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राजस्थान धर्म परिवर्तन प्रतिषेध विधेयक

(प्रारंभिक परीक्षा : राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, भारतीय राज्यतंत्र और शासन- संविधान, लोकनीति, अधिकारों संबंधी मुद्दे)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2 : संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ, विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र व संस्थान)

संदर्भ 

हाल ही में, राजस्थान विधानसभा में चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक, 2025 (Rajasthan Prohibition of Unlawful Conversion of Religion Bill) प्रस्तुत किया। 

राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक के बारे में 

  • उद्देश्य : किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा धोखाधड़ी, बलपूर्वक या अनुचित प्रभाव के माध्यम से किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन करने पर अंकुश लगाना 
  • आवश्यकता : हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ धोखाधड़ी, जबरदस्ती, बलपूर्वक या प्रलोभन के माध्यम से लोगों को अवैध रूप से दूसरे धर्म में परिवर्तित कराया गया है।
    • चूंकि राजस्थान में आदिवासी समुदायों का अवैध तरीके से धर्मांतरण कराया जा रहा है। ऐसे में यह विधेयक संवेदनशील लोगों को कपटपूर्वक धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण होगा।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान 

बलपूर्वक, धोखाधड़ी, जबरदस्ती एवं प्रलोभन द्वारा धर्मांतरण  

विधेयक के प्रावधानों के अनुसार कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को गलAत बयानी, बलपूर्वक, अनुचित प्रभाव, जबरदस्ती, प्रलोभन या धोखाधड़ी के अन्य किसी भी माध्यम से सीधे या अन्यथा, किसी भी धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित नहीं करेगा।  

FIR दर्ज कराने संबंधी प्रावधान 

  • यह विधेयक मुख्य रूप से रक्त संबंधियों को FIR दर्ज करने का अधिकार देता है। इस संदर्भ में कोई भी पीड़ित व्यक्ति, उसके माता-पिता, भाई, बहन या कोई अन्य व्यक्ति जो रक्त, विवाह या गोद लेने के माध्यम से उसका नातेदार है, ऐसे धर्मांतरण के विरुद्ध FIR दर्ज करा सकता है। 

विवाह का शून्य घोषित किया जाना 

यदि कोई व्यक्ति अवैध धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से विवाह करता है तो परिवार न्यायालय (Family Court) को ऐसे विवाह को अमान्य (शून्य) घोषित करने का अधिकार होगा।

अपराधों का गैर-जमानती और संज्ञेय होना

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अंतर्गत सभी अपराध संज्ञेय एवं गैर-जमानती होंगे तथा सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय होंगे।

धर्मांतरण से पूर्व घोषणा 

जो व्यक्ति अपना धर्म परिवर्तन करना चाहता है, उसे जिला मजिस्ट्रेट अथवा विशेष रूप से प्राधिकृत अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को कम-से-कम 60 दिन पूर्व यह घोषणा करनी होगी कि वह अपनी मर्जी से तथा अपनी स्वतंत्र सहमति से तथा बिना किसी बल, दबाव, अनुचित प्रभाव अथवा प्रलोभन के अपना धर्म परिवर्तन करना चाहता है।

उल्लंघन की स्थिति में सजा 

  • इस विधेयक के प्रावधानों के अनुसार कानून का उल्लंघन करने वालों को 1-5 वर्ष तक कारावास की सजा हो सकती है और न्यूनतम 15,000 रुपए का जुर्माना हो सकता है।
  • नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित व्यक्ति के धर्म परिवर्तन के मामले में,सजा 2-10 वर्ष होगी और जुर्माना 25,000 रुपए होगा। 
  • सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामले में कारावास 3-10 वर्ष के बीच होगा और न्यूनतम जुर्माना 50,000 रुपए होगा। 
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