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पी.पी.पी. मॉडल मेडिकल कॉलेज

संदर्भ

हाल ही में, भारत के स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे में बदलाव लाते हुए मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर आधारित देश के पहले मेडिकल कॉलेजों की नींव रखी गई है। यह पहल न केवल चिकित्सा शिक्षा को सुलभ बनाएगी, बल्कि दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार करेगी। 

पहल के बारे में

  • इस योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश के चार जिलों धार, बेतूल, कटनी एवं पन्ना में पी.पी.पी. मॉडल के तहत मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। 
  • ये कॉलेज मौजूदा जिला अस्पतालों से संबद्ध होंगे, जिससे चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य अवसंरचना एवं सेवा वितरण को एकीकृत रूप से मजबूत किया जा सके। 
  • इस पहल का प्रमुख उद्देश्य आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों में डॉक्टर्स की कमी को दूर करना है। 

पी.पी.पी. मॉडल के बारे में 

  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership: PPP) एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें सरकार एवं निजी क्षेत्र मिलकर सार्वजनिक अवसंरचना या सेवाओं का विकास व संचालन करते हैं। 
  • इस मॉडल में निजी भागीदार निर्माण, वित्तपोषण, प्रबंधन या संचालन में निवेश करता है जबकि सरकार नीति समर्थन, भूमि या अन्य संसाधन उपलब्ध कराती है। 
  • इस प्रणाली के अंतर्गत जोखिम और जिम्मेदारियों का स्पष्ट बँटवारा किया जाता है तथा भुगतान एवं रियायतें प्राय: प्रदर्शन मानकों से जुड़ी होती हैं। 

पी.पी.पी. मॉडल के प्रमुख प्रकार 

  • बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT)/डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (DBFOT): इस व्यवस्था में निजी संस्था परियोजना का डिजाइन तैयार करती है, निर्माण एवं वित्तपोषण करती है तथा एक निर्धारित अवधि तक उसका संचालन करने के बाद परिसंपत्ति को सरकार को सौंप देती है।
  • संचालन एवं रखरखाव (O&M): इसमें निजी कंपनी सीमित संविदा अवधि के लिए किसी सार्वजनिक संपत्ति के प्रबंधन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी निभाती है।
  • लीज-डेवलप-ऑपरेट (LDO) मॉडल: इस मॉडल में मौजूदा सार्वजनिक परिसंपत्तियों को रियायत अवधि के दौरान विकास एवं संचालन के लिए निजी संस्थाओं को लीज (पट्टे) पर दिया जाता है।

पी.पी.पी. परियोजनाओं के लिए सरकारी प्रोत्साहन

सरकार पी.पी.पी. परियोजनाओं को आकर्षक बनाने के लिए कई वित्तीय एवं नीतिगत समर्थन प्रदान करती है:

  • व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF): यदि कोई सामाजिक रूप से जरूरी परियोजना व्यावसायिक रूप से लाभप्रद नहीं है तो सरकार परियोजना लागत का 40% तक पूँजी अनुदान देती है।
  • IIPDF फंड: यह कोष परियोजनाओं की व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने और उनकी संरचना (Structuring) के लिए आर्थिक मदद देता है।
  • IIFCL ऋण: लंबी अवधि वाली बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए कम ब्याज दरों पर ऋण सहायता प्रदान की जाती है। 
  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश: इस क्षेत्र में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए स्वचालित मार्ग (Automatic Route) के जरिए 100% निवेश की अनुमति है। 
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