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सतत विमानन ईंधन (Sustainable Aviation Fuel)

संदर्भ 

  • भारत सरकार ने विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) (विपणन विनियमन) आदेश, 2001 में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए सतत विमानन ईंधन (एसएएफ) को आधिकारिक तौर पर नियामक दायरे में शामिल कर लिया है। अप्रैल 2026 में किए गए इन बदलावों का उद्देश्य विमानन क्षेत्र को कार्बन-मुक्त बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाना है। 

एसएएफ (SAF) मिश्रित विमानन ईंधन के बारे में  

  • सतत विमानन ईंधन (SAF) पारंपरिक विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) के साथ मिश्रित एक ड्रॉप-इन समाधान है। 
  • इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके उपयोग के लिए मौजूदा विमान इंजनों या हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे में किसी भी प्रकार के बदलाव की आवश्यकता नहीं होती। 

संरचना और प्रकृति 

  • रासायनिक समानता : एसएएफ में विशेष रूप से संसाधित हाइड्रोकार्बन होते हैं जो रासायनिक रूप से पारंपरिक जेट ईंधन के समान होते हैं।
  • नवीकरणीय स्रोत : इसे फसलों, जैविक अवशेषों और विभिन्न अपशिष्ट पदार्थों जैसे नवीकरणीय फीडस्टॉक से प्राप्त किया जाता है। 
  • कठोर मानक : इसका उपयोग तभी संभव है जब यह अंतर्राष्ट्रीय नागरिक विमानन संगठन (ICAO) द्वारा मान्यता प्राप्त परीक्षणों और एएसटीएम (ASTM) अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरे।

ये भी जाने    

  • विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) : एक रंगहीन, केरोसिन-आधारित पेट्रोलियम उत्पाद है, जिसका उपयोग जेट और टर्बो-प्रॉप इंजन वाले हवाई जहाजों को ऊर्जा देने के लिए किया जाता है। 
  • यह एयरलाइन परिचालन लागत का 30-40% हिस्सा है। सरकार ने अब ATF में एथेनॉल और अन्य संधारणीय (Sustainable) ईंधन को मिश्रित करने की अनुमति दी है, ताकि आयात निर्भरता कम हो और प्रदूषण घटे। 

शासन और विनियमन: तकनीकी मानक 

  • संशोधन के बाद, एसएएफ को अब एटीएफ नियंत्रण आदेश, 2001 के तहत प्रशासित किया जाएगा। इसके लिए दो प्रमुख तकनीकी मानक निर्धारित किए गए हैं :
    • आईएस 1571 (IS 1571) : पेट्रोलियम आधारित एटीएफ और सह-संसाधित एसएएफ के लिए।
    • आईएस 17081 (IS 17081) : पारंपरिक एटीएफ के साथ मिश्रित एसएएफ के लिए विशिष्ट मानक।  
  • इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त करने के लिए इसे CORSIA (कार्बन ऑफसेटिंग एंड रिडक्शन स्कीम फॉर इंटरनेशनल एविएशन) के स्थिरता मानदंडों को पूरा करना अनिवार्य होगा।

प्रमुख विशेषताएं और लाभ 

  • उत्सर्जन में कटौती : जीवाश्म ईंधन की तुलना में यह ग्रीनहाउस गैसों (GHG) के उत्सर्जन में भारी कमी लाता है।
  • समान प्रदर्शन : यह विमान की सुरक्षा या प्रदर्शन क्षमता में कोई बदलाव नहीं करता। 
  • वैश्विक अनुपालन : यह आईसीएओ की सीओआरएसआईए योजना का हिस्सा है, जिसके तहत 2027 से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए उत्सर्जन की भरपाई करना अनिवार्य होगा। 

अप्रैल 2026 संशोधन: नए बदलाव और लक्ष्य 

  • सरकार ने एटीएफ की परिभाषा का विस्तार किया है। अब इसमें रिफाइनरियों में तैयार सह-संसाधित एसएएफ और एटीएफ के साथ मिश्रित एसएएफ, दोनों शामिल हैं। 
  • सरकार ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए अनिवार्य मिश्रण लक्ष्य भी निर्धारित किए हैं:
    • 2027 तक : 1% मिश्रण
    • 2028 तक : 2% मिश्रण
    • 2030 तक : 5% मिश्रण  

दूरगामी प्रभाव (आशय) 

  • वित्तीय राहत : स्वदेशी स्तर पर कार्बन उत्सर्जन कम होने से भारतीय एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगे कार्बन क्रेडिट खरीदने की जरूरत कम होगी, जिससे उन पर वित्तीय बोझ घटेगा। 
  • वैश्विक तालमेल : भारत अब यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे देशों की कतार में शामिल हो गया है, जिन्होंने पहले ही एसएएफ जनादेश लागू कर दिए हैं।
  • घरेलू उत्पादन : यह नीति भारतीय पेट्रोलियम रिफाइनरियों को देश के भीतर ही एसएएफ उत्पादन क्षमता विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करेगी, जिससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को बल मिलेगा।
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