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समुद्र में पवन ऊर्जा का विस्तार तेज, परियोजनाओं की मंजूरी बनी बड़ी चुनौती

चर्चा में क्यों?

वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के लिए अपतटीय पवन ऊर्जा (Offshore Wind Energy) को भविष्य की प्रमुख ऊर्जा प्रौद्योगिकी माना जा रहा है। हालांकि, इस क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि की संभावनाओं के बावजूद अनेक परियोजनाएं विभिन्न बाधाओं के कारण ठप पड़ी हैं। ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल (GWEC) की ग्लोबल ऑफशोर विंड रिपोर्ट 2026 के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 25 गीगावाट (GW) क्षमता वाली निर्माण-तैयार परियोजनाएं ग्रिड बाधाओं, नीलामी में देरी और वित्तपोषण संबंधी समस्याओं के कारण अंतिम निवेश निर्णयों का इंतजार कर रही हैं।

2035 तक चार गुना बढ़ेगी क्षमता

  • रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अपतटीय पवन ऊर्जा क्षमता 2025 के अंत में 92.5 GW से बढ़कर 2035 तक 420 GW तक पहुंच सकती है। इसका अर्थ है कि अगले दशक में लगभग 327 GW नई क्षमता जोड़ी जाएगी।
  • साल 2025 में वैश्विक स्तर पर 9.3 GW नई अपतटीय पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित की गई, जो अब तक का तीसरा सर्वाधिक वार्षिक स्थापना स्तर है। 
  • GWEC का अनुमान है कि 2026 से 2030 के बीच यह क्षेत्र लगभग 24 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज करेगा।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक महत्व

  • GWEC का मानना है कि अपतटीय पवन ऊर्जा केवल जलवायु परिवर्तन से निपटने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण आधार बनती जा रही है।
  • पिछले कुछ वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान जैसी घटनाओं ने जीवाश्म ईंधन पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं की कमजोरियों को उजागर किया है। 
  • रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी व्यवधान से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत प्रभावित हो सकता है, जिसका सबसे अधिक प्रभाव एशियाई देशों पर पड़ता है।

परियोजनाओं के सामने प्रमुख चुनौतियां

  • तेजी से बढ़ती मांग के बावजूद अपतटीय पवन ऊर्जा क्षेत्र कई संरचनात्मक बाधाओं का सामना कर रहा है।

1. ग्रिड कनेक्टिविटी में देरी

  • कई परियोजनाओं को ग्रिड से जोड़ने में वर्षों लग रहे हैं, जिससे निवेशकों का विश्वास प्रभावित हो रहा है।

2. नीलामी और सब्सिडी में विलंब

  • 2025 में वैश्विक स्तर पर केवल 11.4 GW क्षमता नीलामी के माध्यम से आवंटित की गई, जो 2024 के रिकॉर्ड स्तर का मात्र पांचवां हिस्सा है।

3. वित्तपोषण लागत में वृद्धि

  • बढ़ती ब्याज दरों और आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है।

4. नीतिगत अनिश्चितता

  • कई देशों में स्पष्ट और दीर्घकालिक नीतियों की कमी निवेश निर्णयों को प्रभावित कर रही है।

5. आपूर्ति श्रृंखला संबंधी बाधाएं

  • टर्बाइन, केबल और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों की आपूर्ति में देरी भी परियोजनाओं की गति को धीमा कर रही है।

25 GW परियोजनाएं क्यों अटकी हुई हैं ?

  • चीन के बाहर लगभग 25 GW क्षमता वाली परियोजनाओं को योजना और पर्यावरणीय स्वीकृतियां मिल चुकी हैं, लेकिन अंतिम निवेश निर्णय (Final Investment Decision) अभी तक नहीं लिए गए हैं।
  • इन परियोजनाओं के अटकने के प्रमुख कारण हैं :
    • ग्रिड कनेक्शन में देरी
    • नीलामी परिणामों का लंबित रहना
    • सब्सिडी व्यवस्था की अनिश्चितता
    • वित्तपोषण चुनौतियां 
    • नियामकीय प्रक्रियाओं की धीमी गति

GWEC की आठ सूत्रीय कार्य योजना

  • अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए GWEC ने सरकारों को आठ प्रमुख सुझाव दिए हैं :

  1. अपतटीय पवन ऊर्जा को राष्ट्रीय महत्वपूर्ण अवसंरचना का दर्जा देना।
  2. ग्रिड, ऊर्जा भंडारण और बंदरगाह अवसंरचना को मजबूत करना।
  3. सरकार और उद्योग के बीच साझेदारी बढ़ाना।
  4. अनुमति और स्वीकृति प्रक्रियाओं को तेज करना।
  5. निवेशकों के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाना।
  6. प्रभावी और निष्पादन योग्य नीलामी ढांचा विकसित करना।
  7. आपूर्ति श्रृंखलाओं का विस्तार करना।
  8. औद्योगिक विद्युतीकरण को बढ़ावा देना।

चीन बना हुआ है वैश्विक नेता

  • साल 2025 में लगातार आठवें वर्ष चीन दुनिया का सबसे बड़ा अपतटीय पवन ऊर्जा बाजार बना रहा।
  • प्रमुख आंकड़े
    • नई स्थापित क्षमता : 6.6 GW 
    • कुल संचयी क्षमता : 48.4 GW 
    • वैश्विक हिस्सेदारी : 52 प्रतिशत 
  • दूसरी ओर, यूरोप की हिस्सेदारी लगभग 42 प्रतिशत रही। यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी और फ्रांस ने मिलकर लगभग 2 GW नई क्षमता स्थापित की।

तकनीकी प्रगति भी तेज

  • रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पहली बार वैश्विक स्तर पर औसत अपतटीय पवन टर्बाइन का आकार 10 मेगावाट की सीमा पार कर 10.3 मेगावाट तक पहुंच गया।
  • इसके अतिरिक्त, वर्तमान में स्थापित अपतटीय पवन ऊर्जा संयंत्रों से उत्पन्न बिजली लगभग 102 मिलियन घरों को ऊर्जा उपलब्ध कराने के बराबर है।

निष्कर्ष

GWEC की रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि अपतटीय पवन ऊर्जा आने वाले दशक में वैश्विक ऊर्जा प्रणाली का एक प्रमुख स्तंभ बनने जा रही है। हालांकि, यदि ग्रिड अवसंरचना, नीतिगत समर्थन, वित्तपोषण और अनुमोदन प्रक्रियाओं से जुड़ी बाधाओं को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो 25 GW से अधिक क्षमता वाली तैयार परियोजनाएं लंबे समय तक ठप रह सकती हैं।

ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु लक्ष्यों और आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए सरकारों के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे अपतटीय पवन ऊर्जा को केवल नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रणनीतिक अवसंरचना के रूप में देखें। इससे स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति मिलेगी और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता भी कम होगी।

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