वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के लिए अपतटीय पवन ऊर्जा (Offshore Wind Energy) को भविष्य की प्रमुख ऊर्जा प्रौद्योगिकी माना जा रहा है। हालांकि, इस क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि की संभावनाओं के बावजूद अनेक परियोजनाएं विभिन्न बाधाओं के कारण ठप पड़ी हैं। ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल (GWEC) की ग्लोबल ऑफशोर विंड रिपोर्ट 2026 के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 25 गीगावाट (GW) क्षमता वाली निर्माण-तैयार परियोजनाएं ग्रिड बाधाओं, नीलामी में देरी और वित्तपोषण संबंधी समस्याओं के कारण अंतिम निवेश निर्णयों का इंतजार कर रही हैं।
तेजी से बढ़ती मांग के बावजूद अपतटीय पवन ऊर्जा क्षेत्र कई संरचनात्मक बाधाओं का सामना कर रहा है।
कई परियोजनाओं को ग्रिड से जोड़ने में वर्षों लग रहे हैं, जिससे निवेशकों का विश्वास प्रभावित हो रहा है।
2025 में वैश्विक स्तर पर केवल 11.4 GW क्षमता नीलामी के माध्यम से आवंटित की गई, जो 2024 के रिकॉर्ड स्तर का मात्र पांचवां हिस्सा है।
बढ़ती ब्याज दरों और आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है।
कई देशों में स्पष्ट और दीर्घकालिक नीतियों की कमी निवेश निर्णयों को प्रभावित कर रही है।
टर्बाइन, केबल और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों की आपूर्ति में देरी भी परियोजनाओं की गति को धीमा कर रही है।
अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए GWEC ने सरकारों को आठ प्रमुख सुझाव दिए हैं :
GWEC की रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि अपतटीय पवन ऊर्जा आने वाले दशक में वैश्विक ऊर्जा प्रणाली का एक प्रमुख स्तंभ बनने जा रही है। हालांकि, यदि ग्रिड अवसंरचना, नीतिगत समर्थन, वित्तपोषण और अनुमोदन प्रक्रियाओं से जुड़ी बाधाओं को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो 25 GW से अधिक क्षमता वाली तैयार परियोजनाएं लंबे समय तक ठप रह सकती हैं।
ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु लक्ष्यों और आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए सरकारों के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे अपतटीय पवन ऊर्जा को केवल नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रणनीतिक अवसंरचना के रूप में देखें। इससे स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति मिलेगी और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता भी कम होगी।
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