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रामागुंडम फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट

चर्चा में क्यों

हाल ही में, राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (NTPC) ने रामागुंडम (तेलंगाना) फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट के अंतिम भाग की 20 मेगावाट क्षमता का वाणिज्यिक संचालन शुरू किये जाने की घोषणा की है। इसी के साथ ही कुल 100 मेगावाट क्षमता की यह परियोजना अब पूर्ण रूप से चालू हो गई है। यह भारत की सबसे बड़ी तैरती हुई सौर ऊर्जा परियोजना है।

प्रमुख बिंदु

  • यह परियोजना मेसर्स भेल के माध्यम से इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) अनुबंध के रूप में 423 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई है, जो जलाशय के 500 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है।
  • इस परियोजना के संचालन के साथ ही दक्षिण भारत में फ्लोटिंग सौर क्षमता का कुल वाणिज्यिक संचालन बढ़कर 217 मेगावाट हो गया है।
  • इस परियोजना के अतिरिक्त दक्षिण भारत में कायमकुलम (केरल) में 92 मेगावाट और सिम्हाद्री (आंध्र प्रदेश) में 25 मेगावाट के फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट का वाणिज्यिक संचालन किया जा रहा है।

महत्त्व

  • यह परियोजना इस मायने में अनूठी है कि इन्वर्टर, ट्रांसफॉर्मर, एच.टी. पैनल और एस.सी.ए.डी.ए. (पर्यवेक्षी नियंत्रण और डाटा अधिग्रहण) सहित सभी विद्युत उपकरण फ्लोटिंग फेरो सीमेंट प्लेटफॉर्म पर हैं।
  • यह परियोजना उन्नत तकनीक के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल विशेषताओं से भी संपन्न है। पर्यावरण के दृष्टिकोण से सबसे स्पष्ट लाभ यह है कि इसमें न्यूनतम भूमि की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, तैरते हुए सौर पैनलों की उपस्थिति के कारण जल निकायों से वाष्पीकरण की दर भी कम हो जाती है, जो जल संरक्षण में सहायक होता है।
  • इस परियोजना के माध्यम से प्रति वर्ष लगभग 32.5 लाख क्यूबिक मीटर पानी के वाष्पीकरण से बचा जा सकता है। साथ ही, सौर मॉड्यूल के नीचे का जल निकाय उनके परिवेश के तापमान को बनाए रखने में मदद करता है, जिससे उनकी दक्षता और उत्पादन में सुधार होता है। 
  • इसके अतिरिक्त, इस परियोजना से प्रति वर्ष 1,65,000 टन कोयले की खपत से बचा जा सकता है और प्रति वर्ष 2,10,000 टन कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन को भी कम किया जा सकता है।
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