हाल ही में, भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) और उसके जर्मन समकक्ष डी.वी.जी.डब्ल्यू. ने भारत की प्राकृतिक गैस अवसंरचना में हाइड्रोजन के एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक सहयोगात्मक ढांचा स्थापित करने संबंधी समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
प्रमुख बिंदु
- इस समझौते के तहत रिसाव की पहचान, गंध प्रबंधन सहित सुरक्षा से जुड़ी श्रेष्ठ पद्धतियों पर ज्ञान के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही, हाइड्रोजन-तैयार प्रमाणन, उपयुक्त घटकों एवं प्रक्रियाओं से संबंधित सहायक डेटाबेस की उपलब्धता, तकनीकी दौरों का आयोजन तथा गुमनाम डेटा साझा करने की व्यवस्था भी की जाएगी।
- इस समझौते का उद्देश्य साक्ष्य-आधारित विनियमन व मानकीकरण को समर्थन देना है जिसकी शुरुआत हाइड्रोजन मिश्रण से होगी और आगे चलकर वैधानिक प्रावधानों के अधीन पूर्णतः 100% हाइड्रोजन आधारित अनुप्रयोगों तक विस्तार किया जाएगा।
पी.एन.जी.आर.बी. के बारे में
- पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) का गठन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड अधिनियम, 2006 के माध्यम से किया गया था।
- अधिनियम के प्रमुख प्रावधान
- उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना
- पेट्रोलियम एवं पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस से संबंधित कंपनियों की विनिर्दिष्ट गतिविधियों की संलिप्तता व प्रतिस्पर्धी बाज़ार को बढ़ावा देना
- आनुषंगिक मामलों के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड की स्थापना का प्रावधान
- नियामक बोर्ड को शोधन, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण, विपणन और पेट्रोलियम की बिक्री, पेट्रोलियम उत्पादों एवं प्राकृतिक गैस, कच्चे तेल व प्राकृतिक गैस के उत्पादन को छोड़कर देश के सभी भागों में पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पाद तथा प्राकृतिक गैस की निर्बाध के साथ-साथ पर्याप्त आपूर्ति विनियमित व सुनिश्चित करने का अधिदेश