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पोलियो वायरस

हाल ही में मेघालय में दो साल के बच्चे में वैक्सीन से होने वाले पोलियो के मामले की पुष्टि हुई है।

पोलियो के बारे में 

  • क्या है : पोलियो वायरस जनित एक अत्यधिक संक्रामक रोग है।
    • यह तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और कुछ ही घंटों में पूर्ण पक्षाघात का कारण बन सकता है।
    • प्रत्येक 200 संक्रमणों में से एक में अपरिवर्तनीय पक्षाघात (आमतौर पर पैरों में) होता है।
  • संक्रमण : पोलियो वायरस गंदे पानी या खाने की वजह से फैलता है। इसके अलावा, यह संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी फैलता है।
    • मनुष्य पोलियो वायरस के लिए एकमात्र प्राकृतिक मेजबान हैं।
  • संवेदनशील वर्ग : पोलियो मुख्यतः 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। 
    • हालाँकि, किसी भी उम्र का कोई भी व्यक्ति जिसका टीकाकरण नहीं हुआ है, उसे यह बीमारी हो सकती है।
  • उपचार : पोलियो का कोई इलाज नहीं है। हालांकि इसे टीका के माध्यम से रोका जा सकता है।
  • पोलियो का टीका : पहला टीका जोनास साल्क द्वारा विकसित किया गया था। पोलियो दो टीके उपलब्ध हैं-
    • निष्क्रिय पोलियो टीका (IPV) : इसे जोनास साल्क विकसित इस टीके को 12 अप्रैल 1955 को पहली बार मान्यता प्रदान की गई थी। 
    • मौखिक पोलियो टीका (OPV) : इसे अल्बर्ट साबिन द्वारा विकसित किया गया था।  इसमें जीवित एवं कमजोर रूप में वायरस का उपयोग किया जाता है और इसे बूंदों के रूप में या चीनी क्यूब पर मौखिक रूप से दिया जा सकता था।

वाइल्ड पोलियो वायरस

  • यह वायरस प्रयोगशाला हेरफेर या टीकाकरण का परिणाम नहीं हैं, बल्कि प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला वायरस है, जो लोगो को संक्रमित करता है।
  • पोलियो उन्मूलन का प्रयास वाइल्ड पोलियोवायरस को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित करता है। 
    • ये प्रयास बीमारी को फिर से उभरने और आबादी को प्रभावित करने से रोकते हैं।

वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियो वायरस

  • यह पोलियो वैक्सीन में शामिल कमज़ोर वायरस के उत्परिवर्तित के कारण फैलता है। 
  • यह दुर्लभ मामलों में कमज़ोर प्रतिरक्षा वाली आबादी में उत्परिवर्तित होता है। 
    • प्रकार : 
    • परिसंचारी वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियोवायरस :  यह तब होता है जब OPV से कमज़ोर वायरस कम टीकाकरण कवरेज वाले समुदायों में फैलता है। यह लंबे समय तक लोगों के बीच प्रसारित हो सकता है और संभावित रूप से पोलियो के प्रकोप का कारण बन सकता है।
    • निष्क्रिय वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियोवायरस (iVDPV) : यह प्रकार अति दुर्लभ है और ऐसे व्यक्तियों में ही होता है जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली किसी किसी विशिष्ट स्थिति या रोग के कारण प्रभावित है।
  • वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियोवायरस से जुड़े जोखिमों के मद्देनज़र, कई देशों ने निष्क्रिय पोलियो वैक्सीन (IPV) का उपयोग करना शुरू कर दिया है, जिसमें वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियो का जोखिम नहीं होता है।
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