टिटनेस एवं वयस्क डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन 

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा 21 फरवरी, 2026 को हिमाचल प्रदेश के कसौली में स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (CRI) में टिटनेस एवं वयस्क डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन का शुभारंभ किया। 

टीडी वैक्सीन के बारे में

  • टीडी टीका (टिटनेस और वयस्क डिफ्थीरिया टीका– अवशोषित, घटित डी-एंटीजन सामग्री) दोनों टिटनेस एवं डिफ्थीरिया से सुरक्षा प्रदान करता है। 
  • इसे शुद्ध डिप्थीरिया टॉक्सॉइड और शुद्ध टिटनेस टॉक्सॉइड को मिलाकर बनाया जाता है। 
  • एंटीजन एल्युमीनियम फॉस्फेट पर अवशोषित होते हैं जो एक सहायक पदार्थ के रूप में कार्य करता है और थियोमर्सल को परिरक्षक के रूप में मिलाया जाता है।
  • टीडी वैक्सीन की शुरुआत करने का उद्देश्य किशोरों एवं वयस्कों में सुरक्षा को मजबूत करना और टीका-रोकथाम योग्य बीमारियों से जुड़ी रुग्णता एवं मृत्यु दर में कमी लाना है। 
  • इस पहल का समर्थन करने के लिए सी.आर.आई. ने टीडी वैक्सीन का उत्पादन शुरू किया है।

टिटनेस के बारे में

  • टिटनेस एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है जो तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) को प्रभावित करता है। यह बीमारी Clostridium tetani नामक बैक्टीरिया से होती है।
  • यह बैक्टीरिया मिट्टी, धूल एवं जानवरों के मल में पाया जाता है और खुले घाव के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है।
  • टिटनेस में मांसपेशियों में दर्दनाक अकड़न एवं ऐंठन होती है और इसके कारण मुंह खोलने में असमर्थता, निगलने एवं सांस लेने में कठिनाई जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं तथा मौत भी हो सकती है।

लक्षण (Symptoms)

  • जबड़े में जकड़न (Lockjaw)
  • गर्दन और पेट की मांसपेशियों में ऐंठन
  • पूरे शरीर में तेज़ दर्दनाक झटके
  • निगलने में कठिनाई
  • बुखार और पसीना

उपचार (Treatment)

  • एंटीटॉक्सिन इंजेक्शन
  • एंटीबायोटिक्स
  • मांसपेशियों को ढीला करने की दवाएँ
  • गंभीर मामलों में ICU देखभाल

डिप्थीरिया (Diphtheria) के बारे में  

डिप्थीरिया (Diphtheria) को बोलचाल की भाषा में 'गलघोंटू' भी कहा जाता है जोकि एक गंभीर संक्रामक बीमारी है। यह मुख्य रूप से नाक और गले की झिल्ली (Mucous Membranes) को प्रभावित करती है।

कारण

  • यह बीमारी ‘कोरीनेबैक्टीरियम डिप्थीरी’ (Corynebacterium diphtheriae) नामक बैक्टीरिया के कारण होती है।
  • यह छींकने, खांसने या संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। कभी-कभी दूषित वस्तुओं के संपर्क से भी यह हो सकता है।

मुख्य लक्षण

  • संक्रमण के बाद प्राय: 2 से 5 दिनों के भीतर लक्षण दिखने लगते हैं-
  • गले में सफेद/धूसर परत: गले और टॉन्सिल के ऊपर एक मोटी, भूरे रंग की झिल्ली बन जाती है (यह इसका सबसे बड़ा लक्षण है)।
  • गले में खराश: निगलने में कठिनाई और दर्द
  • गर्दन में सूजन: लिम्फ नोड्स (ग्रंथियों) के सूजने के कारण गर्दन ‘बुल नेक’ जैसी दिखने लगती है।
  • बुखार और कमजोरी: हल्का बुखार और ठंड लगना
  • सांस लेने में तकलीफ: झिल्ली के कारण वायुमार्ग अवरुद्ध हो सकता है। 

बचाव और उपचार 

  • DPT (डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टिटनस) का टीका सबसे प्रभावी है। 
  • बच्चों को इसके बूस्टर डोज समय पर देना अनिवार्य है।
  • इसमें एंटीटॉक्सिन और एंटीबायोटिक्स (जैसे पेनिसिलिन या एरिथ्रोमाइसिन) का उपयोग किया जाता है।
  • मरीज को अलग (Isolate) रखना चाहिए ताकि संक्रमण दूसरों तक न फैले। 
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