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सभासार एआई: पंचायती राज में डिजिटल क्रांति

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2:
स्थानीय स्तर पर शक्तियों एवं वित्त का हस्तांतरण और उसकी चुनौतियाँ, सरकारी नीतियों तथा विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन व कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय)

संदर्भ

भारत में पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण शासन की रीढ़ है, जो स्थानीय स्तर पर लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देती है। ग्राम सभा और पंचायत बैठकों का दस्तावेजीकरण प्राय: समय लेने वाला एवं श्रमसाध्य होता है। इस चुनौती को हल करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय ने ‘सभासार’ नामक एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित उपकरण लॉन्च किया है।

सभासार के बारे में

  • सभासार एक एआई-संचालित उपकरण है जो ग्राम सभा एवं अन्य पंचायती राज बैठकों की ऑडियो व वीडियो रिकॉर्डिंग से स्वचालित रूप से बैठक का विवरण तैयार करता है।
  • यह उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण तकनीकों का उपयोग करता है। 
  • इसका मुख्य उद्देश्य पंचायती राज व्यवस्था में दक्षता, पारदर्शिता व जवाबदेही को बढ़ावा देना है।
  • सरकार के राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन ‘भाषिणी’ के साथ एकीकृत यह उपकरण वर्तमान में 13 भारतीय भाषाओं में कार्यरत है जिससे भाषाई समावेशिता सुनिश्चित होती है।
  • पहले चरण में त्रिपुरा की सभी 1194 ग्राम पंचायतें 15 अगस्त, 2025 को होने वाली विशेष ग्राम सभाओं के लिए सभासार का उपयोग कर रही हैं।

उद्देश्य

  • मैन्युअल दस्तावेजीकरण के समय और प्रयास को कम करना
  • ग्राम सभा बैठकों के प्रमुख बिंदुओं और निर्णयों को त्वरित एवं सटीक रूप से संक्षेपित करना
  • बहुभाषी समर्थन के माध्यम से सभी भाषाई पृष्ठभूमि के पंचायत के लिए पहुँच सुनिश्चित करना
  • सहभागी लोकतंत्र को सशक्त बनाना और डिजिटल नवाचार को बढ़ावा देना

पंचायतों का सशक्तिकरण

  • समय की बचत : मैन्युअल दस्तावेजीकरण में लगने वाला समय कम होने से पंचायत पदाधिकारी शासन एवं सेवा वितरण पर अधिक ध्यान दे सकते हैं।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही : स्वचालित एवं सटीक दस्तावेजीकरण से निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ती है।
  • समावेशिता : बहुभाषी समर्थन के कारण गैर-हिंदी एवं गैर-अंग्रेजी भाषी क्षेत्रों में भी इसका उपयोग आसान है।
  • डिजिटल नवाचार : यह ग्रामीण शासन में डिजिटल तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करता है जिससे पंचायतें आधुनिक शासन प्रणालियों के साथ तालमेल स्थापित कर सकती हैं। 

चुनौतियाँ

  • तकनीकी बुनियादी ढांचा : ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल उपकरणों की उपलब्धता सीमित हो सकती है।
  • प्रशिक्षण की आवश्यकता : पंचायत पदाधिकारियों को इस उपकरण का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता हो सकती है।
  • भाषाई सीमाएँ : हालाँकि, यह 13 भाषाओं में काम करता है, फिर भी कुछ स्थानीय बोलियों एवं भाषाओं को शामिल करने में समय लग सकता है।
  • डाटा गोपनीयता : ऑडियो एवं वीडियो रिकॉर्डिंग के उपयोग से डाटा सुरक्षा व गोपनीयता की चिंताएँ हो सकती हैं।

आगे की राह

  • अधिक भाषाओं का समावेश : अन्य भारतीय भाषाओं और बोलियों को शामिल करके समावेशिता को बढ़ाया जा सकता है।
  • तकनीकी बुनियादी ढांचे का विस्तार : ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट एवं डिजिटल उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने की आवश्यकता है।
  • प्रशिक्षण एवं जागरूकता : पंचायत पदाधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाएँ व जागरूकता अभियान चलाए जा सकते हैं।
  • डाटा सुरक्षा उपाय : डाटा गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत नीतियाँ लागू की जानी चाहिए।
  • अन्य राज्यों में विस्तार : त्रिपुरा में सफल कार्यान्वयन के बाद इसे अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा सकता है।

ग्राम पंचायतों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान

  • अनुच्छेद 243 : पंचायती राज संस्थाओं की परिभाषा एवं संरचना को परिभाषित करता है।
  • अनुच्छेद 243G : ग्राम पंचायतों को ग्रामीण विकास और सामाजिक-आर्थिक योजनाओं के कार्यान्वयन की शक्तियाँ व जिम्मेदारियाँ प्रदान करता है।
  • 11वीं अनुसूची : इसमें 29 विषय शामिल हैं, जिन्हें ग्राम पंचायतों को सौंपा जा सकता है, जैसे- कृषि, ग्रामीण आवास, पेयजल व शिक्षा।
  • 73वाँ संशोधन (1992) : इसने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया और ग्राम सभाओं को स्थानीय शासन में महत्वपूर्ण भूमिका दी।
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