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सारनाथ : बुद्ध के प्रथम उपदेश से भारतीय गणराज्य के प्रतीक तक

(प्रारंभिक परीक्षा: भारत का इतिहास)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 1: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य एवं वास्तुकला के मुख्य पहलू)

संदर्भ

हाल ही में, भारत ने सारनाथ को 2025-26 चक्र के लिए यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए नामांकित किया है।

सारनाथ : एक अवलोकन

  • सारनाथ, वाराणसी से लगभग 10 किमी. उत्तर-पूर्व में स्थित बौद्ध धर्म के चार सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। 
  • यहीं भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। सारनाथ को प्राचीन ग्रंथों में ‘मृगदाव’ या ‘ऋषिपत्तन’ कहा गया है।
  • यह स्थान बौद्ध संघ के गठन का साक्षी है। यहां बना अशोक स्तंभ वर्तमान में भारतीय गणराज्य का राष्ट्रीय प्रतीक है।

अशोक का संरक्षण

  • मौर्य सम्राट अशोक (268-232 ई.पू.) ने सारनाथ को विशेष महत्व दिया।
  • उन्होंने यहाँ ‘सिंह स्तंभ’ स्थापित किया, जो अब भारत का राजचिह्न है।
  • अशोक ने कई मठ एवं स्तूप बनवाए, जिनमें से ‘धमेख स्तूप’ सबसे प्रसिद्ध है, जो बुद्ध के प्रथम उपदेश का प्रतीक है।

कुषाण एवं गुप्त काल में पुनर्निर्माण

  • कुषाण (1-4वीं सदी ई.) और गुप्त (3-6वीं सदी ई.) शासकों ने अशोक कालीन संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया और नए मंदिर व मठ बनवाए।
  • 12वीं सदी तक यहाँ एक समृद्ध बौद्ध मठ अस्तित्व में था।

सारनाथ का विनाश

  • इतिहासकार मानते हैं कि 12वीं सदी में सारनाथ को नष्ट कर दिया गया।
  • पुरातत्वविद अलेक्जेंडर कनिंघम के अनुसार, यहाँ के मंदिर, मूर्तियाँ एवं मठ जला दिए गए और भिक्षुओं को मार दिया गया।
  • कई विद्वान मानते हैं कि यह विनाश कुतुबुद्दीन ऐबक (1193) के आक्रमण के समय हुआ, जब वाराणसी के हजारों मंदिर तोड़े गए।
  • कुछ अन्य विद्वान मानते हैं कि यहाँ शैव मंदिर बनाने का प्रयास हुआ किंतु मुस्लिम आक्रमण से यह योजना अधूरी रह गई।
  • इस विनाश के बाद लगभग 700 वर्षों तक सारनाथ खंडहर में पड़ा रहा और भारत में बौद्ध धर्म लगभग विलुप्त हो गया।

आधुनिक पुनःखोज

  • 18वीं सदी के अंत में बनारस के राजा चित्र सिंह के दीवान जगत सिंह के मजदूर यहाँ से ईंट-पत्थर निकाल रहे थे।
    • उत्खनन में बुद्ध की मूर्ति का आधार और दो पत्थर के अवशेष मिले।
  • वर्ष 1799 में इन खोजों की रिपोर्ट जोनाथन डंकन ने की, जिससे ब्रिटिश पुरातत्वविदों की रुचि बढ़ी।
  • वर्ष 1835-36 में अलेक्जेंडर कनिंघम ने उत्खनन किया और सारनाथ को बुद्ध के प्रथम उपदेश स्थल के रूप में पहचान मिली।
  • वर्ष 1904-05 में पुरातत्वविद फ्रेडरिक ओर्टेल ने वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन करके 476 मूर्तियाँ और 41 शिलालेख खोज निकाले।

वर्तमान में सारनाथ

  • आज सारनाथ, लुंबिनी, बोधगया एवं कुशीनगर के साथ चार प्रमुख बौद्ध तीर्थों में गिना जाता है।
  • सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में 8,43,836 लोगों ने यहाँ भ्रमण किया।
  • भारत सरकार और ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) इसे यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की दिशा में प्रयासरत हैं।

निष्कर्ष

सारनाथ न केवल बौद्ध धर्म का प्रमुख स्थान है, बल्कि भारतीय इतिहास एवं संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। यह अहिंसा, करुणा एवं ज्ञान के मार्ग की याद दिलाता है। यहाँ का सिंह स्तंभ भारतीय गणराज्य की नींव और बौद्ध धरोहर से जोड़ता है। यूनेस्को सूची में इसका शामिल होना वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक विरासत को अधिक प्रतिष्ठा प्रदान करेगा।

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