सॉफ्ट पावर में वृद्धि होगी। 
  • इससे ISRO की तकनीकी विश्वसनीयता में वृद्धि, वैश्विक जलवायु और आपदा अनुसंधान में भारत की भूमिका में वृद्धि तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग का सुदृढ़ीकरण होगा। 

चुनौतियाँ 

हालाँकि, निसार एक अत्यंत महत्वाकांक्षी मिशन है, फिर भी विशाल डेटा प्रबंधन, विश्लेषण क्षमता और नीति-निर्माण में इसके प्रभावी उपयोग जैसी चुनौतियाँ बनी रहेंगी। इसके लिए अंतर-विभागीय समन्वय और संस्थागत क्षमताओं का विकास आवश्यक है।

निष्कर्ष

निसार मिशन इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि किस प्रकार अंतरिक्ष से प्राप्त वैज्ञानिक जानकारी धरती पर जीवन की गुणवत्ता सुधारने में सहायक हो सकती है। यह मिशन न केवल भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को नई ऊँचाई देगा, बल्कि आपदा प्रबंधन, जलवायु अनुकूलन और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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