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सेनेहजोरी मिशन

संदर्भ  

  • हाल ही में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री (एमडीओएनईआर) श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने असम के मुख्यमंत्री के साथ मिलकर मिशन सेनेहजोरी - असम मुगा सिल्क यूएसपी का शुभारंभ किया है।  

सेनेहजोरी मिशन के बारे में  

  • यह एक व्यापक क्लस्टर-आधारित पहल है। इसका उद्देश्य असम के अद्वितीय मुगा रेशम क्षेत्र को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी, उच्च मूल्य वाले लक्जरी वस्त्र इकोसिस्टम में परिवर्तित करना है। 

मिशन का लक्ष्य 

  • इस मिशन का उद्देश्य 2028 तक कई प्रमुख लक्ष्यों को प्राप्त करना है। 
    • पाँच आधुनिक मुगा रीलिंग इकाइयों और एक मुगा स्पन मिल की स्थापना करना। 
    • 30 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और 1,180 से अधिक किसान हित समूहों का निर्माण करना। 
    • 5,000 हेक्टेयर में सोम और सोआलू प्रजाति के पौधों का पुनर्जनन करना।
    • जीआई-लिंक्ड सिस्टम के माध्यम से व्यापार किए गए 80 प्रतिशत से अधिक मुगा रेशम का प्रमाणीकरण करना। 
    • 8,000 से अधिक परिवारों के लिए डिजिटल ट्रेसबिलिटी तंत्र का निर्माण और मुगा रेशम के निर्यात को प्रति वर्ष 2,000 किलोग्राम से अधिक तक विस्तारित करना शामिल है।
    • मुगा सिल्क ट्रेल के विकास, सिल्क टूरिज्म पार्क की स्थापना और वार्षिक मुगा उत्सवों के आयोजन के माध्यम से सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना भी है। इससे असम को रेशम विरासत पर्यटन के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित किया जा सके। 

अनुमानित निवेश  

  • तीन वर्षों की अवधि में (एमडीओएनईआर के 136–151 करोड़ रुपये सहित) लगभग 396–411 करोड़ रुपये  

मिशन में शामिल क्षेत्र  

  • इस मिशन में जोरहाट, शिवसागर, लखीमपुर, धेमाजी, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, माजुली और सुआलकुची सहित प्रमुख मूगा रेशम उत्पादक जिलों को शामिल है और ये क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़ रहा है।

मिशन में शामिल गतिविधियाँ  

  • मेजबान पौधे की पारिस्थितिकी को मजबूत करना, 
  • आधुनिक रीलिंग अवसंरचना स्थापित करना,
  • किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को बढ़ावा देना, 
  • साझा सुविधा केंद्र (सीएफसी) बनाना, 
  • जीआई प्रमाणीकरण को लागू करना और 
  • सेनेहजोरी की एकीकृत ब्रांड पहचान के तहत वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाना है।

मुगा रेशम के बारे में 

  • मुगा रेशम को दुनिया का एकमात्र प्राकृतिक रूप से सुनहरा रेशम और भारत का पहला जीआई-टैग प्राप्त रेशम माना जाता है। 
  • यह असम में लगभग 2.6 लाख रेशम पालकों और बुनकरों के परिवारों को आजीविका प्रदान करता है।
  • वैश्विक स्तर पर कुल मूगा रेशम उत्पादन का 90 प्रतिशत योगदान अकेले असम राज्य का है।
  • यह रेशम एन्थेरिया असामेंसिस नामक अर्ध-पालतू मल्टीवोल्टाइन रेशमकीट से प्राप्त होता है। यह कीट मुख्य रूप से सोम एवं सोआलू पौधों की सुगंधित पत्तियों पर निर्भर रहता है तथा टसर की भांति ही इसका पालन भी वृक्षों पर किया जाता है।
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