New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 5th July 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 20th July 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 5th July 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 20th July 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM

सीबीएसई की नई तीन-भाषा नीति

संदर्भ

  • केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अपने नवीनतम परिपत्र में स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक सत्र 2027-28 से कक्षा 10 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए तीसरी भाषा (आर-3) बोर्ड परीक्षा का हिस्सा नहीं होगी। इसके बावजूद माध्यमिक विद्यालय परीक्षा उत्तीर्ण प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को कक्षा 10 में आयोजित विद्यालय-आधारित आर-3 (तीसरी भाषा) मूल्यांकन में सफल होना अनिवार्य होगा। 

आंतरिक मूल्यांकन में असफल होने पर होगा पुनर्मूल्यांकन 

  • सीबीएसई के 10 जुलाई को जारी परिपत्र के अनुसार, यदि कोई विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा वाले वर्ष में इस आंतरिक मूल्यांकन में सफल नहीं हो पाता है, तो विद्यालय अंतिम परीक्षा परिणाम घोषित होने से पहले उसका पुनर्मूल्यांकन कराएगा, ताकि वह आवश्यक योग्यता प्राप्त कर सके।

कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रावधान

  • बोर्ड ने कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए भी विशेष व्यवस्था की है। यदि कोई विद्यार्थी विद्यालय-आधारित आर-3 मूल्यांकन में उत्तीर्ण नहीं हो पाता, तो भी उसे शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए कक्षा 10 में पदोन्नत कर दिया जाएगा। हालांकि, कक्षा 10 में अध्ययन के दौरान उसे कक्षा 9 की लंबित आर-3 मूल्यांकन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी करनी होगी। 

तीन-भाषा सूत्र का विस्तार 

  • यह परिपत्र 29 जून को जारी सीबीएसई के पूर्व निर्देशों के क्रम में जारी किया गया है। उन निर्देशों के अनुसार कक्षा 6 से तीन-भाषा सूत्र लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक विद्यार्थी को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा। इनमें से दो भाषाओं का भारतीय होना अनिवार्य है।

विदेशी भाषा का विकल्प रहेगा जारी 

  • कक्षा 7, 8 और 9 के वे विद्यार्थी, जिन्होंने पहले ही अंग्रेज़ी के अतिरिक्त किसी विदेशी भाषा का चयन किया है, वे उस विदेशी भाषा का अध्ययन जारी रख सकेंगे। इसके साथ ही उन्हें भारत की एक तीसरी भाषा का अध्ययन भी करना होगा।  

कक्षा 9 में तीसरी भाषा अब अनिवार्य 

  • पूर्व में कक्षा 9 के विद्यार्थियों के पास तीसरी भाषा का अध्ययन छोड़ने का विकल्प उपलब्ध था। किंतु 29 जून और 10 जुलाई को जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 तथा 2027-28 से कक्षा 10 में तीसरी भाषा का अध्ययन अनिवार्य कर दिया गया है। 
  • हालांकि, यह व्यवस्था वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अध्ययनरत कक्षा 10 के विद्यार्थियों पर लागू नहीं होगी। 

तीन-भाषा नीति पर कानूनी चुनौती 

याचिकाकर्ताओं की प्रमुख मांग:

  • तीन-भाषा नीति से संबंधित सीबीएसई के परिपत्रों को न्यायालय में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि सीबीएसई 9 अप्रैल की अपनी पूर्व स्थिति को पुनः लागू करे, जिसके अनुसार कक्षा 9 में तीसरी भाषा को अनिवार्य बनाने का निर्णय शैक्षणिक सत्र 2029-30 तक स्थगित कर दिया गया था। 

शिक्षा मंत्रालय ने रखा अपना पक्ष: 

  • 13 जुलाई को न्यायालय में दाखिल नौ पृष्ठों के प्रतिशपथ-पत्र (काउंटर एफिडेविट), जिसकी प्रति द हिंदू को प्राप्त हुई है, में शिक्षा मंत्रालय ने इस नीति का समर्थन किया है। उच्चतम न्यायालय द्वारा 27 मई 2026 को जारी नोटिस के बाद, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अवर सचिव सुभाष चंद ने केंद्र सरकार की ओर से यह जवाब प्रस्तुत किया। 

केंद्र सरकार का तर्क 

  • केंद्र सरकार ने अपने प्रतिशपथ-पत्र में कहा है कि भारतीय संविधान की समवर्ती सूची में शिक्षा का विषय शामिल है। इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के प्रावधानों को लागू करने की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों की समान रूप से साझा जिम्मेदारी है।

सरकार के अनुसार तीन-भाषा सूत्र का उद्देश्य 

  • सरकार का कहना है कि तीन-भाषा सूत्र का कार्यान्वयन व्यापक जनहित से जुड़ा है। इसके माध्यम से बहुभाषिकता को बढ़ावा देना, भारतीय भाषाओं का संरक्षण, विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक (बौद्धिक) विकास को प्रोत्साहित करना तथा राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विविधता जैसे संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करना प्रमुख उद्देश्य हैं।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के बारे में  

  • केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने वर्ष 1929 से अब तक उल्लेखनीय विकास और विस्तार किया है। स्थापना के समय इसका नाम बोर्ड ऑफ हाई स्कूल एंड इंटरमीडिएट एजुकेशन, राजपूताना था। वर्ष 1952 में इसका वर्तमान नाम केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) रखा गया। इसके पश्चात 1962 में बोर्ड का पुनर्गठन किया गया।

सीबीएसई के प्रमुख कार्यक्षेत्र:

  • शिक्षण-अधिगम पद्धतियों में नवाचार को बढ़ावा देना तथा विद्यार्थी-केंद्रित एवं विद्यार्थी-अनुकूल शिक्षण मॉडल विकसित करना।
  • परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रणाली में सुधार लाना, ताकि मूल्यांकन अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समग्र बन सके।
  • कौशल-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करना तथा रोजगारोन्मुखी एवं रोजगार से जुड़े पाठ्यक्रमों को शामिल करना।
  • शिक्षकों एवं प्रशासकों के शैक्षणिक कौशल का निरंतर उन्नयन करना, जिसके लिए सेवाकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं तथा अन्य व्यावसायिक विकास गतिविधियों का नियमित आयोजन करना।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR