मोटर बीमा दावों पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय

(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय)

संदर्भ

सर्वोच्च न्यायालय ने अदालतों एवं न्यायाधिकरणों से बीमा कंपनियों को मोटर दुर्घटना दावे की राशि सीधे दावेदारों के बैंक खातों में स्थानांतरित करने का निर्देश देने को कहा है। इससे दावा राशि के भुगतान में तेजी आने की उम्मीद है।

बीमा कंपनियों द्वारा दावा का भुगतान  

  • वर्तमान में बीमा कंपनियाँ, किसी दावे के भुगतान की राशि न्यायाधिकरण के पास जमा कर देती हैं। फिर न्यायाधिकरण इसे दावेदारों को स्थांतरित करती है।  
    • कुछ मामलों में न्यायाधिकरण द्वारा आदेश दिए जाने पर बीमा कंपनियाँ इसे सीधे दावेदारों के खातों में भी स्थानांतरित करती हैं।
  • वर्ष 2022-23 तक न्यायाधिकरणों के समक्ष पूरे देश में 10,46,163 दावा मामले लंबित थे।
  • जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के अनुसार, मोटर थर्ड पार्टी पॉलिसी में अधिकांश दुर्घटना मामलों के लिए असीमित देयता एवं मुआवजे का प्रावधान है। 
    • इनका निर्णय हमेशा न्यायालयों द्वारा किया जाता है जो दावा भुगतान को तय करने में उदार होते हैं।

क्या है थर्ड पार्टी बीमा 

  • मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार, थर्ड पार्टी बीमा सभी वाहन मालिकों के लिए एक वैधानिक आवश्यकता है। 
  • यह एक प्रकार का बीमा कवर है जिसमें थर्ड पार्टी वाहन, व्यक्तिगत संपत्ति की क्षति एवं शारीरिक चोट के खिलाफ बीमाकर्ता सुरक्षा प्रदान करता है। 
    • यह पॉलिसी बीमाकर्ता को कोई कवरेज प्रदान नहीं करती है।
  • यदि पॉलिसीधारक दुर्घटना का शिकार होता है तो बीमाकर्ता थर्ड पार्टी संपत्ति की मरम्मत की लागत का भुगतान करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
    • इस प्रकार, यह पॉलिसीधारक के लिए वित्तीय बोझ को कम करता है। 
  • दुर्घटना की स्थिति में बीमाधारक को दावा करने से पहले तुरंत बीमा कंपनी को इसके बारे में सूचित करना चाहिए।
  • दावा करने पर बीमाकर्ता क्षति का आकलन करने और मरम्मत की अनुमानित लागत को सत्यापित करने के लिए एक सर्वेक्षक नियुक्त करता है। 
    • सत्यापन के बाद बीमाकर्ता दावे का निपटान करता है।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का प्रभाव

वित्त वर्ष 2024-25 तक दावा राशि का 20% सीधे दावेदारों को भुगतान किया गया है जबकि 80% न्यायाधिकरण को वितरित किया गया है। ऐसे में दावा प्रक्रिया में देरी से दावेदारों को परेशानी होती थी। सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्देश से मुआवज़े के दावे के निपटान में तेजी आएगी तथा दावेदारों को बिना किसी अनावश्यक देरी के मुआवजा मिलेगा।

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