चर्चा में क्यों?
- हाल ही में संघर्षग्रस्त समुद्री क्षेत्र में व्यापारी तेल टैंकरों पर हुए हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद यह प्रश्न अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है कि क्या युद्ध के दौरान तटस्थ (Neutral) व्यापारी जहाजों पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध है?
- अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (International Humanitarian Law-IHL), समुद्री युद्ध कानून (Law of Naval Warfare) और समुद्री कानून (Law of the Sea) तटस्थ जहाजों की सुरक्षा से संबंधित स्पष्ट नियम निर्धारित करते हैं। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में इन जहाजों को सैन्य लक्ष्य माना जा सकता है।

तटस्थ जहाज (Neutral Ships) क्या होते हैं?
- तटस्थ जहाज वे व्यापारी पोत होते हैं जो किसी युद्धरत पक्ष का हिस्सा नहीं होते और किसी तटस्थ देश के ध्वज (Flag) के अंतर्गत संचालित होते हैं।
- सामान्य परिस्थितियों में ऐसे जहाजों को युद्ध में प्रत्यक्ष लक्ष्य नहीं बनाया जा सकता क्योंकि वे नागरिक (Civilian) संपत्ति की श्रेणी में आते हैं।
तटस्थ जहाजों की सुरक्षा का कानूनी आधार
- अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार तटस्थ व्यापारी जहाजों की सुरक्षा मुख्यतः तीन कानूनी व्यवस्थाओं से सुनिश्चित होती है
- अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (International Humanitarian Law-IHL)
- समुद्री युद्ध कानून (Law of Naval Warfare)
- संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS)
- इन कानूनों के माध्यम से यह निर्धारित किया जाता है कि समुद्र में युद्ध कैसे संचालित होगा, किन लक्ष्यों पर हमला किया जा सकता है तथा तटस्थ जहाजों के साथ कैसा व्यवहार किया जाएगा।
दो प्रमुख कानूनी ढांचे
1. समुद्री युद्ध कानून (Law of Naval Warfare)
- यह युद्ध के दौरान समुद्र में सैन्य गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
- इसके अंतर्गत शामिल हैं -
- जहाजों पर हमला
- तलाशी (Visit and Search)
- जहाजों की जब्ती
- नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade)
- युद्धरत एवं तटस्थ देशों के अधिकार एवं दायित्व
2. समुद्री कानून (UNCLOS)
- संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS) निम्न समुद्री क्षेत्रों की कानूनी स्थिति निर्धारित करता है -
- प्रादेशिक समुद्र (Territorial Sea)
- विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ)
- अंतरराष्ट्रीय जल (High Seas)
- अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य
- ट्रांजिट मार्ग (Transit Passage)
- हालांकि सभी देश UNCLOS के पक्षकार नहीं हैं, फिर भी इसके कई नियम आज प्रथागत अंतरराष्ट्रीय कानून (Customary International Law) का हिस्सा माने जाते हैं।
तटस्थ व्यापारी जहाजों को किस प्रकार सुरक्षा प्राप्त है?
- अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुसार नागरिकों और नागरिक संपत्तियों पर हमला प्रतिबंधित है।
- इसी कारण निम्न प्रकार के व्यापारी जहाज सामान्यतः संरक्षित होते हैं-
- तेल टैंकर
- कंटेनर जहाज
- खाद्यान्न ले जाने वाले जहाज
- उर्वरक एवं अन्य व्यावसायिक सामान ढोने वाले पोत
- समुद्र के भीतर पाइपलाइन एवं संचार केबल
- इसी प्रकार Hormuz जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से तटस्थ जहाजों को युद्ध के दौरान भी ट्रांजिट मार्ग का अधिकार प्राप्त रहता है।
किन परिस्थितियों में तटस्थ जहाज अपनी सुरक्षा खो सकते हैं?
- तटस्थ जहाजों की सुरक्षा पूर्णतः निरपेक्ष (Absolute) नहीं होती।
- San Remo Manual (1994) के अनुसार निम्न परिस्थितियों में तटस्थ व्यापारी जहाजों पर कार्रवाई की जा सकती है -
- यदि वे युद्ध सामग्री (Contraband) ले जा रहे हों।
- यदि वे वैध नौसैनिक नाकाबंदी का उल्लंघन कर रहे हों।
- चेतावनी के बाद भी रुकने से इंकार करें।
- तलाशी या गिरफ्तारी का विरोध करें।
- शत्रु की सैन्य कार्रवाई में प्रत्यक्ष एवं प्रभावी योगदान दें।
- अर्थात केवल व्यापारिक गतिविधि करना किसी जहाज को सैन्य लक्ष्य नहीं बनाता। उसके विरुद्ध ठोस कानूनी आधार होना आवश्यक है।
क्या तेल टैंकरों पर हमला किया जा सकता है?
- कुछ परिस्थितियों में यदि तेल सीधे शत्रु की सैन्य आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहा हो या प्रतिबंधित सामग्री (Contraband) माना जाए, तो कानूनी स्थिति बदल सकती है।
- फिर भी केवल तेल ले जाने वाला प्रत्येक टैंकर स्वतः वैध सैन्य लक्ष्य नहीं बन जाता।
- अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार किसी जहाज को तभी सैन्य लक्ष्य माना जाएगा जब -
- वह शत्रु की सैन्य कार्रवाई में प्रत्यक्ष योगदान दे।
- उसे नष्ट करने से स्पष्ट सैन्य लाभ प्राप्त हो।
- हालांकि अमेरिका सहित कुछ देशों ने "War-Sustaining Theory" का समर्थन किया है, जिसके अनुसार युद्ध के लिए आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने वाली वस्तुएं भी लक्ष्य बन सकती हैं। लेकिन यह सिद्धांत अभी भी अंतरराष्ट्रीय कानून में व्यापक रूप से स्वीकार नहीं किया गया है।
नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) क्या है ?
- नौसैनिक नाकाबंदी युद्ध के दौरान प्रयोग किया जाने वाला वैध सैन्य उपाय हो सकता है, बशर्ते इसकी सार्वजनिक घोषणा की गई हो। यह प्रभावी हो। सभी देशों के जहाजों पर समान रूप से लागू हो। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप लागू की जाए।
- यदि कोई तटस्थ जहाज जानबूझकर वैध नाकाबंदी तोड़ता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है।
Jus ad Bellum और Jus in Bello में अंतर
- अंतरराष्ट्रीय कानून में दो महत्वपूर्ण सिद्धांत लागू होते हैं -
- Jus ad Bellum- युद्ध या बल प्रयोग प्रारंभ करने की वैधता से संबंधित है।
- Jus in Bello - युद्ध के दौरान अपनाए जाने वाले आचरण और सैन्य कार्रवाई की वैधता से संबंधित है।
- यदि किसी नाकाबंदी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति प्राप्त न हो अथवा आत्मरक्षा (Article 51) के आधार पर उचित न ठहराया जा सके, तो उसका कानूनी आधार कमजोर हो सकता है।
भारत के पास क्या कानूनी विकल्प हैं ?
- भारतीय नाविकों की मृत्यु केवल मानवीय या कूटनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रश्न भी है।
- Diplomatic Protection (राजनयिक संरक्षण) के सिद्धांत के तहत भारत अपने नागरिकों की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दावा प्रस्तुत कर सकता है।
- भारत निम्न कदम उठा सकता है -
- संबंधित देश से स्पष्टीकरण मांगना।
- जवाबदेही तय करने की मांग करना।
- स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग करना।
- मुआवजे (Compensation) की मांग करना।
- संयुक्त राष्ट्र एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मामला उठाना।
महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न
- इस घटना के संदर्भ में कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठते हैं -
- हमले के पीछे क्या खुफिया जानकारी थी?
- क्या जहाजों को पर्याप्त चेतावनी दी गई थी?
क्या हमला अंतिम विकल्प था ?
- क्या जहाज को रोककर तलाशी या कब्जे जैसे कम कठोर उपाय अपनाए जा सकते थे?
- क्या नागरिक नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया?
- इन सभी प्रश्नों का संबंध अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के चार प्रमुख सिद्धांतों से है -
- Distinction (भेदभाव)
- Proportionality (अनुपातिकता)
- Military Necessity (सैन्य आवश्यकता)
- Precaution (सावधानी)
निष्कर्ष
युद्ध के दौरान तटस्थ व्यापारी जहाजों को सामान्यतः अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुरक्षा प्राप्त होती है और उन्हें केवल सीमित एवं स्पष्ट कानूनी परिस्थितियों में ही सैन्य लक्ष्य बनाया जा सकता है। भारतीय नाविकों की हालिया मृत्यु ने समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून तथा तटस्थ जहाजों की कानूनी सुरक्षा से जुड़े गंभीर प्रश्नों को पुनः वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। भारत के पास अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेही, स्वतंत्र जांच और मुआवजे की मांग करने के पर्याप्त कानूनी एवं कूटनीतिक विकल्प उपलब्ध हैं।