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स्टॉकहोम अंतर्राष्ट्रीय शांति शोध संस्थान की वार्षिक बुक

(प्रारंभिक परीक्षा -राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)

ंदर्भ

14 जून, 2021 को स्टॉकहोम अंतर्राष्ट्रीय शांति शोध संस्थान’ (Stockholm International Peace Research Institute -SIPRI) की वार्षिक बुक, 2021 जारी की गई।

प्रमुख बिंदु 

  • स्वीडिश थिंक टैंक ‘स्टाकहोम अंतर्राष्ट्रीय शांति शोध संस्थान’ की प्रतिवर्ष जारी की जाने वाली रिपोर्ट का यह 52वाँ संस्करण है।
  • िपरी वार्षिक बुक, 2021 वैश्विक सैन्य व्यय, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हथियारों का हस्तांतरण, परमाणु हथियार एवं उसका नियंत्रण तथा बहुपक्षीय शांति अभियानों, जैसे महत्त्वपूर्ण पहलुओं का अत्याधुनिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

परमाणु हथियारों की स्थिति

  • नौ परमाणु हथियार संपन्न देशों के पास वर्ष 2021 के प्रांरभ में अनुमानतः 13080  परमाणु हथियार थे। यह वर्ष  2020 के अनुमान से कम है।
  • ये नौ परमाणु हथियार संपन्न देश– अमेरिका, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इज़रायल और उत्तर कोरिया हैं। कुल वैश्विक परमाणु हथियारों में 90% से अधिक हिस्सा रूस व अमेरिका का है।
  • परमाणु हथियारों की कुल संख्या में कमी के बावजूद परिचालनगत अवस्था में तैनात (Operational Deployment) परमाणु हथियारों की संख्या में वृद्धि हुई है। रूस के समग्र सैन्य परमाणु भंडार में वृद्धि का प्रमुख कारण सतह आधारित अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBMs) और समुद्र से प्रक्षेपित होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों (SLBNMs) की अधिक तैनाती है।
  • वैश्विक सैन्य भंडार में युद्धशीर्षो की कुल संख्या में वृद्धि हुई है, जो शीत युद्ध की समाप्ति के बाद से वैश्विक परमाणु शस्त्रागार में गिरावट की प्रवृत्ति के विपरीत है। पिछले वर्ष के मुकाबले वर्ष 2021 के प्रारंभ में भारत के साथ-साथ पाकिस्तान व चीन के परमाणु युद्धशीर्षों में वृद्धि दर्ज की गई है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, चीन अपनी परमाणु क्षमता के आधुनिकीकरण एवं विस्तार प्रक्रिया के मध्यवर्ती चरण में है। साथ ही, भारत व पाकिस्तान भी अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार कर रहे हैं।

हथियारों के हस्तांतरण की स्थिति

  • वर्ष 2001-2005 के बाद पहली बार देशों के मध्य प्रमुख हथियारों की डिलीवरी की मात्रा में 2011-15 और 2016-20 के मध्य वृद्धि नहीं हुई है। हालाँकि, शीत युद्ध की समाप्ति के बाद से वैश्विक हथियारों का हस्तांतरण उच्चतम स्तर के करीब रहा है।
  • वर्ष 2016-20 के मध्य पाँच सबसे बड़े हथियार आपूर्तिकर्ता देश- अमेरिका, रूस, फ्रांस, जर्मनी व चीन हैं। इस दौरान अमेरिका, फ्रांस व जर्मनी के निर्यात में वृद्धि हुई है, जबकि रूस व चीन के निर्यात में गिरावट आई है।
  • वर्ष 2016-20 के मध्य अमेरिका ने सर्वाधिक 96 देशों में प्रमुख हथियारों की आपूर्ति  की है। अमेरिकी हथियारों का लगभग आधा हस्तांतरण (Transfer) मध्य-पूर्व के देशों में हुआ।
  • रूस के निर्यात में कमी आई है, जिसका प्रमुख कारण भारत द्वारा रूस से हथियारों के आयात में भारी कमी है। वर्ष 2011-15  और 2016-20 के बीच भारत द्वारा हथियार आयात में 33%  की गिरावट दर्ज की गई है। रूस व अमेरिका से भारत को होने वाले आयात में कमी आई है।
  • उल्लेखनीय है कि मध्य-पूर्व के देशों में हथियार आयात में सर्वाधिक वृद्धि (Growth) दर्ज की गई है।
  • सऊदी अरब अमेरिकी हथियारों का सबसे बड़ा आयाताक रहा है, जबकि कतर द्वारा हथियार आयात में 361% की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रमुख हथियारों के सबसे बड़े आयातक क्षेत्र एशिया और ओशिनिया रहे हैं।
  • वर्ष 2016-20 के मध्य पाँच सबसे बड़े हथियार आयातक देश- सऊदी अरब, भारत, मिस्र, ऑस्ट्रेलिया व चीन रहें।

    वैश्विक सैन्य व्यय की स्थिति

    • कुल वैश्विक सैन्य व्यय  में वर्ष 2019 के मुकाबले वर्ष 2020 में 2.6% की वृद्दि दर्ज की गई है। वर्ष 2020 में भारत का सैन्य खर्च 72.9 बिलियन डॅालर रहा। वर्ष 2020 में 5 सबसे बड़े सैन्य व्ययकर्ता देश- अमेरिका, चीन, भारत, रूस व यूनाइटेड किंगडम रहे। ये देश वैश्विक सैन्य खर्च के 62% के लिये उत्तरदायी हैं।
    • चीन के सैन्य व्यय में लगातार 26वें वर्ष वृद्धि दर्ज की गई है। भारत के सैन्य व्यय में वर्ष 2019 और 2020 के मध्य तथा 2011-20 के दशक में वृद्धि हुई है।

    सिपरी ईयर बुक

    • सिपरी ईयर बुक वैश्विक स्तर पर शस्त्रीकरण, नि:शस्त्रीकरण और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा, हथियार एवं प्रौद्योगिकी विकास, सैन्य व्यय, हथियारों के व्यापार व उत्पादन और सशस्त्र संघर्ष के संबंध में एक समग्र अवलोकन प्रस्तुत करता है।
    • साथ ही, यह पारंपरिक परमाणु, रासायनिक एवं जैविक हथियारों को नियंत्रित करने के उपायों को भी प्रस्तुत करता है। सिपरी ईयर बुक का प्रथम संस्करण वर्ष 1969 में जारी किया गया था।
    • इसका उद्देश्य हथियारों की दौड़ और इसे रोकने के प्रयासों पर एक तथ्यात्मक और संतुलित लेखा-जोखा तैयार करना था।
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